प्रत्येक इंद्रिय के लिए संवेदी गतिविधियाँ और अनुभवों के बारे में सोचें। साझा करें कि किस प्रकार ये संवेदी गतिविधियाँ आंगनवाड़ी के छोटे बच्चों के लिए लाभकारी हैं।
नर्सरी क्लास के बच्चो को हम भिन्न भिन्न गतिविधियों तथा एक्टिविटी के द्वारा हम बच्चो को बहूत कुछ सिखाया जाता है टीवी ,प्रोजेक्टर से बच्चो को पिक्चर दिखाना और टेस्ट करवाना, टच करना हम बच्चो को पांचों ज्ञानेंद्रियों द्वारा मस्तिक के तंत्रिका तंत्र को विकसित करना जो बच्चो के जीवन के लिए उपयोगी होते हैं। हम बच्चो के सरवागीन विकास और भविष्य के उपयोग में आने वाली चीजों को उपयोग ओर उसमे क्रमबद्ध जीवन जीने शैली हम साफ रहना आदि प्राथमिक शिक्षा के दौरान सिखाया जाता हे।
संवेदी गतिविधियों से इंद्रिय तन्त्रिकाए सक्रिय होकर कार्य करती है और अन्य तन्त्रिकाओ के साथ संयोजनात्मक मार्ग तलास करती है जिससे बालको का तन्त्रिका विकास सही समय पर होने लगता है।
ઇન્દ્રિયો વડે મેળવેલું જ્ઞાન ચિરકાળ સુધી ટકી રહે છે. શરૂઆતના વર્ષોમાં મેળવેલું જ્ઞાન તેમજ શરૂઆતના વર્ષોમાં બાળકને મળેલા અનુભવો પ્રગતિમાં સહાયરૂપ બને છે.
ઇન્દ્રિયો દ્વારા પ્રાપ્ત કરેલું જ્ઞાન શિખવાની પ્રક્રીયા તેમજ ઈન્દ્રિયો નો યોગ્ય વિકાસ કરવા માટે ECCE દ્વારા પ્રારંભિક શિક્ષા માટે તૈયાર કરાયેલ આ માહિતીઓ તમામને ખૂબ જ લાભકારી થશે..
शिशु एवं बालसंगोपन अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दा है, पञ्चज्ञानेन्द्रीय विकास के साथ ही सच्चे अर्थों में सर्वांगीण विकास के लिए अभ्यान्तरिक दृष्टि से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भाषिक एवं वैचारिक विकास के साथ ही, वाह्य दृष्टि से सामाजिक और व्यावहारिक विकास के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए
शिशु एवं बालसंगोपन अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दा है, पञ्चज्ञानेन्द्रीय विकास के साथ ही सच्चे अर्थों में सर्वांगीण विकास के लिए अभ्यान्तरिक दृष्टि से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भाषिक एवं वैचारिक विकास के साथ ही, वाह्य दृष्टि से सामाजिक और व्यावहारिक विकास के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए
बच्चों को जीभ द्वारा अलग-अलग तरह के खाने योग्य पदार्थ के स्वाद को पहचानने की गतिविधि कराई जा सकती है,, नाथद्वारा अच्छे और बुरे सुगंध के बारे में बताया जा सकता है कान द्वारा मधुर और कर्कश स्वर की पहचान कराई जा सकती है
पांचों ज्ञानेंद्रियों का विकास आंगनबाड़ी में भी हो सकता है विभिन्न प्रकार की छोटी-छोटी गतिविधियां कराकर के बालकों की ज्ञान इंद्रियों का विकास किया जा सकता है
For proper development of sense organs,a child needs safe environment where he gets different opportunities to engage freely so that he can observe and react thus make himself able to react.
हम बच्चो के लिए माचिस की खोखो को एक धागे में पिरो कर उसपर गिनती कलर एनिमल लिख सकते ही और उसको धागे से खींचकर बार बार रोकेंगे जिस बच्चे के पास जो खोखा आएगा बच्चा उसे याद रखेगा
प्रत्येक ज्ञानेन्द्रिय के लिए संवेदी गतिविधियाँ और अनुभव बाल्यावस्था में ज्ञानेन्द्रियों और मष्तिस्क के संयोजन में अत्यंत उपयोगी तथा महत्वपूर्ण होती है. ये अनुभव दीर्घकालीन प्रभाव डालने वाले होते हैं. अतः भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं.
