कोर्स 4 : गतिविधि 2 : विचार करें :

अभिभावकों के साथ नियमित और अनवरत बातचीत तथा इसे बनाए रखने के लिए प्रेरित करना, अभिभावकों और परिवारों की सहभागिता के लिए काफ़ी महत्‍वूपर्ण है। अपनी जानकारी के अनुसार अभिभावकों की प्री-स्‍कूलों में कम भागीदारी के कारणों पर विचार करें। उन मौजूदा रणनीतियों में सुधार लाने पर भी विचार करें जो उन्‍हें संलग्‍न कराने में लाभकारी हो सकती हैं।

Comments

  1. ईसीसीई स्कूल और जीवन में सीखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता है

    ReplyDelete
    Replies
    1. अपने रोजगार/ मजदूरी में विघ्न की चिंता होना, अलग वेशभूषा व् सम्प्रेषण कौशल का अभाव

      Delete
    2. Most of the guardian are worker.They go on their work in the morning and return late in evening, so they are unable to participate or they have less participation. If we wish them to participate, we should call them on the day when they are at home or let their father/mother or wives be ingauged in such participation.

      Delete
    3. Abhibhavko ki siksha k prati jagrukta me kmi aur school me kaam ki adhikta se bar bar smprk pr jane me asmarthta

      Delete
    4. अभिभावको को शिक्षा के प्रति जागरूक करना अति आवश्यक है। उनको शिक्षा का महत्व बताना अति आवश्यक है ,जिससे कि वह बच्चों की शिक्षा के महत्व को समझ सकें।

      Delete
  2. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।

    ReplyDelete
  3. अपने रोजगार/ मजदूरी में विघ्न की चिंता होना, अलग वेशभूषा व् सम्प्रेषण कौशल का अभाव

    ReplyDelete
    Replies
    1. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।

      Delete
  4. आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों का भी कम से कम दो दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम होना चाहिए

    ReplyDelete
    Replies
    1. अपने रोजगार/ मजदूरी में विघ्न की चिंता होना, अलग वेशभूषा व् सम्प्रेषण कौशल का अभाव

      Delete
    2. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है

      Delete
  5. SEEKHANE ME ABHIBHAVAKO AUR SAMUDAY KI BHAGIDARI AAVASHYAK HAI.

    ReplyDelete
  6. અભિભાવક અને પરિવારનો સહયોગ બાળકના વિકાસમાં મહત્વપૂર્ણ છે

    ReplyDelete
  7. Hesitation may be due to improper communication, due to their economical status, fear of interference of community in schools etc.This can be minimized by regular ptms and by participating in community programs

    ReplyDelete
  8. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है

    ReplyDelete
  9. अभिभावकों की प्री स्कूल में भागीदारी बढ़ाने के लिए समय समय पर प्रयासरत रहना चाहिए।

    ReplyDelete
  10. Communication is necessary with all persons related to the chid.

    ReplyDelete
  11. અભિભાવક અને પરિવારનો સહયોગ બાળકના વિકાસ માટે ખુબ મહત્વનો છે.

    ReplyDelete
  12. आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों का भी कम से कम दो दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम होना चाहिए

    ReplyDelete
  13. अभिभावक की उदासीनता,अशिक्षा,कमजोर आर्थिक स्थिति आदि कारक हैं कि अभिभावक अपने बच्चों को प्री प्राइमरी में नहीं भेजते।भौतिक परिवेश, कार्यकत्रियो की उदासीनता इसके प्रमुख कारणों मे से एक है।




    ReplyDelete
  14. अभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आगन बाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे

    ReplyDelete
  15. बच्चों के अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।

    ReplyDelete
  16. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।

    ReplyDelete
  17. आंगनबाड़ी केंद्र के कर्मचारियों का सक्रिय होना आवश्यक है। अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है। अभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आंगनबाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे।

    ReplyDelete
  18. बच्चों की प्रगति में अभिभावकों का सहयोग भी परम आवश्यक है अतः उनसे समय-समय पर संपर्क कर उन्हें उनके स्तर जान सूचना देनी चाहिए,!

