Bachcho ke sarvangin vikas keliye khilone sabse achchhe sadhan hai .inke dwara indoor & outdoor khel, block building, puzzle, dance etc. Ki gatividhi karakar vikas & vraddhi ki ja sakti hai .
खिलाने से बच्चों में Analysis, synthesis, colour identification efficiency, shape and size ,feelings share tendency etc जैसी quality आती है और DIY method से वे self dependent बनते हैं!!
बच्चों को खिलौनों से खेलना और उनकी आकृति आकर का पता लगाना रुचिकर लगता है,वे अपनी एकाग्रता और उत्सुकता से खिलौनों से साथ होने वाली गतिविधियों में आनंद लेते है। अतः शुरुवाती वर्षों में खिलौनों के माध्यम से सिखाना निश्चित रूप से प्रभावी होता है।
Toys can be arranged according to the interests of children. They can be arranged in different areas like dolls and puppets,art and craft area,maths and puzzles areas.they should be made from waste materials and taken from their surroundings
January 20, 2023 at 6:46 AM बच्चों को खिलौनों से खेलना और उनकी आकृति आकर का पता लगाना रुचिकर लगता है,वे अपनी एकाग्रता और उत्सुकता से खिलौनों से साथ होने वाली गतिविधियों में आनंद लेते है। अतः शुरुवाती वर्षों में खिलौनों के माध्यम से सिखाना निश्चित रूप से प्रभावी होता है।
प्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लेने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए विकास के प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक खेल गतिविधि सोचें। आपने गतिविधि को कैसे नियोजित किया, इसके संबंध में अपने विचार साझा करें। खेल हमेशा बच्चों के लिए एक आनंददायक अनुभव होता है लेकिन इस आनंदमय अनुभव को स्पष्ट रूप से विशिष्ट वांछित सीखने के परिणाम और सामान्य रूप से समग्र विकासात्मक लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए।
बच्चों की रुचि के अनुसार खिलौने को एक क्रम में रखना चाहिए और गुड़िया और पपेट इन सबको अलग-अलग ब्लॉक में रखना चाहिए जिससे बच्चे आसानी से देख सके और उनके साथ खेल सके उनकी परिवेश के अनुसार भी खिलौने होने चाहिए जिससे वह खुद को जोड़ सके।
खेल की माध्यम से बच्चे संख्याज्ञान पहचान हो सकती है फुलो के नाम प्राणी पक्षी के नाम पहचान होती है कल्पना शक्ती का विकास होता हैं शब्द संपत्ती का विकास होता है
प्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए
बच्चों को खिलौनों से खेलना और उनकी आकृति आकर का पता लगाना रुचिकर लगता है,वे अपनी एकाग्रता और उत्सुकता से खिलौनों से साथ होने वाली गतिविधियों में आनंद लेते है। अतः शुरुवाती वर्षों में खिलौनों के माध्यम से सिखाना निश्चित रूप से प्रभावी होता है।
खिलौना का संधि विच्छेद अगर हम करें तो खिल होना होगा छोटे बच्चे खिलौना देखकर बहुत प्रसन्न होते हैं खिलौना खेलते खेलते वह अपने मनोभावों को व्यक्त करते करते अपने जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं
प्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लेने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए विकास के प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक खेल गतिविधि सोचें। आपने गतिविधि को कैसे नियोजित किया, इसके संबंध में अपने विचार साझा करें। खेल हमेशा बच्चों के लिए एक आनंददायक अनुभव होता है लेकिन इस आनंदमय अनुभव को स्पष्ट रूप से विशिष्ट वांछित सीखने के परिणाम और सामान्य रूप से समग्र विकासात्मक लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए।
प्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लेने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए विकास के प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक खेल गतिविधि सोचें। आपने गतिविधि को कैसे नियोजित किया, इसके संबंध में अपने विचार साझा करें। खेल हमेशा बच्चों के लिए एक आनंददायक अनुभव होता है लेकिन इस आनंदमय अनुभव को स्पष्ट रूप से विशिष्ट वांछित सीखने के परिणाम और सामान्य रूप से समग्र विकासात्मक लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए।
ShaliniJanuary 31, 2023 at 10:49 PM Toys can be arranged according to the interests of children. They can be arranged in different areas like dolls and puppets,art and craft area,maths and puzzles areas.they should be made from waste materials and taken from their surroundings