अंगणवाडी में गतीविधी ही बच्चोंका सिखने का आधार है | बच्चोंको देखना, सुनना, स्पर्श करना, चखना, सुंघना इसमें नैसर्गिक रुची रहती है | खट्टा, मिठा ये स्वाद बच्चे अनुभव करके ही जान सकते है | गरम, ठंड ये स्पर्शग्यान से ही बच्चे जान सकते है | अपने घर के आसपास क्या क्या है ? इसकी जानकारी बच्चे हरदिन अंगणवाडी में आते जाते जो देखते है उसिसे ही बता सकते है | आरंभिक वर्षोंमें हर बच्चा अपने परिवेश से सिखने की शुरुवात करता है | परिवेश से जुडे अनुभावों को गतीविधी से जोडने का काम अंगणवाडी कार्यकर्ती करती है |
गेंद फेंकना ध्वनियों को ध्यान से सुनना स्वाद महसूस करना ठंडे गर्म का अनुभव करना और गंध महसूस करना इन प्रकार की गतिविधियों को हम बच्चों को करा कर बच्चों का संपूर्ण ज्ञानेंद्रिय विकास कर सकते हैं।
ECCE बच्चे को घर के परिवेश से निकल कर विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने में एक पुल की तरह कार्य करता है, जिसमे बच्चा घर जैसा माहौल और जुड़ाव महसूस करता है,जो उसके ज्ञान को स्थायी बनाने में सहायक है।
आगनबाड़ी मे प्रवेश करने के बाद वाह्य कारकों के बारे मे बच्चें अपनी इन्द्रियों का प्रयोग ज्यादा करता है एवं इन्द्रियों द्वारा सीखा गया ज्ञान स्थाई होता है इसी समय उसके मन मे बहुत सारे सवाल भी होते हैं और उनके बारे मे जानने के लिए इन्द्रियों का प्रयोग करता है।
आंगनबाड़ी में बच्चे खेल-कूद के माध्यम से सीखते हैं।इससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक और सांसारिक विकास होता है।गत्यात्मक एवं सामाजिक विकास भी प्रबल होता है।
आंगनबाडी का सघन निरिक्षण किया जाना चाहिए और आंगनबाडी में चल रही गतिविधियों की विधिवत समीक्षा करते हुए उसे अतिशीघ्र सुधारने की आवश्यकता है। आंगनबाडी का संचालन अधिकतर जगहों पर केवल खानापूर्ति बन कर रह गई है निरिक्षण के नाम पर "सब गोलमाल है " वाली कहावत चरिततार्थ होती दिखाई दे रही है। जिसको सुधारना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बच्चों की सभी ज्ञानेंद्रियों के विकास के लिए यह जरूरी है कि सभी ज्ञानेंद्रियों के प्रयोग से संबंधित गतिविधियां करवाई जाए जैसे स्वाद संबंधी , देखने के लिए विभिन्न चित्रों से संबंधी गतिविधियां , श्रवण कौशल के लिए कहानी सुनना सुनाना आदि
आंगनवाड़ी के बच्चो की गतिविधियाँ खेल आधारित होनी चाहिए जिससे बच्चो को आनन्द आवे । ठोस वस्तु , चित्र,मिट्टी से स्वतंत्र कार्य के भरपूर अवसर दिए जाने चाहिए एवं उन अध्यापक द्वारा प्रश्नोत्तर विधि से शिक्षण कार्य होना चाहिए। आईसीटी का प्रयोग भी होना चाहिए।
संज्ञानात्मक विकास की गतिविधियाँ,रोल प्ले, मार्निंग सर्कल टाइम, खेल के नियम में माता - पिता को सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि मौखिक भाषाई विकास हो सके बच्चो को बोलने ,कार्य करके सीखने के भरपूर अवसर मिलने चाहिए।
3 से 6 वर्ष के बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं जिस प्रकार कच्ची मिट्टी जैस आकार देता है वह वैसा बन जाता है इसी प्रकार आगनबाडी या प्री स्कूल में खेल के माध्यम से आकार दिया जा सकता है ।
बच्चा अपना स्वयम का अनुभव तो रखता है, जो कि उसका अपना जरूरत पूरा करता है। पर हमारे वंचित स्तर को पाने के लिए उतना ही तैयार होता है जितनी कि कुम्हार के हाथों की मिट्टी जिससे वह मन माफिक आकार गढ़ता है। आप चाहे कोई भी आकार में गढ़ लें।
Children are very good listener if you focus on there ability they will understand you and listen also take the different techniques and activity base learning
Preschool education must focus on skills like listening and speaking more . Further the activities such as gardening, work education, dance and drama , music must be included in it.
प्रारंभिक वर्षों की गतिविधियां हमेशा के लिए स्थाई होती है जो की जीवन भर साथ देती है प्रारंभिक जीवन में संवेदनाओं से मस्तिष्क का अच्छा विकास होता है तांत्रिकाएं अधिक विकसित होती है
स्विस मनोवैज्ञानिक "जीन पियाजे" ने अपने सिद्धांत में संज्ञानात्मक विकास का एक व्यवस्थित अध्ययन किया है जिसे चार अवस्थाओं में वर्गीकृत किया गया है और 'संवेदी प्रेरक अवस्था' उनमें से एक है। संवेदी प्रेरक अवस्था' जन्म से लेकर दो (0-2 वर्ष) तक रहती है। शिशु दुनिया को समझने के लिए अपनी इंद्रियों और प्रेरक क्षमताओं का उपयोग करते हैं, सजगता के साथ शुरुआत करते हैं और संवेदी प्रेरक कौशल के जटिल संयोजन के साथ समाप्त होते हैं। संवेदी प्रेरक अवस्था में, शिशु संवेदी और प्रेरक गतिविधि के माध्यम से दुनिया का पता लगाते हैं। वे अपनी इंद्रियों के माध्यम से पहचानते हैं, महसूस करते हैं और समझते हैं पर्यावरण का अनुभव करते हैं। संवेदी प्रेरक अवस्था की विशेषताएं:
वस्तु स्थाइतव प्रारंभिक प्रतिनिधित्ववादी विचार कार्य-कारण की अवधारणा को विकसित करता है सरल सजगता और अलगाव की चिंता प्रेरक गति के साथ इंद्रियों का समन्वय
शैशवावस्था या प्रारंभिक शिक्षा की आयु में बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक विकास अन्य अवस्था से तेज़ गति से होता है इसी अवस्था मे बालक अपने आस पास के परिवेश के अनुसार अपना अपने आपको ढालने की कोशिश करता है। मनोविज्ञान के अनुसार बालक का 90% मस्तिष्क का विकास इस अवस्था मे हो जाता है।
Ecce and anganwadi provide an excellent opportunity for kids to learn. We can also add multiple objects with multiple surface and texture to be given to kids so they can understand by touch and feel.