    ReplyDelete
  19. अभिभावकों की वृहद स्तर और शिक्षा के प्रति उदासीनता,उसकी अशिक्षा,उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति तथा विद्यालय प्रमुख एवं शिक्षकों द्वारा संपर्क का अभाव मुख्य कारक हैं कि अभिभावक अपने बच्चों को प्री प्राइमरी में नहीं भेजते।भौतिक परिवेश, कार्यकत्रियो की उदासीनता इसके प्रमुख कारणों मे से एक है।

    ReplyDelete
  20. अभिभावकों की जागरूकता उन्हें अपने बच्चों के प्रति समर्पण का भाव पैदा करता है पर गांव के स्कूलों में या आंगनबाड़ियों में अभिभावक पूर्ण रूप से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर निर्भर हो जाते हैं और अभिभावक यह समझते हैं छोटे बच्चे आंगनबाड़ी की देखरेख में है और वह अपने काम में अपनी जीविका में संलग्न रहना पसंद करते हैं वह आंगनबाड़ी कार्यशाला से भी उदासीन बने रहते हैं यह जागरूकता उन्हें मोटिवेशनल स्पीच के द्वारा और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सुझाए गए आयामों के द्वारा उनके दिमाग को में परिवर्तन परिवर्तन करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी भी बन जाती है

    ReplyDelete
  21. Hamen mahine Mein kam se kam Ek meeting abhibhavakon ke sath rakhni chahie jisse ki Ham bacchon Ki Tarah Ki ki jankari unko De Chak De sake tatha Unse aapsi Sahyog prapt kar Saken

    ReplyDelete
  22. ईसीसीई स्कूल और जीवन में सिखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता है।l

    ReplyDelete
  23. अभिभावकों का बच्चों के साथ गतिविधि में साथ देना बहुत महत्वपूर्ण है

    ReplyDelete
  24. Due to lack of time and shyness.We have to make them a part of their children 's learning process.

    ReplyDelete
  25. ईसीसीई स्कूल और जीवन में सिखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता है।l

    ReplyDelete
  26. कुछ अभिवको के लिए बालको के साथ कुछ जरोरी कार्यक्रम करवाए ताकि पलक गण पैरेरिट हो

    ReplyDelete
  27. Hesitation by parents to come forward , sometimes due to shortage of time. Parents play an important role in pre-primary education and they must be motivated to come forward and participate in classroom activities as well.

    ReplyDelete
  28. माता-पिता की भागीदारी बहुत अच्छी रहती है पर एक झिझक महसूस करते हैं स्कूल में बच्चों और टीचरों के साथ कोई भी गतिविधि करते हुए

    ReplyDelete
  29. अभिभावकों के साथ नियमित और अनवरत बातचीत से अभिभावक की सहभागिता प्राप्त होगी
    व्यस्त दिनचर्या व समय अभाव के कारण अभिभावक प्री स्कूल से नही जुड़ पाते है

    ReplyDelete
  30. प्रत्येक अभिभावक गतिविधियों में शामिल इसलिए भी नहीं हो पाता कि वह अपनी दैनिक आवश्यकताओं के कारण उचित समय नहीं दें पाता।

    ReplyDelete
  31. प्रतीक अभिभावक गतिविधियों में शामिल इसलिए नहीं हो पता कि वह अपनी दैनिक आवश्यकता के काम करता है इस कारण समय नहीं दे पाता

    ReplyDelete
  32. अभिभावक अपने जीवन निर्वाह के लिए कुछ न कुछ काम करते हैं ज्यादातर तो मजदूर वर्ग से आते हैंl उनके काम का समय फिक्स होता है l वे स्कूल में अपनी भागीदारी निभाने में असमर्थ रहते हैं

    ReplyDelete
  33. मौजूदा परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्र के प्रि प्रायमरी स्कूलों मे पढ़ाई का माहौल न होना मुख्य कारण हो सकता है।

    ReplyDelete
  34. आमतौर पर देखा गया है कि अभिभावकों की सहभागिता विद्यालय के प्रति अपेक्षाकृत कम रहती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर अभिभावक रोजमर्रा के कार्यो में व्यस्तता व कुछ अभिभावक जो ग्रामीण परिवेश से आते है उनमे साक्षरता का अभाव होता है इसलिए अभिभावक विद्यालय के प्रति उदासीन होते है।
    अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रत्येक शनिवार को नो बेग डे गतिविधिया आयोजित की जाती है उस समय अभिभावकों की भागीदारी भी इस गतिविधि में सुनिश्चित की जानी चाहिए साथ ही प्रत्येक 15 दिनों में PTM का आयोजन किया जाना चाहिए।