बच्चो की शिक्षा को प्रायोगिक रूप में समझने एवम वातावरण से अनुकरण करने हेतु खेल सामग्री का उपयोग किया जा सकता है...खेल सामग्री हेतु कम बजट के घरेलू सामान का उपयोग किया जा सकता है
स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए
कक्षा में बच्चे के वृद्धि और विकास को ध्यान में रखते हुए ऐसे खिलोनो का उपयोग करना चाहिए जिससे बच्चे का सूक्ष्म मोटर कौशल व सकल मोटर कौशल दोनों का विकास हो। साथ ही कुछ खेल ऐसे होने चाहिए जो बालक के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखे। जैसे गोल वृत बनाकर घोड़ा है संभाल भाई खेल की गतिविधि बालक के सर्वांगीण विकास में सहायक है।
बच्चों को खेलना ज्यादा पसंद है। और खेल के माध्यम से उनमें सृजनात्मकता, विश्लेषण क्षमता, क्रियात्मकता, मानसिकता, अभिव्यति इत्यादि कौशलो का विकास होता है। इसलिए उनको निम्न प्रकार के खेल खेलाए जा सके है - 1.जोड - तोड खेल 2. छोटे- छोटे बक्सो को जोड़कर नई -नई चीजे बनाना 3.समूह बनाकर लघु कविता प्रतियोगिता करवाना 4. गायब संख्या पता करना इत्यादि।
Khilaune bacche ke sbse axe dost hote hai. Bacche bachpan se hi khilauno se jude rehte hai isiliye unhe agar koi nayi chiz sikhani ho toh khilaune sahyak hote hai
बच्चो के वृद्धि एवम विकास के लिए उन खिलौनों का प्रयोग होना चाहिए जिसमे उनकी ज्ञानेंद्रियों का अत्यधिक प्रयोग हो। उनकी सुक्ष्म मांसपेशियों के विकसित होने सहयोग करे।
प्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले प्राकृतिक व वातावरण मे उपलब्ध सामग्री से निर्मित खिलौने का उपयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लाने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए ।
By using different types of toys, children learn use their mind...and free to do anything,use the toys in anyform,,,,,I means when we give child to play with toys,then at that time,they r learning with playing ....
बच्चों को खेलना ज्यादा पसंद है। और खेल के माध्यम से उनमें सृजनात्मकता, विश्लेषण क्षमता, क्रियात्मकता, मानसिकता, अभिव्यति इत्यादि कौशलो का विकास होता है। इसलिए उनको निम्न प्रकार के खेल खेलाए जा सके है - 1.जोड - तोड खेल 2. छोटे- छोटे बक्सो को जोड़कर नई -नई चीजे बनाना 3.समूह बनाकर लघु कविता प्रतियोगिता करवाना 4. गायब संख्या पता करना इत्यादि।
बच्चों को कक्षा कक्ष के अंदर सख्यात्मक, भाषा एवं भावात्मक रूप से सिखने सिखाने का कार्य में खेल गतिविधि ही सहज एवं सरल माध्यम है इससे बच्चो का चतुर्दिक विकास होता है
शारीरिक विकास:गेंद: गेंद से खेलना बच्चों के मोटर कौशल और हाथ-आँख समन्वय को बेहतर बनाता है।बिल्डिंग ब्लॉक्स: लेगो और अन्य निर्माण खिलौने बच्चों की हाथों की ताकत और बारीक मोटर कौशल को विकसित करते हैं।मानसिक विकास:पज़ल्स: पज़ल्स बच्चों की समस्या-समाधान क्षमता और तर्कशक्ति को बढ़ावा देते हैं।शैक्षिक खिलौने: वर्णमाला ब्लॉक्स, गिनती के खिलौने, और विज्ञान किट्स बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल को सुदृढ़ करते हैं।सामाजिक विकास:भूमिका निभाने वाले खिलौने (रोल-प्ले टॉयज): डॉक्टर किट, किचन सेट, और अन्य रोल-प्ले खिलौने बच्चों को सामाजिक परिस्थितियों में संलग्न होने और संवाद कौशल को विकसित करने में मदद करते हैं।साझा खिलौने: बोर्ड गेम्स और टीम गेम्स बच्चों को सहयोग, साझा करना, और टीम वर्क सिखाते हैं।भावनात्मक विकास:नरम खिलौने (सॉफ्ट टॉयज): बच्चे नरम खिलौनों के साथ खेलते हुए सुरक्षा और आराम महसूस करते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है।क्रिएटिव आर्ट टॉयज: रंगने, चित्र बनाने और अन्य क्रिएटिव गतिविधियों से बच्चों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में मदद मिलती है।
खिलौने को यदि शिक्षण सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाए तो बचे की सीखने की गति मैं बृद्धि हो जाती है।बच्चा अत्यंत रुचि और सलग्न हो कर सीखता है।।खिलोने अधिगम के अनुसार होने चाहिए।
खिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है। खेल खेल में संख्याज्ञान ,रंगो की पहचान आदि सीखने में मदद होती है। बच्चों को कक्षा कक्ष के अंदर सख्यात्मक, भाषा एवं भावात्मक रूप से सिखने सिखाने का कार्य में खेल गतिविधि ही सहज एवं सरल माध्यम है इससे बच्चो का चतुर्दिक विकास होता है
शिक्षार्थी की वृद्धि और विकास सहायता के लिए कक्षा में खिलौनों का उपयोग kaksha ke parivesh ko sangyanatmak , bodhatmak , evum sparshatmak banakar Kiya ja sakta hai .