बच्चों के पांचों संवेदी अंगों के विकास के लिए हम आंगनबाड़ी मे खिलौनो, चित्रों, रेडियो, अंगों को छूकर बताना, आदि गतिविधियों के साथ सीखने को बढ़ावा दे सकते है। ताकि संवेदी अंगों का उचित विकास हो सके।
बच्चो के जीवन के प्रारंभिक वर्ष उन के संपूर्ण जीवन और समग्र और सर्वांगीण विकास के लिए बहुत ही उपयोगी और महत्वपूर्ण होते है l अतः ईसीसीई विद्यालयी शिक्षा तथा व्यक्तिगत जीवन में सीखने के लिए एक बुनियाद प्रदान करता है
प्रत्येक इंद्रिय के लिए संवेदी गतिविधियाँ और अनुभवों के बारे में सोचें। साझा करें कि किस प्रकार ये संवेदी गतिविधियाँ आंगनवाड़ी के छोटे बच्चों के लिए लाभकारी हैं।
बच्चों को आंगनवाड़ी में और घर पर भी विभिन्न प्रकार के खिलौनों द्वारा ,गतिविधियों द्वारा,छूकर महसूस कराना,स्वाद लेना,सूंघना(विभिन्न फूलों या खाद्य पदार्थों ) द्वारा भी शारीरिक,मानसिक विकास में सहायक है।
ईसीसीई संवेधनशील गतिविधि सभी इंद्रियो से संबंधित गतिविधि बच्चों से करवाने की बात करता है, ये गतिविधियां बच्चो के परिवेश से जुड़ी हुई होनी चाहिए। जिससे से बच्चे जल्दी सीखेंगे।
ईसीसीई के द्वारा बच्चे के विकास के सभी आयाम में दक्षता से हासिल होती है और स्कूली शिक्षा के लिए तत्पर होता है साथ ही साथ सर्वांगीण विकास की नींव रखी जाती है जो की एक कुशल नागरिक होने के लिए बच्चों को प्रेरित करती है
प्रिंस स्कूलिंग गतिविधियां बच्चों के सशक्त विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बच्चों की इंद्रियों का विकास गतिविधियों के माध्यम से काफी सशक्त हो जाता है
Bachche aanganwadi me paraspar antahkriya karte Hain ek dusre se batcheet karte Hain sath sath khelte Hain isse Inka mansik sharirik aur bhavanatmak vikas me sahayta milti ha
आंगनवाड़ी केन्द्रों से बच्चों को बुनियादी शिक्षण एवम् सर्वांगीण विकास में मदद मिलती हैं।इससे बच्चे घर जैसे वातावरण में खेलकूद आधारित गतिविधियों से सीखते हैं।
Think about sensory activities and experiences for each sensory organ. Share how these sensory activities are beneficial for the young children in the Anganwadi.
You must have seen children around you in your family or neighbourhood. Think about the developmental characteristics of children and share on how they play, learn and grow?
ईसीसीई विद्यालयी शिक्षा तथा व्यक्तिगत जीवन में सीखने के लिए एक बुनियाद प्रदान करता है
ReplyDeleteअंगणवाडी में कि जानेवाली गतीविधिया बच्चोकों भाषेत और सामाजिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है
Deleteaaganwadi ko sasakat banna
Deleteघर के बाद बच्चा घर के माहौल जैसे आगनबाडी में जाकर बाहरी दुनिया का ज्ञान, स्वयं ही छूकर देखकर अपने अनुभव से ज्यादा सीखता है
Deleteअंगणवाडी मे पढ रहे बच्चों को ज्यादा से ज्यादा खेलो की मदद से कृतिशील बनाया जमा चाहिये
Deleteअंगणवाडी मे पड रहे बच्चो को खेल की मदद से अच्छे अच्छे अच्छा अनुभव दिया जा सकता है
Deleteनर्सरी क्लास के बच्चो को हम भिन्न भिन्न गतिविधियों तथा एक्टिविटी के द्वारा हम बच्चो को बहूत कुछ सिखाया जाता है टीवी ,प्रोजेक्टर से बच्चो को पिक्चर दिखाना और टेस्ट करवाना, टच करना हम बच्चो को पांचों ज्ञानेंद्रियों द्वारा मस्तिक के तंत्रिका तंत्र को विकसित करना जो बच्चो के जीवन के लिए उपयोगी होते हैं। हम बच्चो के सरवागीन विकास और भविष्य के उपयोग में आने वाली चीजों को उपयोग ओर उसमे क्रमबद्ध जीवन जीने शैली हम साफ रहना आदि प्राथमिक शिक्षा के दौरान सिखाया जाता हे।
Deleteआंगनवाड़ी बच्चों के सिखाने का सशक्त माध्यम है।
Deleteआंगनबाड़ी शिक्षा तथा व्यक्तिगत जीवन में सीखने के लिए एक बुनियाद प्रदान करता है
Deleteसंवेदी गतिविधियों से इंद्रिय तन्त्रिकाए सक्रिय होकर कार्य करती है और अन्य तन्त्रिकाओ के साथ संयोजनात्मक मार्ग तलास करती है जिससे बालको का तन्त्रिका विकास सही समय पर होने लगता है।
Deleteआंगनवाड़ी में बालक ज्ञानेंद्रियों के द्वारा अनुभव करके मूर्त और अमूर्त वस्तु के साथ संबंध बनाता है
Deleteપ્રત્યેક ઈન્દ્રિયો નો યોગ્ય વિકાસ કરવા માટે ઈસીસીઈ દ્વારા પ્રારંભિક શિક્ષા માટે તૈયાર કરાયેલ આ સંવેદી ગતિવિધિઓ ખૂબ જ લાભકારી છે.
ReplyDeleteबाह्य दुनिया का ज्ञान प्राप्त प्रथम इंद्रियों से ही होता है।
ReplyDelete
DeleteBahari duniya ka gyan prapt Pratham indriyon Se hi hota hai
ઇન્દ્રિયો દ્વારા પ્રાપ્ત કરેલું જ્ઞાન શિખવાની પ્રક્રીયા વધારે છે .
ReplyDeleteआंगणवाडी मे कीए जाने वाली गतिविधियोसे बच्चे का मानसिक विकास होता है
ReplyDeleteSahi
Deleteआंगनवाड़ी बच्चों के सिखाने का सशक्त माध्यम है।
Deleteશરુઆત માં બાળકો ને નવા નવા બાળ ગીતો સંભળાવવા જોઈએ જેથી બાળકો ધ્વનિ પકડશે.
ReplyDeleteRight
Deleteअंगणवाडी में कि जानेवाली गतीविधिया बच्चोकों भाषेत और सामाजिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है.