    ReplyDelete
  35. बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों का सहयोग जरूरी है।

    ReplyDelete
  36. जब तक अभिभावक खुद नहीं जुड़ेंगे सर्वागीर्ण विकास नही हो सकता

    ReplyDelete
  37. Abhibhavakon ko vishvash dilana tatha unka samman karake

    ReplyDelete
  38. * समय की कमी होने के कारण
    * अशिक्षित होने के कारण
    * आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण
    * बातचीत करने में झिझक के कारण

    ReplyDelete
  39. अभिभावकों व शिक्षकों के सयुंक्त प्रयास से बच्चों के समग्र रूप से विकास मे सुधार कर सकते है

    ReplyDelete
  40. # जागरूकता की कमी
    # घरेलू कार्योँ को अधिक महत्व देना
    # शिक्षा की कमी
    # शैक्षिक वातावरण का अभाव
    # जीवकोपार्जन में ही व्यस्त रहना
    # बाल मनोविज्ञान की जानकारी का अभाव
    # लोगों के बीच अपनी बात रखने में झिझक

    ReplyDelete
  41. अभिभावकों के साथ नियमित और अनवरत बातचीत बच्चों के शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह एक सकारात्मक परिक्रमा है जो बच्चों को समर्पित और जागरूक बनाता है।

    ReplyDelete
  42. Abhi Baba kyon bacchon mein jagrukta ki Kami Allah Ko jagruk kiya jaaye aur anganbadiyon ko prashikshit kiya jaaye isase donon mein kam karne mein acchi saubhagita rahegi

    ReplyDelete
  43. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है

    ReplyDelete
  44. अभिभावकों का रुचि न होना।
    अभिभावकों की उदासीनता।
    कृषि कार्य में संलग्नता या कार्य की अधिकता ।
    पलकों की संलग्नता के लिए बहुत अधिक प्रयास की आवश्यता है।

    ReplyDelete
  45. Parivar aur abhibhavak pre school mei kam ruchi lete hai kyuki unhe siksha ka mahatav nhi smj aata. Unhe lgta hai ki schoolo mei padhai nhi hoti.

    ReplyDelete
  46. अभिभावकों की जागरूकता उन्हें अपने बच्चों के प्रति समर्पण का भाव पैदा करता है पर गांव के स्कूलों में या आंगनबाड़ियों में अभिभावक पूर्ण रूप से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर निर्भर हो जाते हैं और अभिभावक यह समझते हैं छोटे बच्चे आंगनबाड़ी की देखरेख में है और वह अपने काम में अपनी जीविका में संलग्न रहना पसंद करते हैं वह आंगनबाड़ी कार्यशाला से भी उदासीन बने रहते हैं यह जागरूकता उन्हें मोटिवेशनल स्पीच के द्वारा और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सुझाए गए आयामों के द्वारा उनके दिमाग को में परिवर्तन परिवर्तन करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी भी बन जाती है ।

    ReplyDelete
  47. अभिभावक का स्कूल के बच्चों से संबंध होना बच्चों के सीखने के लिए अति महत्वपूर्ण होता है यदि अभिभावक एवं शिक्षक एक दूसरे से तालमेल बिठाकर बच्चों के विकास के लिए तत्पर हो तो बच्चों को उचित दिशा प्रदान किया जा सकता है प्राय देखा जाता है कि अभिभावक अपने काम के प्रति व्यस्त होने के कारण बच्चे एवं स्कूल से दूर होते जा रहे हैं जिसके कारण बच्चे स्कूल की गतिविधियों को सहज नहीं ले पाए तथा वह घर पर भी असहज होने के कारण अपने शिक्षा के प्रति लगाव से दूर होते जा रहे हैं अत: अभिभावक एवं शिक्षक का आपसी तालमेल होना आवश्यक है।

    ReplyDelete
  48. बच्चा अपने आस - पास के परिवेश से सीखता है , अत: इस दृष्टि से बच्चे के सीखने में एक समुदाय या अभिभावक महत्वपूर्ण भूमिक अदा कर सकते हैं।