बच्चों के सामाजिक विकास ,भावनात्मक विकास संवेगनात्मक, भाषा विकास, साथ ही साथ संख्यानात्मक विकास हेतु DIY मॉडल गतिविधि के माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास कर सकते हैं।
Bachcho ke sarvangin vikas keliye khilone sabse achchhe sadhan hai .inke dwara indoor & outdoor khel, block building, puzzle, dance etc. Ki gatividhi karakar vikas & vraddhi ki ja sakti hai .
Think about sensory activities and experiences for each sensory organ. Share how these sensory activities are beneficial for the young children in the Anganwadi.
You must have seen children around you in your family or neighbourhood. Think about the developmental characteristics of children and share on how they play, learn and grow?
TOYS ARE BEST TOOLS FOR LANGUAGE AND MATHS EXAMPLE ARRANGE DIFFERENT THINGS IN ASSANDING OR DECENDIN ORDFER
ReplyDeletePlayway metjod
DeleteKhilauno ke madhyam se bachhe sarta se shikhte hai
Deleteશૈક્ષણિક રમકડાં થકી શિક્ષણકાર્ય અસરકારક બને છે
ReplyDeleteરમત થકી બાળકોનો સાર્વત્રિક વિકાસ શક્ય બને છે
ReplyDeleteબાળકના રસ અને રુચિ પ્રમાણેના રમકડાં તથા રમતોથી બાળકનો સર્વાંગી વિકાસ સાધી શકાય છે.
Deleteखेल के माध्यम से बच्चों का समझ विकसित होता है
ReplyDeleteBache khilono se apni sanskriti parivesh k bare me sikhte h
DeleteSbhi ko khel pasand hota h
Deleteबच्चों की रुचि के अनुसार कम लागत वाले खिलौने होने चाहिए
Deleteखिलौने बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। खिलौने के द्वारा बच्चों को खेल-खेल में सिखाया जाता है।
DeleteBachcho ke sarvangin vikas keliye khilone sabse achchhe sadhan hai .inke dwara indoor & outdoor khel, block building, puzzle, dance etc. Ki gatividhi karakar vikas & vraddhi ki ja
ReplyDeletesakti hai .
Right
Deleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग
ReplyDeleteWe should use such toys which are helpful to develop them in thinking, playing, in flexibility of body language etc.
ReplyDeleteखिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है। खेल खेल में संख्याज्ञान ,रंगो की पहचान आदि सीखने में मदद होती है।
ReplyDeleteखिलौने से कुछ नयी सरंचना करवाए,ताकि बच्चो के मस्तिष्क का विकास हो सके
ReplyDeleteखिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है। खेल खेल में संख्याज्ञान ,रंगो की पहचान आदि सीखने में मदद होती है।
Deleteबच्चों में dynamics development, जोड़ तोड़ जैसे activities से synthesis and Analytic जैसे कौशल, colore Identity कर पाना etc
Deleteखिलोने से बच्चे की रूचि-अभिरुचि ज्ञात करना सरल है, उसका ध्यान केंद्रित कराकर सीखने में सहायता मिलती है
ReplyDeleteखिलाने से बच्चों में Analysis, synthesis, colour identification efficiency, shape and size ,feelings share tendency etc जैसी quality आती है और DIY method से वे self dependent बनते हैं!!
Deleteखिलौने से कुछ नयी सरंचना करवाने पर,बच्चो का मस्तिष्क विकास होता है,एवं खेल से आनंद भी मिलता है
ReplyDeleteबच्चों को खिलौनों से खेलना और उनकी आकृति आकर का पता लगाना रुचिकर लगता है,वे अपनी एकाग्रता और उत्सुकता से खिलौनों से साथ होने वाली गतिविधियों में आनंद लेते है। अतः शुरुवाती वर्षों में खिलौनों के माध्यम से सिखाना निश्चित रूप से प्रभावी होता है।
ReplyDeleteखेलो के माध्यम से विद्यार्थियों का विकास होता है और वे सीखते है।
ReplyDeleteखेल खेल में बच्चे पढ़ना लिखना सीखते हैं
Deleteखिलौने से कुछ नयी सरंचना करवाए,ताकि बच्चो का विकास हो सके।
ReplyDeleteजोड़ तोड़ वाले खिलौने होने चाहिए
ReplyDeleteTOY ARE THA BEST TOOL FOR LEARNING.