ReplyDeleteBilkul sahi bat hai
DeleteAsk the students to about tastes of different types of food items they eat at home.
ReplyDeleteThis activity is very important
Deleteઆંગણવાડી માં સરુઆત ના વર્ષો માં બાળકો ને મળેલું જ્ઞાન ખૂબ ઉપયોગી નીવડે છે
Deleteઇન્દ્રિયો વડે મેળવેલું જ્ઞાન ચિરકાળ સુધી ટકી રહે છે. શરૂઆતના વર્ષોમાં મેળવેલું જ્ઞાન તેમજ શરૂઆતના વર્ષોમાં બાળકને મળેલા અનુભવો પ્રગતિમાં સહાયરૂપ બને છે.
ReplyDeleteअंगणवाडी के छात्र अबोध बालक होते हैं।उन्हे जीस उचित दिशा की ओर ले जाना हैं, ले जाने के लिये यह उपक्रम बहुत उपयोगी साबित हो सकता हैं।
ReplyDeleteJi ha
Deleteअंगणवाडीतल्या मुलांना विविध प्रकारचे साहित्य आणि खेळणी याद्वारे त्यांच्या मेंदूचा विकास चांगल्या प्रकारे होऊ शकतो.
ReplyDeleteઆંગણવાડી માં સરુઆત ના વર્ષો માં બાળકો ને મળેલું જ્ઞાન ખૂબ ઉપયોગી નીવડે છે
ReplyDeleteઇન્દ્રિયો દ્વારા પ્રાપ્ત કરેલું જ્ઞાન શિખવાની પ્રક્રીયા તેમજ ઈન્દ્રિયો નો યોગ્ય વિકાસ કરવા માટે ECCE દ્વારા પ્રારંભિક શિક્ષા માટે તૈયાર કરાયેલ આ માહિતીઓ તમામને ખૂબ જ લાભકારી થશે..
ReplyDeleteआंगनवाड़ी केन्द्रों से प्राप्त अनुभव बच्चों को विद्यालय में बहुत काम आता है।
ReplyDeleteI agree
DeleteAnganbadi se prapt Anubhav bacchon ke bahut kam Aate Hain
ReplyDeleteJi sahmat hu
Deleteइन्द्रियों द्वारा प्राप्त ज्ञान ही उत्तम माध्यम है ।
ReplyDeleteक्या कोई और भी माध्यम है ज्ञान प्राप्त करने का?
DeleteMujhe to nahi lagta
Deleteઇન્દ્રિયો ઘ્યારા જ્ઞાન ચિરંજીવ હોય છે
ReplyDeleteOk
ReplyDeleteनमस्कार साथियो आंगनवाडी मे की जानेवाली गतिविधियो बच्चो को भाषा और सामाजिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है
ReplyDeleteThe learners can easily learn some matters which has practical aspects to make them better by providing sensation through practicals.
ReplyDeletePractical knowledge permanent hota hai
DeleteBilkul thik baat
Deleteआंगनवाड़ी क्षेत्र में की जाने वाली क्रियाकलाप बाल जीवन के भविष्य के लिए बहुत ही अच्छी होती है
ReplyDeleteSahmat hu
Deleteआगनवाडी में कि जाने वाले गतिविधिया बच्चो का मानसीक विकास होता हैं
ReplyDeleteबाल्य काल में जो आदत बन जाती हैं वह जीवन पर्यन्त बनी रहती हैं
ReplyDeleteOk
ReplyDeleteFinish
ReplyDeleteNo
ReplyDeleteआंगनबाड़ी में बच्चे विद्यालय आने की तैयाारी करतेहै ।
DeleteSuch activities help to give concrete understanding of sensory organs and help children to become more active and aware of their surroundings
ReplyDeleteशिशु एवं बालसंगोपन अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दा है, पञ्चज्ञानेन्द्रीय विकास के साथ ही सच्चे अर्थों में सर्वांगीण विकास के लिए अभ्यान्तरिक दृष्टि से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भाषिक एवं वैचारिक विकास के साथ ही, वाह्य दृष्टि से सामाजिक और व्यावहारिक विकास के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए
ReplyDeleteशिशु एवं बालसंगोपन अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दा है, पञ्चज्ञानेन्द्रीय विकास के साथ ही सच्चे अर्थों में सर्वांगीण विकास के लिए अभ्यान्तरिक दृष्टि से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भाषिक एवं वैचारिक विकास के साथ ही, वाह्य दृष्टि से सामाजिक और व्यावहारिक विकास के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए
Deleteसहमत हू
DeleteSensory activities encourages learning through exploration.problem solving and creativity and helps in the development of language and motor skills
ReplyDeleteबच्चों को जीभ द्वारा अलग-अलग तरह के खाने योग्य पदार्थ के स्वाद को पहचानने की गतिविधि कराई जा सकती है,, नाथद्वारा अच्छे और बुरे सुगंध के बारे में बताया जा सकता है कान द्वारा मधुर और कर्कश स्वर की पहचान कराई जा सकती है
ReplyDeleteAt ECCE stage child can learn so many general things from his experience and can be prepared for better schooling.
ReplyDeleteईसीसीई के द्वारा बच्चों की अच्छी से देखभाल के बारे में सीखा जा सकता है।
ReplyDeleteBilkul seeka ja sakta hai
DeleteIndriya sanvedi gatividhi bacho ke mansik vikas me sahayak hongi
ReplyDeleteUse of Sense organs is really first step to learn touch smell seeing stimulating activities are required in anganwadi
ReplyDeleteपांचों ज्ञानेंद्रियों का विकास आंगनबाड़ी में भी हो सकता है विभिन्न प्रकार की छोटी-छोटी गतिविधियां कराकर के बालकों की ज्ञान इंद्रियों का विकास किया जा सकता है
ReplyDeleteबच्चों की सभी ज्ञानेंद्रियों के विकास के लिए आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चो के साथ विभिन्न गतिविधियां करानी बहुत आवश्यक है।
ReplyDeleteFor proper development of sense organs,a child needs safe environment where he gets different opportunities to engage freely so that he can observe and react thus make himself able to react.
