कोर्स 4 : गतिविधि 2 : विचार करें :
अभिभावकों के साथ नियमित और अनवरत बातचीत तथा इसे बनाए रखने के लिए प्रेरित करना, अभिभावकों और परिवारों की सहभागिता के लिए काफ़ी महत्वूपर्ण है। अपनी जानकारी के अनुसार अभिभावकों की प्री-स्कूलों में कम भागीदारी के कारणों पर विचार करें। उन मौजूदा रणनीतियों में सुधार लाने पर भी विचार करें जो उन्हें संलग्न कराने में लाभकारी हो सकती हैं।
ईसीसीई स्कूल और जीवन में सीखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता है
ReplyDeleteअपने रोजगार/ मजदूरी में विघ्न की चिंता होना, अलग वेशभूषा व् सम्प्रेषण कौशल का अभाव
DeleteMost of the guardian are worker.They go on their work in the morning and return late in evening, so they are unable to participate or they have less participation. If we wish them to participate, we should call them on the day when they are at home or let their father/mother or wives be ingauged in such participation.
DeleteAbhibhavko ki siksha k prati jagrukta me kmi aur school me kaam ki adhikta se bar bar smprk pr jane me asmarthta
Deleteअभिभावको को शिक्षा के प्रति जागरूक करना अति आवश्यक है। उनको शिक्षा का महत्व बताना अति आवश्यक है ,जिससे कि वह बच्चों की शिक्षा के महत्व को समझ सकें।
Deleteअभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।
ReplyDeleteअपने रोजगार/ मजदूरी में विघ्न की चिंता होना, अलग वेशभूषा व् सम्प्रेषण कौशल का अभाव
ReplyDeleteअभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।
Deleteआंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों का भी कम से कम दो दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम होना चाहिए
ReplyDeleteअपने रोजगार/ मजदूरी में विघ्न की चिंता होना, अलग वेशभूषा व् सम्प्रेषण कौशल का अभाव
Deleteअभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है
DeleteAbsolutely Right sir
DeleteSEEKHANE ME ABHIBHAVAKO AUR SAMUDAY KI BHAGIDARI AAVASHYAK HAI.
ReplyDeleteઅભિભાવક અને પરિવારનો સહયોગ બાળકના વિકાસમાં મહત્વપૂર્ણ છે
ReplyDeleteHesitation may be due to improper communication, due to their economical status, fear of interference of community in schools etc.This can be minimized by regular ptms and by participating in community programs
ReplyDeleteअभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है
ReplyDeleteअभिभावकों की प्री स्कूल में भागीदारी बढ़ाने के लिए समय समय पर प्रयासरत रहना चाहिए।
ReplyDeleteCommunication is necessary with all persons related to the chid.
ReplyDeleteઅભિભાવક અને પરિવારનો સહયોગ બાળકના વિકાસ માટે ખુબ મહત્વનો છે.
ReplyDeleteआंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों का भी कम से कम दो दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम होना चाहिए
ReplyDeleteअभिभावक की उदासीनता,अशिक्षा,कमजोर आर्थिक स्थिति आदि कारक हैं कि अभिभावक अपने बच्चों को प्री प्राइमरी में नहीं भेजते।भौतिक परिवेश, कार्यकत्रियो की उदासीनता इसके प्रमुख कारणों मे से एक है।
ReplyDeleteअभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आगन बाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे
ReplyDeleteबच्चों के अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।
ReplyDeleteअभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।
ReplyDeleteआंगनबाड़ी केंद्र के कर्मचारियों का सक्रिय होना आवश्यक है। अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है। अभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आंगनबाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे।
ReplyDeleteबच्चों की प्रगति में अभिभावकों का सहयोग भी परम आवश्यक है अतः उनसे समय-समय पर संपर्क कर उन्हें उनके स्तर जान सूचना देनी चाहिए,!