ReplyDeleteLEARNING BY PLAY ARE JOYFULL
ReplyDeleteखिलौनों का प्रयोग बच्चों को संख्या ज्ञान, रंग ज्ञान, पैटर्न ज्ञान व अन्य बाते सिखाने के लिए किया जा सकता है।
ReplyDeleteToys can be arranged according to the interests of children. They can be arranged in different areas like dolls and puppets,art and craft area,maths and puzzles areas.they should be made from waste materials and taken from their surroundings
ReplyDeleteJanuary 20, 2023 at 6:46 AM
ReplyDeleteबच्चों को खिलौनों से खेलना और उनकी आकृति आकर का पता लगाना रुचिकर लगता है,वे अपनी एकाग्रता और उत्सुकता से खिलौनों से साथ होने वाली गतिविधियों में आनंद लेते है। अतः शुरुवाती वर्षों में खिलौनों के माध्यम से सिखाना निश्चित रूप से प्रभावी होता है।
प्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लेने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए विकास के प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक खेल गतिविधि सोचें। आपने गतिविधि को कैसे नियोजित किया, इसके संबंध में अपने विचार साझा करें। खेल हमेशा बच्चों के लिए एक आनंददायक अनुभव होता है लेकिन इस आनंदमय अनुभव को स्पष्ट रूप से विशिष्ट वांछित सीखने के परिणाम और सामान्य रूप से समग्र विकासात्मक लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए।
ReplyDeleteबच्चों की रुचि के अनुसार खिलौने को एक क्रम में रखना चाहिए और गुड़िया और पपेट इन सबको अलग-अलग ब्लॉक में रखना चाहिए जिससे बच्चे आसानी से देख सके और उनके साथ खेल सके उनकी परिवेश के अनुसार भी खिलौने होने चाहिए जिससे वह खुद को जोड़ सके।
Deleteखेल की माध्यम से बच्चे संख्याज्ञान पहचान हो सकती है फुलो के नाम प्राणी पक्षी के नाम पहचान होती है
ReplyDeleteकल्पना शक्ती का विकास होता हैं शब्द संपत्ती का विकास होता है
રમકડાંના ઉપયોગથી શિક્ષણ ખુબજ અસરકારક બને છે. બાળકનો સાર્વત્રિક વિકાસ થાય છે.
ReplyDeleteखिलौने से कुछ नयी सरंचना करवाए,ताकि बच्चो के मस्तिष्क का विकास हो सके ।
ReplyDeleteखिलौने से कुछ नयी सरंचना करवाने पर,बच्चो का मस्तिष्क विकास होता है,एवं खेल से आनंद भी मिलता है
ReplyDeleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए
ReplyDeleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग
ReplyDeleteChildren take interest in reading by playing method
ReplyDeleteबच्चों को खिलौनों से खेलना और उनकी आकृति आकर का पता लगाना रुचिकर लगता है,वे अपनी एकाग्रता और उत्सुकता से खिलौनों से साथ होने वाली गतिविधियों में आनंद लेते है। अतः शुरुवाती वर्षों में खिलौनों के माध्यम से सिखाना निश्चित रूप से प्रभावी होता है।
ReplyDeleteखिलोने बच्चों को बहुत पसंद होते है यदि शुरुआती कक्षा में खिलोने के ज्यादातर पढ़ाया जाए तो बच्चे शिखने और पढ़ने में ज्यादा रुचि रखेंगे।
ReplyDeleteखेल के माध्यम से बच्चों का समझ विकसित होता है यह बिल्कुल सत्य है।
ReplyDeletePlayway method
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
Deleteखिलौना का संधि विच्छेद अगर हम करें तो खिल होना होगा छोटे बच्चे खिलौना देखकर बहुत प्रसन्न होते हैं खिलौना खेलते खेलते वह अपने मनोभावों को व्यक्त करते करते अपने जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं
ReplyDeleteबच्चे खेल -खेल में सीखते हैं खेलकूद शिक्षा का अभिन्न अंग है।
ReplyDeleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लेने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए विकास के प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक खेल गतिविधि सोचें। आपने गतिविधि को कैसे नियोजित किया, इसके संबंध में अपने विचार साझा करें। खेल हमेशा बच्चों के लिए एक आनंददायक अनुभव होता है लेकिन इस आनंदमय अनुभव को स्पष्ट रूप से विशिष्ट वांछित सीखने के परिणाम और सामान्य रूप से समग्र विकासात्मक लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए।
Deleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लेने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए विकास के प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक खेल गतिविधि सोचें। आपने गतिविधि को कैसे नियोजित किया, इसके संबंध में अपने विचार साझा करें। खेल हमेशा बच्चों के लिए एक आनंददायक अनुभव होता है लेकिन इस आनंदमय अनुभव को स्पष्ट रूप से विशिष्ट वांछित सीखने के परिणाम और सामान्य रूप से समग्र विकासात्मक लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए।
Deleteबच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्री-प्राइमरी से ही खिलौनों के माध्यम से समझ विकसित किया जा सकता है।
ReplyDeleteBilkul ji
DeleteShaliniJanuary 31, 2023 at 10:49 PM
DeleteToys can be arranged according to the interests of children. They can be arranged in different areas like dolls and puppets,art and craft area,maths and puzzles areas.they should be made from waste materials and taken from their surroundings
अच्छा है।
ReplyDeleteBacche Khel ke Madhyam se Shiksha ko jaldi se jaldi grahan karte hain tatha Ve Apna sarvangini Vikas Karte Hain
ReplyDeleteईसीसीई स्कूल और जीवन में सीखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता हैं
ReplyDeleteLearning by play are joyful
ReplyDeleteWe can use them for the same in a safe,useful and recreational way.
ReplyDeleteखिलौने से कुछ नयी सरंचना करवाने पर,बच्चो का मस्तिष्क विकास होता है,एवं खेल से आनंद भी मिलता है
ReplyDeletevery good
ReplyDeleteखेल के माध्यम से बच्चों मे समझ, सामाजिक गुणों का विकास होता है।
ReplyDeleteबच्चो को खेल की सामग्री उपलब्ध खेल के माहोल में दे और उनके साथ ऐसे एक शिक्षक रहे जो बच्चो को सही या गलत है
ReplyDeleteLEARNING BY PLAY ARE JOYFULL
ReplyDeleteबच्चो की शिक्षा को प्रायोगिक रूप में समझने एवम वातावरण से अनुकरण करने हेतु खेल सामग्री का उपयोग किया जा सकता है...खेल सामग्री हेतु कम बजट के घरेलू सामान का उपयोग किया जा सकता है
ReplyDeleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteखिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है। खेल खेल में संख्याज्ञान ,रंगो की पहचान आदि सीखने में मदद होती है।
ReplyDeleteVery good information
ReplyDeleteखेल से बच्चे का शारिरीक विकास होता है जो वृद्धि का एक भाग है
ReplyDeleteस्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग बच्चों का ध्यान एकाग्र करने हेतु खिलौनों का प्रयोग किया जाना चाहिए
ReplyDeleteबच्चो के खेल ने से सर्वांगीण विकास होता हैं
ReplyDeleteखिलौनों का उपयोग अवधारणा को समझने में कर सकते हैं।
ReplyDeleteBlocks se different different chije bna skte h, size k according arrange kra skte h
ReplyDeleteकक्षा में बच्चे के वृद्धि और विकास को ध्यान में रखते हुए ऐसे खिलोनो का उपयोग करना चाहिए जिससे बच्चे का सूक्ष्म मोटर कौशल व सकल मोटर कौशल दोनों का विकास हो।
ReplyDeleteसाथ ही कुछ खेल ऐसे होने चाहिए जो बालक के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखे। जैसे गोल वृत बनाकर घोड़ा है संभाल भाई खेल की गतिविधि बालक के सर्वांगीण विकास में सहायक है।
खिलौनों से बच्चे हर बार कुछ ना कुछ सीखते ही है
ReplyDeleteFreedoms
ReplyDeleteOk
DeleteBachcho ko ganit vigyan colour paryaavaran sikhane me khilauno ka prayog kiya ja sakata hai
ReplyDeleteखिलौना कार्नर बनाकर
ReplyDeleteखेल में समहू बनाकर खिलोनो का बेहतर उपयोग किया जा सकता हैं
ReplyDeleteबच्चों को खेलना ज्यादा पसंद है। और खेल के माध्यम से उनमें सृजनात्मकता, विश्लेषण क्षमता, क्रियात्मकता, मानसिकता, अभिव्यति इत्यादि कौशलो का विकास होता है। इसलिए उनको निम्न प्रकार के खेल खेलाए जा सके है -
ReplyDelete1.जोड - तोड खेल
2. छोटे- छोटे बक्सो को जोड़कर नई -नई चीजे बनाना
3.समूह बनाकर लघु कविता प्रतियोगिता करवाना
4. गायब संख्या पता करना इत्यादि।
सहायता के िलए का म िखलौन का उपयोग किया जा सकता है?