ReplyDeletethese activities help children in their mental development and to make use of the sences in their learning process
ReplyDeleteIn initial age child development be so fast , that we may get wonderful results
ReplyDeleteबाह्य दुनिया का ज्ञान प्रथम इंद्रियों से ही प्राप्त होता है।
ReplyDeleteहम बच्चो के लिए माचिस की खोखो को एक धागे में पिरो कर उसपर गिनती कलर एनिमल लिख सकते ही और उसको धागे से खींचकर बार बार रोकेंगे जिस बच्चे के पास जो खोखा आएगा बच्चा उसे याद रखेगा
ReplyDeleteअंगणवाडी के छात्र अबोध बालक होते हैं।उन्हे जीस उचित दिशा की ओर ले जाना हैं
ReplyDeleteAanganvadi ke chhatar avodh balak hote hain unhe jis disha main modna chaho mod sakte ho
Deleteप्रत्येक ज्ञानेन्द्रिय के लिए संवेदी गतिविधियाँ और अनुभव बाल्यावस्था में ज्ञानेन्द्रियों और मष्तिस्क के संयोजन में अत्यंत उपयोगी तथा महत्वपूर्ण होती है. ये अनुभव दीर्घकालीन प्रभाव डालने वाले होते हैं. अतः भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं.
ReplyDeleteઇન્દ્રીઓ વડે મેળવેલું જ્ઞાન ચિરાકાળ સુધી ટકી રહે છે. શરૂઆતના વર્ષોમાં મેળવેલું જ્ઞાન તેમજ શરૂઆતના વર્ષોમાં મળેલા અનુભવો પ્રગતિમા સહાયરૂપ બને છે.
ReplyDeleteअंगणवाडी में गतीविधी ही बच्चोंका सिखने का आधार है | बच्चोंको देखना, सुनना, स्पर्श करना, चखना, सुंघना इसमें नैसर्गिक रुची रहती है | खट्टा, मिठा ये स्वाद बच्चे अनुभव करके ही जान सकते है | गरम, ठंड ये स्पर्शग्यान से ही बच्चे जान सकते है | अपने घर के आसपास क्या क्या है ? इसकी जानकारी बच्चे हरदिन अंगणवाडी में आते जाते जो देखते है उसिसे ही बता सकते है |
ReplyDeleteआरंभिक वर्षोंमें हर बच्चा अपने परिवेश से सिखने की शुरुवात करता है | परिवेश से जुडे अनुभावों को गतीविधी से जोडने का काम अंगणवाडी कार्यकर्ती करती है |
Senses are the gateways of Knowledge. By stimulating different senses, child's capacity to learn increass.
ReplyDeleteगेंद फेंकना ध्वनियों को ध्यान से सुनना स्वाद महसूस करना ठंडे गर्म का अनुभव करना और गंध महसूस करना इन प्रकार की गतिविधियों को हम बच्चों को करा कर बच्चों का संपूर्ण ज्ञानेंद्रिय विकास कर सकते हैं।
ReplyDeleteआगनबाडी गतिविधियों बच्चों को ज्ञानेंद्रिय विकास के लिए आकर्षित किया जा सकता है आंगनबाड़ी संपूर्ण ज्ञानेंद्रिय विकास कर सकता है
Deleteअंगणवाडी मे पढ रहे बच्चों को ज्यादा से ज्यादा खेलो की मदद से कृतिशील बनाया जमा चाहिये
ReplyDeleteECCE बच्चे को घर के परिवेश से निकल कर विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने में एक पुल की तरह कार्य करता है, जिसमे बच्चा घर जैसा माहौल और जुड़ाव महसूस करता है,जो उसके ज्ञान को स्थायी बनाने में सहायक है।
ReplyDeleteTrue
Deleteअंगणवाडी के छात्र अबोध बालक होते हैं।उन्हे जीस उचित दिशा की ओर ले जाना हैं, ले जाने के लिये यह उपक्रम बहुत उपयोगी साबित हो सकता हैं।
ReplyDeleteJi bilkul sahi
Deleteआगनबाड़ी मे प्रवेश करने के बाद वाह्य कारकों के बारे मे बच्चें अपनी इन्द्रियों का प्रयोग ज्यादा करता है एवं इन्द्रियों द्वारा सीखा गया ज्ञान स्थाई होता है इसी समय उसके मन मे बहुत सारे सवाल भी होते हैं और उनके बारे मे जानने के लिए इन्द्रियों का प्रयोग करता है।
ReplyDeleteआंगनबाड़ी में बच्चे खेल-कूद के माध्यम से सीखते हैं।इससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक और सांसारिक विकास होता है।गत्यात्मक एवं सामाजिक विकास भी प्रबल होता है।
ReplyDeleteThe learners can easily learn some matters which has practical aspects to make them better by providing sensation through practicals.