    ReplyDelete
  49. आपने देखा होगा कि किस प्रिाि अ कििावि औि समुदाय िे लोग सिकूल/आंगनवाडी आते हैं औि गकतकवकधयों में िाग लेते हैं। उनिी िागीदािी िी गुरवत्ा औि सीमा पि आपिा अवलोिन कया है? कया आप महसकूस ििते हैं कि वे सवयं िो अकिवयकत ििने औ ि िाग लेने से रमा्ण ते हैं या आपिा इससे िोई किन्न मत है? अपने अवलोिन दकूसिों ि े साथ साझा ििें

    ReplyDelete
  50. अभिभावक व बच्चो का सहयोग स्मपूर्ण विकास के लिए महत्वपूर्ण है

    ReplyDelete
  51. माता-पिता और परिवार का योगदान महत्वपूर्ण है

    ReplyDelete
  52. इसमे सबसे पहला महत्वपूर्ण कारण यह हो सकता हैंकि अभिभावक दोनों नौकरी या काम करने केंलिए बाहर जाते हो, यनदोनो कम या अशिक्षित हो सकते हैं, इसमें सुधार लाने हेतु अध्यापक द्वारा सिखाई गाईंगतिविधियाँ उनजोने अपने बच्चो से नियमित करवानी चाहिए

    ReplyDelete
  53. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को ट्रेंड किया जाए कि किस तरीके से बच्चों को गतिविधि करनी है उन्हें नई-नई तरीकों से कैसे सीखना है कैसे उन्हें विद्यालय में आने के लिए प्रोत्साहित करना है और बच्चों को खेल-खेल के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों के द्वारा नई-नई चीजों को सिखाना और उनके जीवन में उन्हें अप्लाई करना आना चाहिए, छोटे बच्चों को खेल की विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किस प्रकार से भाषा विकास गणितीय विकास पढ़ने लिखने की समझ विकसित की जाए इस पर पूर्णतया जोड़ दिया जाए

    ReplyDelete
  54. અભિભાવક અને પરિવારનો સહયોગ બાળકના વિકાસ માટે ખુબ મહત્વનો છે.

    ReplyDelete
  55. आंगनबाड़ी केंद्र के कर्मचारियों का सक्रिय होना आवश्यक है। अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है। अभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आंगनबाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे।

    ReplyDelete
  56. Overlapping of time
    Hesitation
    Communication gap
    Low literacy rate
    Lack of resources

    ReplyDelete
  57. इसमें सबसे पहला महत्वपूर्ण कारण यह हो सकता है कि अभिभावक दोनों नौकरी या काम करने के लिए बाहर जा सकते हैं, यानदोनो कम या शिक्षित हो सकते हैं, इसमें सुधार लाने के लिए शिक्षकों द्वारा सिखाई गई गाईंगतिविधियाँ उनजोने अपने बच्चों से नियमित रूप से करवानी चाहिए।

    ReplyDelete
  58. अभिभावक और शिक्षक मीटिंग प्रति माह करायी जाय। सहभागिता न होने के कारण को समझा जाय। अभिभावक के घर भी जाकर सहभागिता की रणनीति बनायी जाय।

    ReplyDelete
  59. # जागरूकता की कमी
    # घरेलू कार्योँ को अधिक महत्व देना
    # शिक्षा की कमी
    # शैक्षिक वातावरण का अभाव
    # जीवकोपार्जन में ही व्यस्त रहना
    # बाल मनोविज्ञान की जानकारी का अभाव
    # लोगों के बीच अपनी बात रखने में झिझक

    ReplyDelete
  60. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।

    ReplyDelete
  61. Ikअभिभावक और शिक्षक मीटिंग प्रति माह करायी जाय। सहभागिता न होने के कारण को समझा जाय। अभिभावक के घर भी जाकर सहभागिता की रणनीति बनायी जाय।

    ReplyDelete
  62. A motivating process to gain parents attention and to let them know about their responsibilities as parents, because they think that there work is done by sending there child to school.
    There job is another factor.