ReplyDeleteKuch visay jaise maths , english, hindi jaise visay ko sikhne mei khilaune sahayak hote hai. Khilauno se baccho mei sikhne ki ruchi badhti hai
ReplyDeleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग
Deleteखिलोनो से बच्चों का समग्र विकास होता है और खिलोने स्वनिर्मित होना चाहिए |
ReplyDeleteKhilaune bacche ke sbse axe dost hote hai. Bacche bachpan se hi khilauno se jude rehte hai isiliye unhe agar koi nayi chiz sikhani ho toh khilaune sahyak hote hai
ReplyDeleteखिलौने से के माध्यम से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत कर उन्हें खेल-खेल के माध्यम से पढ़ाई को रुचि कर बनाया जा सकता है।
ReplyDeleteकक्षा कक्ष में बच्चों की समग्र विकास के लिए जोड़ तोड़ के खिलौने डिस के खिलौने दिए के खिलौने पजल्स आदि का उपयोग करके उनके समग्र विकास किया जा सकता है
ReplyDeleteवृद्धि और विकास में खिलौने एक महत्वपूर्ण साधन होते है , यह विद्यार्थियों के शारीरिक एवम मनोगत्य विकास में सहायक होते है।
ReplyDeleteखिलौनों से बच्चों का समग्र विकास होता है खिलौने स्वनिर्मित होने चाहिए
ReplyDeleteबच्चो के वृद्धि एवम विकास के लिए उन खिलौनों का प्रयोग होना चाहिए जिसमे उनकी ज्ञानेंद्रियों का अत्यधिक प्रयोग हो।
ReplyDeleteउनकी सुक्ष्म मांसपेशियों के विकसित होने सहयोग करे।
खिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है। खेल खेल में संख्याज्ञान ,रंगो की पहचान आदि सीखने में मदद होती है।
ReplyDeleteBache khilono se apni sanskriti parivesh ke bare me sikhte hai.
ReplyDeleteLearning play are joyfull.
ReplyDeleteLearning play are joyfull
ReplyDeleteखेल खेल में बच्चे पेयर लर्निंग गतिविधि द्वारा सीखते हैं
ReplyDeleteOk
ReplyDeleteखिलौना बच्चों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षण सामग्री हैं। इन्हीं के द्वारा बच्चों को सीखने के सुअवसर प्राप्त होता है
ReplyDeleteखिलौनों के द्वारा बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है।खेल खेलमें संख्या ज्ञान ,वर्ण पहचान तथा रंगों का ज्ञान होता है।
ReplyDeleteखिलौने बच्चों के आयु अनुरूप होने चाहिए. जैसे जोड़ तोड़ वाले खिलौने . जिनमें बच्चों को मजा भी आये और वो खेल खेल में सीखें.
ReplyDeleteखिलौनों से कुछ नई खोज कराकर,बच्चों का मस्तिष्क विकास होता है,और खेल से भी आनंद मिलता है
ReplyDeleteBacchon ke Ruchi ke anusar khilaunon se bacche bahut kuchh sikhate Hain unka Aakar rang sankhyatmak Gyan aadi ke mein vriddhi hoti hai
ReplyDeleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले प्राकृतिक व वातावरण मे उपलब्ध सामग्री से निर्मित खिलौने का उपयोग किया जाना चाहिए साथ ही साथ खिलौने के प्रयोग हेतु समूह का निर्माण और उसमें रचनात्मकता लाने हेतु उन्हें स्वतंत्र सोचने के अवसर देने चाहिए ।
ReplyDeleteBy using different types of toys, children learn use their mind...and free to do anything,use the toys in anyform,,,,,I means when we give child to play with toys,then at that time,they r learning with playing ....
ReplyDeleteबच्चों को खेलना ज्यादा पसंद है। और खेल के माध्यम से उनमें सृजनात्मकता, विश्लेषण क्षमता, क्रियात्मकता, मानसिकता, अभिव्यति इत्यादि कौशलो का विकास होता है। इसलिए उनको निम्न प्रकार के खेल खेलाए जा सके है -
ReplyDelete1.जोड - तोड खेल
2. छोटे- छोटे बक्सो को जोड़कर नई -नई चीजे बनाना
3.समूह बनाकर लघु कविता प्रतियोगिता करवाना
4. गायब संख्या पता करना इत्यादि।
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DeleteWe should use such toys which are helpful to develop them in thinking, playing, in flexibility of body language
ReplyDeleteWe should use such toys which are helpful to develop them
ReplyDeleteબચ્ચે જો દેખતે હૈ જો સોચતે ઔર જો કલ્પના કરતે હૈ ઉસે કે અનુસાર વોહ અપના ખેલ ખેલતે હૈ ઈસસે ઉસે મહાવર મિલતા હૈ
ReplyDeleteરમકડાં નિર્માણ ની પ્રવૃત્તિ થી બાળકોની સર્જનાત્મક માં વધારો કરી શકાય. બાળકોના સર્વાંગી વિકાસમાં રમકડાંની પસંદગી પણ અગત્યનો ભાગ ભજવે છે.
ReplyDeleteबच्चे नया-नया सीखने के लिए तत्पर होते हैं ।उनका आईक्यू लेवल बहुत बढ़िया होता है वह अपने आप सीखते हैं ।
ReplyDeleteजिस प्रकार का कोशल विकसित करना है उससे संबंधित खिलोने उसे दिए जाए जिससे वह अपने अनुभव के आधार पर सीखे
ReplyDeleteGames help the analytical mind of child. He apply his mind to play block and arrange them in colors, alphabets, ascending and descending order. Etc
ReplyDeleteबच्चों को कक्षा कक्ष के अंदर सख्यात्मक, भाषा एवं भावात्मक रूप से सिखने सिखाने का कार्य में खेल गतिविधि ही सहज एवं सरल माध्यम है इससे बच्चो का चतुर्दिक विकास होता है
ReplyDeleteशारीरिक विकास:गेंद: गेंद से खेलना बच्चों के मोटर कौशल और हाथ-आँख समन्वय को बेहतर बनाता है।बिल्डिंग ब्लॉक्स: लेगो और अन्य निर्माण खिलौने बच्चों की हाथों की ताकत और बारीक मोटर कौशल को विकसित करते हैं।मानसिक विकास:पज़ल्स: पज़ल्स बच्चों की समस्या-समाधान क्षमता और तर्कशक्ति को बढ़ावा देते हैं।शैक्षिक खिलौने: वर्णमाला ब्लॉक्स, गिनती के खिलौने, और विज्ञान किट्स बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल को सुदृढ़ करते हैं।सामाजिक विकास:भूमिका निभाने वाले खिलौने (रोल-प्ले टॉयज): डॉक्टर किट, किचन सेट, और अन्य रोल-प्ले खिलौने बच्चों को सामाजिक परिस्थितियों में संलग्न होने और संवाद कौशल को विकसित करने में मदद करते हैं।साझा खिलौने: बोर्ड गेम्स और टीम गेम्स बच्चों को सहयोग, साझा करना, और टीम वर्क सिखाते हैं।भावनात्मक विकास:नरम खिलौने (सॉफ्ट टॉयज): बच्चे नरम खिलौनों के साथ खेलते हुए सुरक्षा और आराम महसूस करते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है।क्रिएटिव आर्ट टॉयज: रंगने, चित्र बनाने और अन्य क्रिएटिव गतिविधियों से बच्चों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में मदद मिलती है।
ReplyDeleteबच्चे खेल के द्वारा सहजता और अपनी गति से सीखते हैं।
ReplyDeleteखिलौनों द्वारा गतिविधियां करवाकर.
ReplyDeleteखिलोने से बच्चे की रूचि-अभिरुचि ज्ञात करना सरल है, उसका ध्यान केंद्रित कराकर सीखने में सहायता मिलती है
ReplyDeleteKhilauney ke madhyam se sochane ki kshamta ka vikas hota hai
ReplyDeleteखिलौने को यदि शिक्षण सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाए तो बचे की सीखने की गति मैं बृद्धि हो जाती है।बच्चा अत्यंत रुचि और सलग्न हो कर सीखता है।।खिलोने अधिगम के अनुसार होने चाहिए।
ReplyDeleteKisi v vishay ko achhe se samjhne k liye khilone ek achha madhyam he....
ReplyDeleteBacchon keVikas mein Khel mahatvpurn bhumika nibhate Hain khelon ke madhyam se bacchon mein sharirik mansik sanvegatmak Vikas hota hai.
ReplyDeleteखेल खेल में बच्चे पढ़ना लिखना सीखते हैं
ReplyDeleteखिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है। खेल खेल में संख्याज्ञान ,रंगो की पहचान आदि सीखने में मदद होती है। बच्चों को कक्षा कक्ष के अंदर सख्यात्मक, भाषा एवं भावात्मक रूप से सिखने सिखाने का कार्य में खेल गतिविधि ही सहज एवं सरल माध्यम है इससे बच्चो का चतुर्दिक विकास होता है
ReplyDeleteशिक्षार्थी की वृद्धि और विकास सहायता के लिए कक्षा में खिलौनों का उपयोग kaksha ke parivesh ko sangyanatmak , bodhatmak , evum sparshatmak banakar Kiya ja sakta hai .
ReplyDeleteबच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग कर उनके विकास में सहायता कर सकते है
ReplyDeleteखेल के माध्यम से बच्चों का समझ विकसित होता है
ReplyDeletehttps://youtu.be/Od4qgBv9NmM?si=LIk1HPb8WYqXNTs1
ReplyDeleteKhilaune ke Madhyam se bacche Apne dimag ko Aur Bhi Jyada use karte hain
ReplyDeleteGood job good training
ReplyDeleteBachcho ko vastuo ke name sikhane colour name,ak ak ki sangti,gatividhi ke liye bhi khilono ka prayog kiya ja sakta h
ReplyDeleteToys are best for children development we can use them like ascending and descending order etc.
ReplyDeleteबच्चों के सामाजिक विकास ,भावनात्मक विकास संवेगनात्मक, भाषा विकास, साथ ही साथ संख्यानात्मक विकास हेतु DIY मॉडल गतिविधि के माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास कर सकते हैं।
ReplyDeleteBachche ke aayu ke anusar toys ka selection karna chahiye.
ReplyDeleteBachche khilono se khelkar bhasha aur ganit ke sath uske talo ka samtal Or khurdura ke bare me seekhta hai.
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ReplyDeleteप्री स्कूल में बच्चों को उनकी रुची के अनुरूप कम लागत या शून्य लागत वाले देशी ,सामाजिक माहौल के अनुसार खिलौने का उपयोग
ReplyDeleteखेल संपूर्ण विकास के लिए अति आवश्यक है
ReplyDeleteGood thoughts
ReplyDeleteKilone Bachu kho Ruchi se Bhar dete hai
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ReplyDeleteखिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है। खेल खेल में संख्याज्ञान ,रंगो की पहचान आदि सीखने में मदद होती है।
बच्चों के समग्र विकास के लिए सीखने की प्रक्रिया को रुचिकर बनाने में खेल एवं खिलौने बहुत सहायक होते हैं।
ReplyDeleteAaj pados mein bacche तरह-तरह ke Khel khelte Hain Khel Khel rahe the unka Vikas hota hai .
ReplyDeleteBacchon ko तरह-तरह ke khilaune dekar unke sharirik mansik tatha unke baudhik abhyas Vikas kara sakte hain
ReplyDeleteBacchon ko तरह-तरह ke khilaune dekar unka Shari man se gyanatmak rachnatmak Vikas Kiya ja sakta hai.
ReplyDeleteविद्यार्थियों को सबसे प्रिय खेल है और इस से मिली हुई सीख को हमेशा याद रखें
ReplyDeleteશૈક્ષણિક રમકડાં થકી શિક્ષણકાર્ય અસરકારક બને છે
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ReplyDeleteTOYS ARE BEST TOOLS FOR LANGUAGE AND MATHS EXAMPLE ARRANGE DIFFERENT THINGS IN ASSANDING OR DECENDIN ORDFER
ReplyDeleteबच्चों को खिलौने उनके रूचि
ReplyDeleteके अनुसार दिया जाए जिससे वे खिलौने का आकार, आकृति, रंग, संख्या आदि से अवगत हो सके।
खिलौने का इस्तेमाल करके बच्चों में संज्ञानात्मक विकास, सामाजिक और भावात्मक विकास विकास बढ़ाया जा सकता है।
ReplyDeleteबच्चे खेल के द्वारा सहजता और अपनी गति से सीखते हैं। खिलौनों के माध्यम से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ती है।
ReplyDeleteKhilono ke madhiyum se bacche jaldi shikhte h
ReplyDeleteबच्चों को खिलौने पसंद होते हैं। इनके माध्यम से सीखने की गति बढ़ती है
ReplyDeleteBachcho ke sarvangin vikas keliye khilone sabse achchhe sadhan hai .inke dwara indoor & outdoor khel, block building, puzzle, dance etc. Ki gatividhi karakar vikas & vraddhi ki ja
ReplyDeletesakti hai .
ReplyDeleteTOYS ARE BEST TOOLS FOR LANGUAGE AND MATHS EXAMPLE ARRANGE DIFFERENT THINGS IN ASSANDING OR DECENDIN ORDFER
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