ReplyDeleteआंगनबाडी का सघन निरिक्षण किया जाना चाहिए और आंगनबाडी में चल रही गतिविधियों की विधिवत समीक्षा करते हुए उसे अतिशीघ्र सुधारने की आवश्यकता है। आंगनबाडी का संचालन अधिकतर जगहों पर केवल खानापूर्ति बन कर रह गई है निरिक्षण के नाम पर "सब गोलमाल है " वाली कहावत चरिततार्थ होती दिखाई दे रही है। जिसको सुधारना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteबच्चो के बोलने की क्षमता में भी वृध्दि के लिए लाभदायक है
ReplyDeleteECCE vidyalayi siksha aur vyaktigat jeevan ke liye ek buniyad pradan karta hai
ReplyDeleteFROM ECCE STUDENTS GET MENTOL AND PHYSICALDEVELOPMENT
ReplyDeleteघर के बाद बच्चा घर के माहौल जैसे आगनबाडी में जाकर बाहरी दुनिया का ज्ञान, स्वयं ही छूकर देखकर अपने अनुभव से ज्यादा सीखता है
ReplyDeleteAnganvadi me ki Jane wali gatividhiyan bacche ke vikas ke liye bohut avashyak hai
ReplyDeleteआंगनबाड़ी में कराई जाने वाली गतिविधियां बच्चों के संज्ञानात्मक विकास का आधार तैयार करती है जिस पर उनका व्यक्तित्व विकास निर्भर करता है
ReplyDeleteबच्चों की सभी ज्ञानेंद्रियों के विकास के लिए यह जरूरी है कि सभी ज्ञानेंद्रियों के प्रयोग से संबंधित गतिविधियां करवाई जाए जैसे स्वाद संबंधी , देखने के लिए विभिन्न चित्रों से संबंधी गतिविधियां , श्रवण कौशल के लिए कहानी सुनना सुनाना आदि
ReplyDeleteबाह्य दुनिया का ज्ञान प्राप्त प्रथम इंद्रियों से ही होता है।
ReplyDeleteअंगणवाडी में कि जानेवाली गतीविधिया बच्चोकों भाषेत और सामाजिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है
ReplyDeleteAangan wadi mae kahani sunna aur sunana, khilonae banana , unhae rangna etiyadi bachon ko aagae sekhnae k liya tayar karega
ReplyDeleteआगनवाड़ी में की गई गतिविधियां बच्चो के लिए लाभकारी और सामाजिक परिवेश से जोड़ने वाली होती है,,,!
ReplyDeletePractical knowledge is permanent for children
ReplyDeleteआंगनवाड़ी के बच्चो की गतिविधियाँ खेल आधारित होनी चाहिए जिससे बच्चो को आनन्द आवे । ठोस वस्तु , चित्र,मिट्टी से स्वतंत्र कार्य के भरपूर अवसर दिए जाने चाहिए एवं उन अध्यापक द्वारा प्रश्नोत्तर विधि से शिक्षण कार्य होना चाहिए।
ReplyDeleteआईसीटी का प्रयोग भी होना चाहिए।
संज्ञानात्मक विकास की गतिविधियाँ,रोल प्ले, मार्निंग सर्कल टाइम, खेल के नियम में माता - पिता को सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि मौखिक भाषाई विकास हो सके बच्चो को बोलने ,कार्य करके सीखने के भरपूर अवसर मिलने चाहिए।
DeleteBachhe dekdekke sikte hai pahela anganavadi me
DeleteVery true
ReplyDeleteप्रतेक गतिविधि बच्चो के सर्वांगीण विकास के लिए लाभदायक होती हैं
ReplyDeleteआगनवाढी में ऐसी गतिविधियों को कराया जाना चाहिए जो कि बच्चों के लिए आकर्षित हो
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteप्रत्येक इंद्रिय के लिए अभ्यास कराया जाना चाहिए
ReplyDeleteईसीसीई विद्यालय शिक्षा तथा व्यक्तिगत जीवन में सीखने के लिए एक बुनियाद प्रदान करता है|
ReplyDeleteबगीचे और प्रांगण के अंदर खेले गए खेल, नृत्य, संगीत, चित्र आँकना, रंग भरना, सामान्य बात - चीत, कहानियाँ एवं नाटक द्वारा बच्चे आसानी से सीखते हैं।
ReplyDelete3 से 6 वर्ष के बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं जिस प्रकार कच्ची मिट्टी जैस आकार देता है वह वैसा बन जाता है इसी प्रकार आगनबाडी या प्री स्कूल में खेल के माध्यम से आकार दिया जा सकता है ।
ReplyDeleteबच्चा अपना स्वयम का अनुभव तो रखता है, जो कि उसका अपना जरूरत पूरा करता है। पर हमारे वंचित स्तर को पाने के लिए उतना ही तैयार होता है जितनी कि कुम्हार के हाथों की मिट्टी जिससे वह मन माफिक आकार गढ़ता है। आप चाहे कोई भी आकार में गढ़ लें।
ReplyDeleteAnganwadi and pre school education should include gardening as an important activity , developing their hands on experience at maximum
ReplyDeleteChildren are very good listener if you focus on there ability they will understand you and listen also take the different techniques and activity base learning
ReplyDeletePreschool education must focus on skills like listening and speaking more . Further the activities such as gardening, work education, dance and drama , music must be included in it.
ReplyDeleteआंगनबाड़ी में की गई गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होती है
ReplyDeleteThis will develop their mind rapidly and appropriately.