    ReplyDelete
  63. ग्रामीण क्षेत्रों में माता पिता कम पढ़े लिखे होने के कारण सहभागिता नहीं कर पाते। उन्हे स्कूल आ कर ये सब देखने समझने के लिए समय नहीं होता क्योंकि वह मजदूरी पर जाते हैं।

    ReplyDelete
  64. माता-पिता की स्कूल में कम भागीदारी के कारण:समय की कमी: कई माता-पिता कार्यरत होते हैं और उनके पास स्कूल की गतिविधियों में शामिल होने का समय नहीं होता।अज्ञानता: कई माता-पिता को यह नहीं पता होता कि वे स्कूल की गतिविधियों में कैसे शामिल हो सकते हैं या उनकी भागीदारी कैसे मदद कर सकती है।संवाद की कमी: स्कूल और माता-पिता के बीच उचित संचार का अभाव हो सकता है, जिससे माता-पिता को जानकारी नहीं मिल पाती।भाषाई बाधाएँ: अगर माता-पिता और स्कूल के बीच भाषा की असमानता हो, तो यह भी एक प्रमुख कारण हो सकता है।प्रवेश बाधाएँ: कभी-कभी स्कूल की नीतियाँ और प्रक्रियाएँ माता-पिता के लिए जटिल हो सकती हैं, जिससे वे हतोत्साहित हो जाते हैं।सांस्कृतिक भिन्नता: विभिन्न संस्कृतियों के माता-पिता के पास शिक्षा और स्कूल के प्रति अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं, जो उनकी भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।मौजूदा रणनीतियों में सुधार के सुझाव:लचीली बैठकें: माता-पिता की बैठकें और गतिविधियाँ अलग-अलग समय पर आयोजित की जानी चाहिए, ताकि विभिन्न समय-तालिका वाले माता-पिता भी शामिल हो सकें।प्रभावी संचार: स्कूल को माता-पिता के साथ नियमित और स्पष्ट संवाद बनाए रखना चाहिए। इसमें ईमेल, SMS, फोन कॉल, और ऑनलाइन पोर्टल्स का उपयोग शामिल हो सकता है।अभिनव कार्यक्रम: माता-पिता की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए नए और रोचक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए, जैसे कि पारिवारिक कार्यशालाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और सामुदायिक सेवा परियोजनाएँ।भाषाई सहायता: जिन माता-पिता को भाषा की समस्या है, उनके लिए अनुवादक या द्विभाषी स्टाफ की व्यवस्था की जानी चाहिए।स्वागत दृष्टिकोण: स्कूल को माता-पिता के प्रति एक स्वागतपूर्ण और सहयोगी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि वे सहज महसूस कर सकें और स्कूल के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित हों।शिक्षा और प्रशिक्षण: माता-पिता को बच्चों की शिक्षा में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करने और प्रशिक्षित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।तकनीकी संसाधनों का उपयोग: वर्चुअल मीटिंग्स और वेबिनार के माध्यम से माता-पिता को शामिल किया जा सकता है, जिससे वे भौगोलिक और समय की बाधाओं के बावजूद भाग ले सकें।गतिविधि पृष्ठ तक पहुँचने के लिए निम्नलिखित कदम:स्कूल पोर्टल/वेबसाइट: स्कूल की वेबसाइट या पोर्टल पर एक समर्पित पृष्ठ बनाना, जहाँ माता-पिता स्कूल की गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।मासिक न्यूज़लेटर: एक मासिक न्यूज़लेटर जारी करना, जिसमें आने वाले कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी हो।सामाजिक मीडिया: स्कूल की गतिविधियों और सूचनाओं को साझा करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना।मोबाइल ऐप: स्कूल का अपना मोबाइल ऐप विकसित करना, जहाँ से माता-पिता गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर सकें और रजिस्टर कर सकें।इन रणनीतियों को अपनाकर स्कूल माता-पिता की भागीदारी को बढ़ावा दे सकते हैं और बच्चों की शैक्षिक प्रगति में सुधार ला सकते हैं।

    ReplyDelete
  65. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  66. प्राथमिक विद्यालयों में कमजोर तबके के व्यक्तियों के बच्चे पढ़ते है। जो रोजगार, मजदूरी आदि कारणों से अपनी सहभागिता नही दे पाते।

    ReplyDelete
  67. Bacche ke Sarang liye Vikas ke liye abhibhavak aur Parivar ka sath bahut jaruri hai

    ReplyDelete
  68. Ab aapko ka bacchon ke sath gati thi gatividhi per sath Dena bahut jaruri hai