ReplyDeleteअभिभावकों की वृहद स्तर और शिक्षा के प्रति उदासीनता,उसकी अशिक्षा,उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति तथा विद्यालय प्रमुख एवं शिक्षकों द्वारा संपर्क का अभाव मुख्य कारक हैं कि अभिभावक अपने बच्चों को प्री प्राइमरी में नहीं भेजते।भौतिक परिवेश, कार्यकत्रियो की उदासीनता इसके प्रमुख कारणों मे से एक है।
ReplyDeleteअभिभावकों की जागरूकता उन्हें अपने बच्चों के प्रति समर्पण का भाव पैदा करता है पर गांव के स्कूलों में या आंगनबाड़ियों में अभिभावक पूर्ण रूप से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर निर्भर हो जाते हैं और अभिभावक यह समझते हैं छोटे बच्चे आंगनबाड़ी की देखरेख में है और वह अपने काम में अपनी जीविका में संलग्न रहना पसंद करते हैं वह आंगनबाड़ी कार्यशाला से भी उदासीन बने रहते हैं यह जागरूकता उन्हें मोटिवेशनल स्पीच के द्वारा और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सुझाए गए आयामों के द्वारा उनके दिमाग को में परिवर्तन परिवर्तन करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी भी बन जाती है
ReplyDeleteHamen mahine Mein kam se kam Ek meeting abhibhavakon ke sath rakhni chahie jisse ki Ham bacchon Ki Tarah Ki ki jankari unko De Chak De sake tatha Unse aapsi Sahyog prapt kar Saken
ReplyDeleteईसीसीई स्कूल और जीवन में सिखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता है।l
ReplyDeleteअभिभावकों का बच्चों के साथ गतिविधि में साथ देना बहुत महत्वपूर्ण है
ReplyDeleteDue to lack of time and shyness.We have to make them a part of their children 's learning process.
ReplyDeleteईसीसीई स्कूल और जीवन में सिखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता है।l
ReplyDeleteकुछ अभिवको के लिए बालको के साथ कुछ जरोरी कार्यक्रम करवाए ताकि पलक गण पैरेरिट हो
ReplyDeleteHesitation by parents to come forward , sometimes due to shortage of time. Parents play an important role in pre-primary education and they must be motivated to come forward and participate in classroom activities as well.
ReplyDeleteमाता-पिता की भागीदारी बहुत अच्छी रहती है पर एक झिझक महसूस करते हैं स्कूल में बच्चों और टीचरों के साथ कोई भी गतिविधि करते हुए
ReplyDeleteअभिभावकों के साथ नियमित और अनवरत बातचीत से अभिभावक की सहभागिता प्राप्त होगी
ReplyDeleteव्यस्त दिनचर्या व समय अभाव के कारण अभिभावक प्री स्कूल से नही जुड़ पाते है
प्रत्येक अभिभावक गतिविधियों में शामिल इसलिए भी नहीं हो पाता कि वह अपनी दैनिक आवश्यकताओं के कारण उचित समय नहीं दें पाता।
ReplyDeleteप्रतीक अभिभावक गतिविधियों में शामिल इसलिए नहीं हो पता कि वह अपनी दैनिक आवश्यकता के काम करता है इस कारण समय नहीं दे पाता
ReplyDeleteअभिभावक अपने जीवन निर्वाह के लिए कुछ न कुछ काम करते हैं ज्यादातर तो मजदूर वर्ग से आते हैंl उनके काम का समय फिक्स होता है l वे स्कूल में अपनी भागीदारी निभाने में असमर्थ रहते हैं
ReplyDeleteमौजूदा परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्र के प्रि प्रायमरी स्कूलों मे पढ़ाई का माहौल न होना मुख्य कारण हो सकता है।
ReplyDeleteआमतौर पर देखा गया है कि अभिभावकों की सहभागिता विद्यालय के प्रति अपेक्षाकृत कम रहती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर अभिभावक रोजमर्रा के कार्यो में व्यस्तता व कुछ अभिभावक जो ग्रामीण परिवेश से आते है उनमे साक्षरता का अभाव होता है इसलिए अभिभावक विद्यालय के प्रति उदासीन होते है।
ReplyDeleteअभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रत्येक शनिवार को नो बेग डे गतिविधिया आयोजित की जाती है उस समय अभिभावकों की भागीदारी भी इस गतिविधि में सुनिश्चित की जानी चाहिए साथ ही प्रत्येक 15 दिनों में PTM का आयोजन किया जाना चाहिए।
बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों का सहयोग जरूरी है।
ReplyDeleteजब तक अभिभावक खुद नहीं जुड़ेंगे सर्वागीर्ण विकास नही हो सकता
ReplyDeleteAbhibhavakon ko vishvash dilana tatha unka samman karake
ReplyDelete* समय की कमी होने के कारण
ReplyDelete* अशिक्षित होने के कारण
* आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण
* बातचीत करने में झिझक के कारण
अभिभावकों व शिक्षकों के सयुंक्त प्रयास से बच्चों के समग्र रूप से विकास मे सुधार कर सकते है
ReplyDelete# जागरूकता की कमी
ReplyDelete# घरेलू कार्योँ को अधिक महत्व देना
# शिक्षा की कमी
# शैक्षिक वातावरण का अभाव
# जीवकोपार्जन में ही व्यस्त रहना
# बाल मनोविज्ञान की जानकारी का अभाव
# लोगों के बीच अपनी बात रखने में झिझक
अभिभावकों के साथ नियमित और अनवरत बातचीत बच्चों के शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह एक सकारात्मक परिक्रमा है जो बच्चों को समर्पित और जागरूक बनाता है।
ReplyDeleteAbhi Baba kyon bacchon mein jagrukta ki Kami Allah Ko jagruk kiya jaaye aur anganbadiyon ko prashikshit kiya jaaye isase donon mein kam karne mein acchi saubhagita rahegi
ReplyDeleteअभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है
ReplyDeleteअभिभावकों का रुचि न होना।
ReplyDeleteअभिभावकों की उदासीनता।
कृषि कार्य में संलग्नता या कार्य की अधिकता ।
पलकों की संलग्नता के लिए बहुत अधिक प्रयास की आवश्यता है।
Parivar aur abhibhavak pre school mei kam ruchi lete hai kyuki unhe siksha ka mahatav nhi smj aata. Unhe lgta hai ki schoolo mei padhai nhi hoti.
ReplyDeleteअभिभावकों की जागरूकता उन्हें अपने बच्चों के प्रति समर्पण का भाव पैदा करता है पर गांव के स्कूलों में या आंगनबाड़ियों में अभिभावक पूर्ण रूप से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर निर्भर हो जाते हैं और अभिभावक यह समझते हैं छोटे बच्चे आंगनबाड़ी की देखरेख में है और वह अपने काम में अपनी जीविका में संलग्न रहना पसंद करते हैं वह आंगनबाड़ी कार्यशाला से भी उदासीन बने रहते हैं यह जागरूकता उन्हें मोटिवेशनल स्पीच के द्वारा और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सुझाए गए आयामों के द्वारा उनके दिमाग को में परिवर्तन परिवर्तन करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी भी बन जाती है ।
ReplyDeleteअभिभावक का स्कूल के बच्चों से संबंध होना बच्चों के सीखने के लिए अति महत्वपूर्ण होता है यदि अभिभावक एवं शिक्षक एक दूसरे से तालमेल बिठाकर बच्चों के विकास के लिए तत्पर हो तो बच्चों को उचित दिशा प्रदान किया जा सकता है प्राय देखा जाता है कि अभिभावक अपने काम के प्रति व्यस्त होने के कारण बच्चे एवं स्कूल से दूर होते जा रहे हैं जिसके कारण बच्चे स्कूल की गतिविधियों को सहज नहीं ले पाए तथा वह घर पर भी असहज होने के कारण अपने शिक्षा के प्रति लगाव से दूर होते जा रहे हैं अत: अभिभावक एवं शिक्षक का आपसी तालमेल होना आवश्यक है।
ReplyDeleteबच्चा अपने आस - पास के परिवेश से सीखता है , अत: इस दृष्टि से बच्चे के सीखने में एक समुदाय या अभिभावक महत्वपूर्ण भूमिक अदा कर सकते हैं।
ReplyDeletePTM KARWAYENGE.