ReplyDeleteECCE Helpful for children
ReplyDeleteबच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक है
ReplyDeleteआंगनबाड़ी में बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है
ReplyDeleteAanganbaadi m bachho ka sarvaangin v mulbhut vikas hota h ji
ReplyDeleteआंगनबाड़ी के माध्यम से LSRW में से मुख्य या प्रारंभिक क्षमता सुनना और बोलने के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
ReplyDeleteसंवेदी गतिविधियों के माध्यम से न केवल ज्ञानेन्द्रियों का विकास होता है अपितु ज्ञानार्जन की प्रक्रिया अधिक शशक्त होती है।
ReplyDeleteअंगणवाडी मे पड रहे बच्चो को खेल की मदद से अच्छे अच्छे अच्छा अनुभव दिया जा सकता है
ReplyDeletepoems , play method and real life experiences will help child to learn in primary stage
ReplyDeleteबच्चों को कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है।
ReplyDeleteबच्चे ज्ञान के स्व निर्माता होते है वे प्राय अनुभव आधारित अधिगमो से सीखते है
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteVery good information
ReplyDeleteChildren Learn well when we teach well with 100% efforts, that's it
ReplyDeleteसंवेदी गतिविधियाँ द्वारा आंगनवाड़ी के छोटे बच्चों का मानसिक विकास होता है l विद्यालय में बच्चे रूचिपूर्ण रुप से सीखते हैं l
ReplyDeleteअंगणवाडी मे पढ रहे बच्चों को ज्यादा से ज्यादा खेलो की मदद से कृतिशील बनाया जमा चाहिये
ReplyDeleteVery good information
ReplyDeleteखेल खेल में बच्चों को कृति शील बनाना आंगनवाड़ी का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए
ReplyDeleteप्रारंभिक वर्षों की गतिविधियां हमेशा के लिए स्थाई होती है जो की जीवन भर साथ देती है प्रारंभिक जीवन में संवेदनाओं से मस्तिष्क का अच्छा विकास होता है तांत्रिकाएं अधिक विकसित होती है
ReplyDeleteEarly childhood care and leaening is very important
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ReplyDeleteस्विस मनोवैज्ञानिक "जीन पियाजे" ने अपने सिद्धांत में संज्ञानात्मक विकास का एक व्यवस्थित अध्ययन किया है जिसे चार अवस्थाओं में वर्गीकृत किया गया है और 'संवेदी प्रेरक अवस्था' उनमें से एक है।
संवेदी प्रेरक अवस्था' जन्म से लेकर दो (0-2 वर्ष) तक रहती है। शिशु दुनिया को समझने के लिए अपनी इंद्रियों और प्रेरक क्षमताओं का उपयोग करते हैं, सजगता के साथ शुरुआत करते हैं और संवेदी प्रेरक कौशल के जटिल संयोजन के साथ समाप्त होते हैं।
संवेदी प्रेरक अवस्था में, शिशु संवेदी और प्रेरक गतिविधि के माध्यम से दुनिया का पता लगाते हैं। वे अपनी इंद्रियों के माध्यम से पहचानते हैं, महसूस करते हैं और समझते हैं पर्यावरण का अनुभव करते हैं।
संवेदी प्रेरक अवस्था की विशेषताएं:
वस्तु स्थाइतव
प्रारंभिक प्रतिनिधित्ववादी विचार
कार्य-कारण की अवधारणा को विकसित करता है
सरल सजगता और अलगाव की चिंता
प्रेरक गति के साथ इंद्रियों का समन्वय
संवेदी गतिविधियों के माध्यम सीखाना से बाल जीवन के लिए बहुत ही अच्छा है
ReplyDeleteThis is very important for childhood
ReplyDeleteआँगनवाडी मे बच्चों को खिलोनो के माध्यम से किर्या आधारित सीखने पर बल देना चाहिए
ReplyDeleteआंगनबाड़ी में बच्चा अन्य बच्चो के साथ मिलकर खिलौनों से खेलते हुए सीखता है.
ReplyDeleteशैशवावस्था या प्रारंभिक शिक्षा की आयु में बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक विकास अन्य अवस्था से तेज़ गति से होता है इसी अवस्था मे बालक अपने आस पास के परिवेश के अनुसार अपना अपने आपको ढालने की कोशिश करता है।
ReplyDeleteमनोविज्ञान के अनुसार बालक का 90% मस्तिष्क का विकास इस अवस्था मे हो जाता है।
Ecce and anganwadi provide an excellent opportunity for kids to learn. We can also add multiple objects with multiple surface and texture to be given to kids so they can understand by touch and feel.
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ReplyDeleteAanganvadi ke madhyam se bacche apne aas pass ke vatavaran ko samajhne lagte h
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ReplyDeleteTopic ko better tarike se samzaya gaya
ReplyDeleteबच्चो के जीवन के शुरुआती वर्षों का महत्व सबसे ज्यादा होता है।इसलिए गतिविधि आधारित शिक्षण सबसे अच्छा होता है।
ReplyDeleteBache gatividhiyo dwara jyada behtar tareeke se seekhte h .
ReplyDeleteआंगनबाड़ी आधार तैयारी के लिए आवश्यक हैं।
ReplyDeleteबच्चों के पांचों संवेदी अंगों के विकास के लिए हम आंगनबाड़ी मे खिलौनो, चित्रों, रेडियो, अंगों को छूकर बताना, आदि गतिविधियों के साथ सीखने को बढ़ावा दे सकते है। ताकि संवेदी अंगों का उचित विकास हो सके।
ReplyDeleteअंगणवाडी में कि जानेवाली गतीविधिया बच्चोकों भाषेत और सामाजिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है
ReplyDeleteअंगणवाडी में कि जानेवाली गतीविधिया बच्चोकों भाषेत और सामाजिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है.
ReplyDeleteस्थायी ज्ञान प्रदान करने में सहायक है।
ReplyDeleteसामान्य तौर से छोटे बच्चे संवेदना से ही सीखते हैं अतः इन्द्रियों के माध्यम से ज्ञान अर्जन कराना चाहिए
ReplyDeleteChhote bache sanvego dwara jyada seekhte h , isliye ye gatividhiya bacho k liye bhut upyogi sidh hoti h .
ReplyDeleteIndriyon ke madhyam se sikhne se bacho ka Samagra
ReplyDeletevikash hota hai
Indriyo se prapt gyaan isthayi hota hain
ReplyDeleteखाना पूर्ति नही होकर स्थाई रूप से कार्य करना होगा।
ReplyDeleteसही है तभी कुछ हो सकता है
Deleteबच्चो के जीवन के प्रारंभिक वर्ष उन के संपूर्ण जीवन और समग्र और सर्वांगीण विकास के लिए बहुत ही उपयोगी और महत्वपूर्ण होते है l अतः ईसीसीई विद्यालयी शिक्षा तथा व्यक्तिगत जीवन में सीखने के लिए एक बुनियाद प्रदान करता है
ReplyDeleteप्रत्येक इंद्रिय के लिए संवेदी गतिविधियाँ और अनुभवों के बारे में सोचें। साझा करें कि किस प्रकार ये संवेदी गतिविधियाँ आंगनवाड़ी के छोटे बच्चों के लिए लाभकारी हैं।
ReplyDeleteWe should more evolve with childrens
ReplyDeleteEcce and FLN formal education ke liye yojak kadi ka karya kr rhe h
ReplyDeleteExcellent
ReplyDeleteआंगनवाड़ी में बच्चे ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से सीखते हैं और ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से सीखना बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है
ReplyDeleteआंगनवाड़ी बच्चो के प्रारंभिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जहां बच्चे शारिक विकास के तंत्रिका के सिद्धांतो के आधार पर विकसित होते है।
ReplyDeleteबच्चों को प्यार से सिखाना चाहिए । लड़की लड़का जैसे भेद भाव नही करना चाहिए
ReplyDeleteआगनवाड़ी मै खेलों की मदद से अच्छा ज्ञान दिया जा सकता हैं
ReplyDeleteबच्चों को आंगनवाड़ी में और घर पर भी विभिन्न प्रकार के खिलौनों द्वारा ,गतिविधियों द्वारा,छूकर महसूस कराना,स्वाद लेना,सूंघना(विभिन्न फूलों या खाद्य पदार्थों ) द्वारा भी शारीरिक,मानसिक विकास में सहायक है।
ReplyDeleteAanganbadee ki shiksha bachchon me Padhye ki Ruchi ko Vikas it Kartik hae
ReplyDeleteबच्चों का संवेदनात्मक विकास अपने अनुभवों और संवेदी
ReplyDeleteअंगों के प्रयोग से होता है
खेल एक अच्छे माध्यम हो सकता है सभी ज्ञानेंद्रिय का अनुभव देने के लिए।
ReplyDeleteइसके अलावा उन्हें भोजन के दौरान सूंघने और ठंडा और गर्म का अनुभव दिया जा सकता है।
उपयोगी
ReplyDeleteAnganbadi bacchon ko Sundar aur sashakt Madhyam Mein sikhane ka
ReplyDeleteअंगणवाडी के छात्र अबोध बालक होते हैं।उन्हे जीस उचित दिशा की ओर ले जाना हैं, ले जाने के लिये यह उपक्रम बहुत उपयोगी साबित हो सकता हैं।
ReplyDeleteREPLY
जीन पियाजे ने संवेदी गामक अवस्था का वर्णन किया है बच्चों की मोटर स्किल हेतु खिलौनों के साथ छोटी छोटी क्रियाएं कराई जाय ।
ReplyDeleteआंगनवाड़ी बच्चों को सिखाने का सशक्त माध्यम है
ReplyDeleteबुनियादी शिक्षा बच्चो के लिए अमृत के समान है ।
ReplyDeleteसंवेदी गतिविधियों से इंद्रिय तंत्रिकाएं सक्रिय होकर कार्य करती हैं, जिससे बालक का मानसिक विकास होता है।
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ReplyDeleteईसीसीई संवेधनशील गतिविधि सभी इंद्रियो से संबंधित गतिविधि बच्चों से करवाने की बात करता है, ये गतिविधियां बच्चो के परिवेश से जुड़ी हुई होनी चाहिए। जिससे से बच्चे जल्दी सीखेंगे।
Deleteईसीसीई के द्वारा बच्चे के विकास के सभी आयाम में दक्षता से हासिल होती है और स्कूली शिक्षा के लिए तत्पर होता है साथ ही साथ सर्वांगीण विकास की नींव रखी जाती है जो की एक कुशल नागरिक होने के लिए बच्चों को प्रेरित करती है
ReplyDeleteयह सत्य है कि किसी भी बच्चे के प्रारंभिक वर्ष उसके सही विकास क लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
ReplyDeleteSensory motor activities are essential part of early stage developmental stage
ReplyDeleteआंगनवाड़ी में संवेदी गतिविधियों द्वारा बच्चों के इन्द्रियों का समुचित विकास होता है।
ReplyDeleteप्रिंस स्कूलिंग गतिविधियां बच्चों के सशक्त विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बच्चों की इंद्रियों का विकास गतिविधियों के माध्यम से काफी सशक्त हो जाता है
ReplyDeleteआंगनबाड़ी में बच्चों के आध्यात्मिक विकाश पर भी ध्यान देना होगा।
ReplyDeleteबच्चे की संवेदनाएं उसके मन से जुड़ी होती हैं अतः उनके स्वस्थ विकास के लिए उनके अनुकूल वातावरण की बात की जाती है
ReplyDeleteप्रारम्भिक वर्ष व्यक्ति निर्माण, बुद्धि, अधिगम के लिए आदर्श काल है |
ReplyDeleteप्रारम्भिक वर्ष व्यक्तित्व निर्माण में बहुत हीं महत्वपूर्ण होता है।
ReplyDeleteबच्चों को प्यार से सी खाना चाहिए क्योंकि बच्चे मन के सच्चे होते हैं
ReplyDeleteEarly age is important for children
ReplyDeleteप्रारम्भिक वर्षों का प्रभाव अंत तक रहता हैं, अतः बच्चे के सीखने के ये सबसे महत्वपूर्ण समय है
ReplyDeleteBachche aanganwadi me paraspar antahkriya karte Hain ek dusre se batcheet karte Hain sath sath khelte Hain isse Inka mansik sharirik aur bhavanatmak vikas me sahayta milti ha
ReplyDeleteआंगनबाड़ी के छोटे बच्चों के लिए ऐसी गतिविधियां जिनमे उनकी हाथ पैर और दिमाग इंवॉल्व हो जिससे उनमें सूक्ष्म गत्यात्मक कौशल का विकास हो सके
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ReplyDeleteLearn by sense results in development of mind
ReplyDeleteआंगनवाड़ी केन्द्रों से बच्चों को बुनियादी शिक्षण एवम् सर्वांगीण विकास में मदद मिलती हैं।इससे बच्चे घर जैसे वातावरण में खेलकूद आधारित गतिविधियों से सीखते हैं।
ReplyDeleteSensory organ se hi Hume bahari dunia ka samajh ata hai...gyan bikasit hota hai..jo Hume bhavi jiban me lav dayak hote hain
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