    ReplyDelete
  69. अभिभावक समुदाय एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास में अतिआवश्यक है

    ReplyDelete
  70. Karyo ka adhik hona tha shiksha ke mahatv ko na samajhana

    ReplyDelete
  71. अभिवावक और समुदाय की सहभगिता ecce का एक प्रमुख लक्ष्य है।सहभागिता में कमी का कारण समुदाय के लोगो का कामकाजी होना।निरक्षर होना।सहभागिता के महत्व को न समझना।शिक्षक और आगनवाड़ी का उदासीन होना आदि

    ReplyDelete
  72. Abhibhavakon ka Sahyog bacchon ke Vikas mein bahut avashyak hai

    ReplyDelete
  73. Bachho ki shiksha ko behtar krne me abhibhavko ka mahatvpurn hota he, unhe jagruk krne ki aavshyakta he....jise hum abhibhavak baithak k madhyam se hal kr sakte he..

    ReplyDelete

  74. SEEKHANE ME ABHIBHAVAKO AUR SAMUDAY KI BHAGIDARI AAVASHYAK HAI.

    ReplyDelete
  75. नियमित और अनवरत बातचीत बच्चों के शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह एक सकारात्मक परिक्रमा है जो बच्चों को समर्पित और जागरूक बनाता है।

    ReplyDelete
  76. bacche ki Kam umr ke drishtigat abhibhavak bahut gambhir nhi hote hain iske saath he pramukh kaaran yeh bhi hai ki grameen parivesh ke abhibhavak apni rozi roti ki chinta zyada Karte hain.

    ReplyDelete
  77. जीविकोपार्जन के कारण
    छोटे भाई बहन के देखभाल की जिम्मेदारी
    कृषि से संबंधित काम
    कम शिक्षित

    ReplyDelete
  78. शिक्षकों का अन्यत्र ऑफिस में अटैचमेंट/ संलानीकरण/ असंजित होना भी बच्चों की शिक्षा का पिछड़ापन कारण है। अधिकारी शिक्षक को शिक्षकीय कार्य से वंचित करते है इसकी पहल कर अभिभावक को रोकना चाहिए

    ReplyDelete
  79. Anganbadi ki sthiti mein bahut Kharab Hai Aur abhibhavakon ko thoda sa jagrit karne ki avashyakta hai

    ReplyDelete
  80. Abhibhavakon ko bacchon ke sath gatividhi Dena bahut mahatvpurn hai

    ReplyDelete
  81. अभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आगन बाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे

    ReplyDelete
  82. अभिभावक अपने कार्यों में संलग्न रहते हैं अभिभावक बच्चों के प्रति उदासीन रहते हैं आंगनवाड़ी में भेज कर निश्चित हो जाते हैं कि आप शिक्षक प्रशिक्षक ही उन्हें देखें उनकी सक्रियता को बढ़ाने के लिए उन्हें इमोशनली टच देना बहुत जरूरी है उन्हें बच्चों के भविष्य और उनके खुद के बुढ़ापे को अच्छा बनाने के लिए समय-समय आंगनबाड़ियों का भ्रमर करने की आवश्यकता है

    ReplyDelete
  83. All guardian are worker .They go to their work early morning and come to late in evening they have no time to come PTM.

    ReplyDelete
  84. Bacche ke sarvangin Vikas ke liye anganbadi School abhibhavak AVN samuday ka ek s.ath ek Manch per Aakar karya karna bahut jaruri hai. Abhibhavak AVN gaon ke vyakti adhikansh the school AVN anganbadi Kendra mein hone wali SMC ko AVN Anya karykramon mein kam pratibhag karte Hain. Aisa unki arthik sthiti AVN Anya gharelu karykram mein Lage hone ke Karan hota hai. Ham sabko unhen unke karya ke anusar samay de dekar AVN unki suvidha ke anusar unki sahbhagita badhani hogi

    ReplyDelete
  85. अभिभावक की अशिक्षा एवं मजदूरी में संलग्न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को समय नहीं देते हैं इसके लिए शिक्षकगण को समय समय पर मीटिंग कर उनको ज़िम्मेदारी से अवगत कराते हुए उन्हें जागरूक करे।