ReplyDeleteआपने देखा होगा कि किस प्रिाि अ कििावि औि समुदाय िे लोग सिकूल/आंगनवाडी आते हैं औि गकतकवकधयों में िाग लेते हैं। उनिी िागीदािी िी गुरवत्ा औि सीमा पि आपिा अवलोिन कया है? कया आप महसकूस ििते हैं कि वे सवयं िो अकिवयकत ििने औ ि िाग लेने से रमा्ण ते हैं या आपिा इससे िोई किन्न मत है? अपने अवलोिन दकूसिों ि े साथ साझा ििें
ReplyDeleteअभिभावक व बच्चो का सहयोग स्मपूर्ण विकास के लिए महत्वपूर्ण है
ReplyDeleteमाता-पिता और परिवार का योगदान महत्वपूर्ण है
ReplyDeleteइसमे सबसे पहला महत्वपूर्ण कारण यह हो सकता हैंकि अभिभावक दोनों नौकरी या काम करने केंलिए बाहर जाते हो, यनदोनो कम या अशिक्षित हो सकते हैं, इसमें सुधार लाने हेतु अध्यापक द्वारा सिखाई गाईंगतिविधियाँ उनजोने अपने बच्चो से नियमित करवानी चाहिए
ReplyDeleteआंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को ट्रेंड किया जाए कि किस तरीके से बच्चों को गतिविधि करनी है उन्हें नई-नई तरीकों से कैसे सीखना है कैसे उन्हें विद्यालय में आने के लिए प्रोत्साहित करना है और बच्चों को खेल-खेल के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों के द्वारा नई-नई चीजों को सिखाना और उनके जीवन में उन्हें अप्लाई करना आना चाहिए, छोटे बच्चों को खेल की विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किस प्रकार से भाषा विकास गणितीय विकास पढ़ने लिखने की समझ विकसित की जाए इस पर पूर्णतया जोड़ दिया जाए
ReplyDeleteઅભિભાવક અને પરિવારનો સહયોગ બાળકના વિકાસ માટે ખુબ મહત્વનો છે.
ReplyDeleteआंगनबाड़ी केंद्र के कर्मचारियों का सक्रिय होना आवश्यक है। अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है। अभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आंगनबाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे।
ReplyDeleteOverlapping of time
ReplyDeleteHesitation
Communication gap
Low literacy rate
Lack of resources
इसमें सबसे पहला महत्वपूर्ण कारण यह हो सकता है कि अभिभावक दोनों नौकरी या काम करने के लिए बाहर जा सकते हैं, यानदोनो कम या शिक्षित हो सकते हैं, इसमें सुधार लाने के लिए शिक्षकों द्वारा सिखाई गई गाईंगतिविधियाँ उनजोने अपने बच्चों से नियमित रूप से करवानी चाहिए।
ReplyDeleteअभिभावक और शिक्षक मीटिंग प्रति माह करायी जाय। सहभागिता न होने के कारण को समझा जाय। अभिभावक के घर भी जाकर सहभागिता की रणनीति बनायी जाय।
ReplyDelete# जागरूकता की कमी
ReplyDelete# घरेलू कार्योँ को अधिक महत्व देना
# शिक्षा की कमी
# शैक्षिक वातावरण का अभाव
# जीवकोपार्जन में ही व्यस्त रहना
# बाल मनोविज्ञान की जानकारी का अभाव
# लोगों के बीच अपनी बात रखने में झिझक
अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।
ReplyDeleteIkअभिभावक और शिक्षक मीटिंग प्रति माह करायी जाय। सहभागिता न होने के कारण को समझा जाय। अभिभावक के घर भी जाकर सहभागिता की रणनीति बनायी जाय।
ReplyDeleteA motivating process to gain parents attention and to let them know about their responsibilities as parents, because they think that there work is done by sending there child to school.
ReplyDeleteThere job is another factor.
ग्रामीण क्षेत्रों में माता पिता कम पढ़े लिखे होने के कारण सहभागिता नहीं कर पाते। उन्हे स्कूल आ कर ये सब देखने समझने के लिए समय नहीं होता क्योंकि वह मजदूरी पर जाते हैं।
ReplyDeleteमाता-पिता की स्कूल में कम भागीदारी के कारण:समय की कमी: कई माता-पिता कार्यरत होते हैं और उनके पास स्कूल की गतिविधियों में शामिल होने का समय नहीं होता।अज्ञानता: कई माता-पिता को यह नहीं पता होता कि वे स्कूल की गतिविधियों में कैसे शामिल हो सकते हैं या उनकी भागीदारी कैसे मदद कर सकती है।संवाद की कमी: स्कूल और माता-पिता के बीच उचित संचार का अभाव हो सकता है, जिससे माता-पिता को जानकारी नहीं मिल पाती।भाषाई बाधाएँ: अगर माता-पिता और स्कूल के बीच भाषा की असमानता हो, तो यह भी एक प्रमुख कारण हो सकता है।प्रवेश बाधाएँ: कभी-कभी स्कूल की नीतियाँ और प्रक्रियाएँ माता-पिता के लिए जटिल हो सकती हैं, जिससे वे हतोत्साहित हो जाते हैं।सांस्कृतिक भिन्नता: विभिन्न संस्कृतियों के माता-पिता के पास शिक्षा और स्कूल के प्रति अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं, जो उनकी भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।मौजूदा रणनीतियों में सुधार के सुझाव:लचीली बैठकें: माता-पिता की बैठकें और गतिविधियाँ अलग-अलग समय पर आयोजित की जानी चाहिए, ताकि विभिन्न समय-तालिका वाले माता-पिता भी शामिल हो सकें।प्रभावी संचार: स्कूल को माता-पिता के साथ नियमित और स्पष्ट संवाद बनाए रखना चाहिए। इसमें ईमेल, SMS, फोन कॉल, और ऑनलाइन पोर्टल्स का उपयोग शामिल हो सकता है।अभिनव कार्यक्रम: माता-पिता की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए नए और रोचक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए, जैसे कि पारिवारिक कार्यशालाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और सामुदायिक सेवा परियोजनाएँ।भाषाई सहायता: जिन माता-पिता को भाषा की समस्या है, उनके लिए अनुवादक या द्विभाषी स्टाफ की व्यवस्था की जानी चाहिए।स्वागत दृष्टिकोण: स्कूल को माता-पिता के प्रति एक स्वागतपूर्ण और सहयोगी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि वे सहज महसूस कर सकें और स्कूल के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित हों।शिक्षा और प्रशिक्षण: माता-पिता को बच्चों की शिक्षा में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करने और प्रशिक्षित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।तकनीकी संसाधनों का उपयोग: वर्चुअल मीटिंग्स और वेबिनार के माध्यम से माता-पिता को शामिल किया जा सकता है, जिससे वे भौगोलिक और समय की बाधाओं के बावजूद भाग ले सकें।गतिविधि पृष्ठ तक पहुँचने के लिए निम्नलिखित कदम:स्कूल पोर्टल/वेबसाइट: स्कूल की वेबसाइट या पोर्टल पर एक समर्पित पृष्ठ बनाना, जहाँ माता-पिता स्कूल की गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।मासिक न्यूज़लेटर: एक मासिक न्यूज़लेटर जारी करना, जिसमें आने वाले कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी हो।सामाजिक मीडिया: स्कूल की गतिविधियों और सूचनाओं को साझा करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना।मोबाइल ऐप: स्कूल का अपना मोबाइल ऐप विकसित करना, जहाँ से माता-पिता गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर सकें और रजिस्टर कर सकें।इन रणनीतियों को अपनाकर स्कूल माता-पिता की भागीदारी को बढ़ावा दे सकते हैं और बच्चों की शैक्षिक प्रगति में सुधार ला सकते हैं।
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ReplyDeleteप्राथमिक विद्यालयों में कमजोर तबके के व्यक्तियों के बच्चे पढ़ते है। जो रोजगार, मजदूरी आदि कारणों से अपनी सहभागिता नही दे पाते।
ReplyDeleteBacche ke Sarang liye Vikas ke liye abhibhavak aur Parivar ka sath bahut jaruri hai
ReplyDeleteAb aapko ka bacchon ke sath gati thi gatividhi per sath Dena bahut jaruri hai
ReplyDeleteअभिभावक समुदाय एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास में अतिआवश्यक है
ReplyDeleteKaryo ka adhik hona tha shiksha ke mahatv ko na samajhana
ReplyDeleteअभिवावक और समुदाय की सहभगिता ecce का एक प्रमुख लक्ष्य है।सहभागिता में कमी का कारण समुदाय के लोगो का कामकाजी होना।निरक्षर होना।सहभागिता के महत्व को न समझना।शिक्षक और आगनवाड़ी का उदासीन होना आदि
ReplyDeleteAbhibhavakon ka Sahyog bacchon ke Vikas mein bahut avashyak hai
ReplyDeleteBachho ki shiksha ko behtar krne me abhibhavko ka mahatvpurn hota he, unhe jagruk krne ki aavshyakta he....jise hum abhibhavak baithak k madhyam se hal kr sakte he..
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ReplyDeleteSEEKHANE ME ABHIBHAVAKO AUR SAMUDAY KI BHAGIDARI AAVASHYAK HAI.
नियमित और अनवरत बातचीत बच्चों के शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह एक सकारात्मक परिक्रमा है जो बच्चों को समर्पित और जागरूक बनाता है।
ReplyDeletebacche ki Kam umr ke drishtigat abhibhavak bahut gambhir nhi hote hain iske saath he pramukh kaaran yeh bhi hai ki grameen parivesh ke abhibhavak apni rozi roti ki chinta zyada Karte hain.
ReplyDeleteजीविकोपार्जन के कारण
ReplyDeleteछोटे भाई बहन के देखभाल की जिम्मेदारी
कृषि से संबंधित काम
कम शिक्षित
शिक्षकों का अन्यत्र ऑफिस में अटैचमेंट/ संलानीकरण/ असंजित होना भी बच्चों की शिक्षा का पिछड़ापन कारण है। अधिकारी शिक्षक को शिक्षकीय कार्य से वंचित करते है इसकी पहल कर अभिभावक को रोकना चाहिए
ReplyDeleteAnganbadi ki sthiti mein bahut Kharab Hai Aur abhibhavakon ko thoda sa jagrit karne ki avashyakta hai
ReplyDeleteAbhibhavakon ko bacchon ke sath gatividhi Dena bahut mahatvpurn hai
ReplyDeleteअभिभावकों से लगातार संपर्क करने एवं उनमे आगन बाड़ी के प्रतिविश्वास पैदा करे जिससे वे हमे सहयोग प्रदान करे
ReplyDeleteअभिभावक अपने कार्यों में संलग्न रहते हैं अभिभावक बच्चों के प्रति उदासीन रहते हैं आंगनवाड़ी में भेज कर निश्चित हो जाते हैं कि आप शिक्षक प्रशिक्षक ही उन्हें देखें उनकी सक्रियता को बढ़ाने के लिए उन्हें इमोशनली टच देना बहुत जरूरी है उन्हें बच्चों के भविष्य और उनके खुद के बुढ़ापे को अच्छा बनाने के लिए समय-समय आंगनबाड़ियों का भ्रमर करने की आवश्यकता है
ReplyDeleteAll guardian are worker .They go to their work early morning and come to late in evening they have no time to come PTM.
ReplyDeleteBacche ke sarvangin Vikas ke liye anganbadi School abhibhavak AVN samuday ka ek s.ath ek Manch per Aakar karya karna bahut jaruri hai. Abhibhavak AVN gaon ke vyakti adhikansh the school AVN anganbadi Kendra mein hone wali SMC ko AVN Anya karykramon mein kam pratibhag karte Hain. Aisa unki arthik sthiti AVN Anya gharelu karykram mein Lage hone ke Karan hota hai. Ham sabko unhen unke karya ke anusar samay de dekar AVN unki suvidha ke anusar unki sahbhagita badhani hogi
ReplyDeleteअभिभावक की अशिक्षा एवं मजदूरी में संलग्न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को समय नहीं देते हैं इसके लिए शिक्षकगण को समय समय पर मीटिंग कर उनको ज़िम्मेदारी से अवगत कराते हुए उन्हें जागरूक करे।
ReplyDeleteअभिभावक को यह बताना है कि बच्चों के मस्तिष्क का 85% विकास 6 साल के भीतर हो जाता है ताकि शिक्षक और अभिभावक मिलकर उनका संपूर्ण विकास कर सके
ReplyDeleteअभिभावकों की प्री स्कूल में भागीदारी बढ़ाने के लिए समय समय पर प्रयासरत रहना चाहिए।
ReplyDeleteअभिभावकों से अनौपचारिक मुलाकात
ReplyDeleteबच्चों की प्रगति से अवगत कराना
विद्यालय मे आने पर अभिभावकों का सम्मान करना
नियमित आकलन के रिपोर्ट को साझा करना।
Abhibhwak aur parisar ka sahayog bachcho ke vikas me mahatvapurn hai.
ReplyDeleteजागरूकता की कमी,घरेलू कार्योँ को अधिक महत्व देना,शिक्षा की कमी
ReplyDelete,शैक्षिक वातावरण का अभाव,जीवकोपार्जन में ही व्यस्त रहना
अभिभावकों की भी जवाबदेही तय किया जाना चाहिए तभी जाकर बच्चों और खुद समय देंगे।
ReplyDeleteMeeting with parents should be arranged on regular basis
ReplyDeleteMeeting with parent is necessary and it should be arrange regularly at any rate
ReplyDeleteअभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास के लिए अति महत्वपूर्ण है
ReplyDeleteमाता-पिता की भागीदारी बहुत अच्छी रहती है पर एक झिझक महसूस करते हैं स्कूल में बच्चों और टीचरों के साथ कोई भी गतिविधि करते हुए
ReplyDeleteआगंनवाडी के माध्यम से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करे
ReplyDeleteshyamlalvishnoi_i9we
ReplyDeleteMost of the guardian are worker.They go on their work in the morning and return late in evening, so they are unable to participate or they have less participation. If we wish them to participate, we should call them on the day when they are at home or let their father/mother or wives be ingauged in such participation.
ReplyDeleteसमय की कमी, कम पढ़ा लिखा होना और संप्रेषण कौशल का अभाव
ReplyDeleteअभिभावकों की उदासीनता, अशिक्षा, आर्थिक स्थिति ऐसे बहुत से कारण हैं जिससे प्री स्कूल में उनकी भागीदारी बहुत ही कम होती है।
ReplyDeleteAbhibhavakon aur parivaron ka Sahyog bacchon ke Vikas ke liye ati avashyak hai
ReplyDeleteअभिभावकों की जागरूकता उन्हें अपने बच्चों के प्रति समर्पण का भाव पैदा करता है पर गांव के स्कूलों में या आंगनबाड़ियों में अभिभावक पूर्ण रूप से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर निर्भर हो जाते हैं और अभिभावक यह समझते हैं छोटे बच्चे आंगनबाड़ी की देखरेख में है और वह अपने काम में अपनी जीविका में संलग्न रहना पसंद करते हैं वह आंगनबाड़ी कार्यशाला से भी उदासीन बने रहते हैं यह जागरूकता उन्हें मोटिवेशनल स्पीच के द्वारा और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सुझाए गए आयामों के द्वारा उनके दिमाग को में परिवर्तन परिवर्तन करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी भी बन जाती है
ReplyDeleteअभिभावक की अशिक्षा एवं मजदूरी में संलग्न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को समय नहीं देते हैं इसके लिए शिक्षकगण को समय समय पर मीटिंग कर उनको ज़िम्मेदारी से अवगत कराते हुए उन्हें जागरूक करे।
ReplyDeleteवास्तव में सर्वांगीण विकास हेतु अभिभावकों व समुदाय का सहयोग होना अति आवश्यक है
ReplyDeleteबच्चे का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब शिक्षक, अभिभावक दोनों पक्ष बराबर समर्पित हों
ReplyDeleteअभिभावक की झिझक कम करने हेतु शिक्षक अभिभावकों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करें।
ReplyDeleteअभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
ReplyDeleteMost of the guardian are worker.They go on their work in the morning and return late in evening, so they are unable to participate or they have less participation. If we wish them to participate, we should call them on the day when they are at home or let their father/mother or wives be ingauged in such participation.
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