    ReplyDelete
  86. अभिभावक को यह बताना है कि बच्चों के मस्तिष्क का 85% विकास 6 साल के भीतर हो जाता है ताकि शिक्षक और अभिभावक मिलकर उनका संपूर्ण विकास कर सके

    ReplyDelete
  87. अभिभावकों की प्री स्कूल में भागीदारी बढ़ाने के लिए समय समय पर प्रयासरत रहना चाहिए।

    ReplyDelete
  88. अभिभावकों से अनौपचारिक मुलाकात
    बच्चों की प्रगति से अवगत कराना
    विद्यालय मे आने पर अभिभावकों का सम्मान करना
    नियमित आकलन के रिपोर्ट को साझा करना।

    ReplyDelete
  89. Abhibhwak aur parisar ka sahayog bachcho ke vikas me mahatvapurn hai.

    ReplyDelete
  90. जागरूकता की कमी,घरेलू कार्योँ को अधिक महत्व देना,शिक्षा की कमी
    ,शैक्षिक वातावरण का अभाव,जीवकोपार्जन में ही व्यस्त रहना

    ReplyDelete
  91. अभिभावकों की भी जवाबदेही तय किया जाना चाहिए तभी जाकर बच्चों और खुद समय देंगे।

    ReplyDelete
  92. Meeting with parents should be arranged on regular basis

    ReplyDelete
  93. Meeting with parent is necessary and it should be arrange regularly at any rate

    ReplyDelete
  94. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास के लिए अति महत्वपूर्ण है

    ReplyDelete
  95. माता-पिता की भागीदारी बहुत अच्छी रहती है पर एक झिझक महसूस करते हैं स्कूल में बच्चों और टीचरों के साथ कोई भी गतिविधि करते हुए

    ReplyDelete
  96. आगंनवाडी के माध्यम से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करे

    ReplyDelete
  97. Most of the guardian are worker.They go on their work in the morning and return late in evening, so they are unable to participate or they have less participation. If we wish them to participate, we should call them on the day when they are at home or let their father/mother or wives be ingauged in such participation.

    ReplyDelete
  98. समय की कमी, कम पढ़ा लिखा होना और संप्रेषण कौशल का अभाव

    ReplyDelete
  99. अभिभावकों की उदासीनता, अशिक्षा, आर्थिक स्थिति ऐसे बहुत से कारण हैं जिससे प्री स्कूल में उनकी भागीदारी बहुत ही कम होती है।

    ReplyDelete
  100. Abhibhavakon aur parivaron ka Sahyog bacchon ke Vikas ke liye ati avashyak hai

    ReplyDelete
  101. अभिभावकों की जागरूकता उन्हें अपने बच्चों के प्रति समर्पण का भाव पैदा करता है पर गांव के स्कूलों में या आंगनबाड़ियों में अभिभावक पूर्ण रूप से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर निर्भर हो जाते हैं और अभिभावक यह समझते हैं छोटे बच्चे आंगनबाड़ी की देखरेख में है और वह अपने काम में अपनी जीविका में संलग्न रहना पसंद करते हैं वह आंगनबाड़ी कार्यशाला से भी उदासीन बने रहते हैं यह जागरूकता उन्हें मोटिवेशनल स्पीच के द्वारा और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सुझाए गए आयामों के द्वारा उनके दिमाग को में परिवर्तन परिवर्तन करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी भी बन जाती है

    ReplyDelete
  102. अभिभावक की अशिक्षा एवं मजदूरी में संलग्न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को समय नहीं देते हैं इसके लिए शिक्षकगण को समय समय पर मीटिंग कर उनको ज़िम्मेदारी से अवगत कराते हुए उन्हें जागरूक करे।

    ReplyDelete
  103. वास्तव में सर्वांगीण विकास हेतु अभिभावकों व समुदाय का सहयोग होना अति आवश्यक है

    ReplyDelete
  104. बच्चे का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब शिक्षक, अभिभावक दोनों पक्ष बराबर समर्पित हों

    ReplyDelete
  105. अभिभावक की झिझक कम करने हेतु शिक्षक अभिभावकों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करें।

    ReplyDelete
  106. अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

    ReplyDelete
  107. Most of the guardian are worker.They go on their work in the morning and return late in evening, so they are unable to participate or they have less participation. If we wish them to participate, we should call them on the day when they are at home or let their father/mother or wives be ingauged in such participation.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog