कोर्स 06 : गतिविधि 5 : अपने विचार साझा करें
अपने पूर्व प्राथमिक विद्यालय/ आंगनवाड़ी केंद्र में आप अक्सर किस तरह की विशेष आवश्यकताओं का अवलोकन करते हैं? उस स्थिति का उल्लेख करें जिसमें आप विशेषज्ञ की सहायता लेना चाहेंगे?
अपने पूर्व प्राथमिक विद्यालय/ आंगनवाड़ी केंद्र में आप अक्सर किस तरह की विशेष आवश्यकताओं का अवलोकन करते हैं? उस स्थिति का उल्लेख करें जिसमें आप विशेषज्ञ की सहायता लेना चाहेंगे?
विशेष आवश्यकताओं
ReplyDeleteकविता लय व इशारो के साथ और शारीरिक खेल खिलाकर बच्चो को सक्रिय रखेंगे
Deleteकविताओं
Bachhoko adhikadhik pravruttiya karaene
DeleteCondultation for Child with special needs
Deleteविशेष आवस्कता वाले बच्चों के अधिगम के लिए विशेषज्ञों के अनुभव का प्रयोग कर सकते हैं
DeleteWashrooms ache ni h & bacho ki aniymitta
Deleteअपने पूर्व प्राथमिक विद्यालय/ आंगनवाड़ी केंद्र में आप अक्सर किस तरह की विशेष आवश्यकताओं का अवलोकन करते हैं? उस स्थिति का उल्लेख करें जिसमें आप विशेषज्ञ की सहायता लेना चाहेंगे?
Deleteकविता लय व इशारो के साथ और शारीरिक खेल खिलाकर बच्चो को सक्रिय रखेंगे
DeleteBasic vibagh aur baal vibagh ko merge karne se bacche jaldi aur aasani se sikhenge
DeleteQualified and experienced trained teachers can approach in best way..not only to earn but they can understand the psychology of each n every child..also more teachers should be appointed for small children..
Deleteआंख से दिव्यांग बच्चों के लिए एनी जैसे उपकरण बहुत सहायक हुए हैं
DeleteChildren coming in preprimary/anganvadi should be trained in motor skills.
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जायेगी।
Deleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जायेगी।
ReplyDeleteaganvari teachers ki udasinta ko dur karna hona chahiye
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जायेगी।
Deletevishesh aavshyakata wale baccho ke kis tarike se sikhaye isme visheshgya ki salah li jayegi
Deleteइसके लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षक शिक्षिकाओं की आवश्यकता है। ऐसे केंद्रों पर सामान्य चिकित्सा सुविधाशिविर लगाते रहना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने पर ही माता-पिता के प्रति यह केंद्र विश्वास पैदा कर सकते हैं तब माता-पिता आसानी से अपने बच्चों को यहां लेकर आ सकते हैं।
ReplyDeleteडाइट पाली फरीदाबाद
कुछ बच्चों में अवस्था के अनुरूप गत्यात्मक परिवर्तन नहीं दिखाई देते हैं जिसके लिए स्पेशल एजुकेटर का विद्यालय पर समय-समय पर विजिट होना आवश्यक है जिससे उनकी समस्या का निराकरण में विलंब ना हो
ReplyDeleteआंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि बालकों का चाहे वह दिव्यांग वालों को यह सामान्य वालों को भलीभांति पूर्वक विकास किया जा सके
ReplyDeleteSometimes we see children who have some type of disability, and sometimes a child is superlative. So special educators should visit from time to time in aganbadis
ReplyDeleteमाता पालक सहयोग, अध्ययन अभ्यास,
ReplyDeleteट्रेनिंग, sandnyanatmk ,गत्यातमक विकास के लिये सलाह.
Vishesh avashyakta wale bacchon ke liye Ghar Se anganbadi ya purv Prathmik shalaon Tak pahunchne ke liye vishesh Suvidha honi chahie aur Unki avashyakta anusar gatividhiyan honi chahie iske liye visheshagya ka Salah jaruri hai
ReplyDeleteThere are some opportunities for children to share thier talks and should be able to share with others.
ReplyDeleteવિશેષ જરૂરિયાત વાળા બાળકોની જરૂરિયાત મુજબ વિશેષજ્ઞ ની સલાહ લેવી.
ReplyDeleteआगनबाड़ी कार्य करता और साहायिका को विशेष तरह से प्रशिक्षण देने चाहिए जिससे बच्चों को सिखाने मे आसानी हो बच्चे खेल -खेल मे शिक्षण गतिविधियों ।सीख सके।
ReplyDeleteइसके लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षक जैसे ब्लाक रिसोर्स पर्सन की आवश्यकता होती है। वे शाला में या घर में शिक्षक व पालकों को सहयोग करें,
ReplyDeleteTrue
DeleteChildren coming in preprimary/anganvadi should be trained in motor skills.
ReplyDeleteखेलने के लिए स्थान ,बच्चों के सीखने के स्तर ,बच्चों के स्वास्थ्य ,बच्चों को मिलने वाला पोषक आहार
ReplyDeleteबच्चे के प्रारंभिक वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि यह वह समय है जब बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, इसलिए अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। अगर किसी बच्चे में शारीरिक और मानसिक रूप से विकास दिखाई नहीं देता तो स्पेशल Educator से संपर्क करना चाहिए या विशेषज्ञ से राय लेनी चाहिए।
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कार्यकत्रियों की आवश्यकता होती है।मानसिक रूप से कमज़ोर एवं दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित educators की आवश्यकता होती है।
ReplyDeleteआंगनवाड़ी कार्यकर्ता उनकी साहिका को पूर्ण रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वह छोटे बच्चों को उन्हीं के मानसिक स्तर के अनुसार गतिविधियां करा सकें
ReplyDeleteआंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सहायता से पहचान करेंगे तथा special एडुकेटर की मदद से कार्य को गतिशील करेंगें
ReplyDeleteIf teacher found some prblm instudent than he/ she should inform to the special educator
ReplyDeleteTrue
Deleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जायेगी।
ReplyDeleteसही है। नई शिक्षा नीति (राष्ट्रीय शिक्षा नीति२०२०) में इसके लिए प्रावधान किया गया है।
Deleteबच्चे के प्रारंभिक वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि यह वह समय है जब बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, इसलिए अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए
ReplyDeleteअगर बच्चे का शारीरिक, मानसिक विकास पर कुछ समयानुसार अंतर पड़ता है तो हम स्पेशल एडुएटर की सहायता ले सकते हैं और बच्चों को एलर्ट करने के लिए अपने गतिविधियों में जैसे ताली बजाकर या बच्चों को एक दूसरे बच्चों का हांथ पकड़वाने और कूदने जैसी गतिविधियों को करवाया जा सकता है
ReplyDeleteHamen Apne aaspaas ke vyaktiyon se Sahyog Lena chahie tatha Ka upyog Karke bacchon ko Uchch Shiksha Dena chahie
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक विद्यालय/या आंगनबाड़ी केंद्र में हम कुछ ऐसे बच्चों को भी अवलोकित करते हैं जिन्हें सामान्य बच्चों की अपेक्षा शैक्षिक एवं खेल ड्राइंग पेंटिंग, एवं अन्य शालेय गतिविधियां करने में सबसे अधिक मदद की आवश्यकता होती है घर में माता पिता और शाला में शिक्षक को इस बात पर सदैव बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है। पूर्व प्राथमिक शिक्षक व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बहुत ठीक प्रकार से प्रशिक्षित होना चाहिए। हमें बच्चों की सीखने व शारीरिक मानसिक सामाजिक रचनात्मक एवं भावात्मक, गत्यात्मक विकास का भी अवलोकन करने की आवश्यकता है। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ का परामर्श लेना चाहिए और माता पिता अभिभावक को भी बच्चों के प्रति सजग रहने हेतु प्रयास किए जाने के लिए प्रयास करने चाहिए। माता पिता को आशा और सकारात्मक सोच रखने हेतु बोलना चाहिए।जन्म के शुरुआती तीन वर्ष बच्चों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। अतः हमें बच्चों का ठीक प्रकार से अवलोकन करना चाहिए और आवश्यक होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर समाधान हेतु प्रयास किए जाने चाहिए। राम गोपाल शर्मा प्राथमिक शिक्षक शासकीय प्राथमिक शाला बिलवानी टपरा जनशिक्षा केन्द्र रमपुरा कलां विकास खंड गैरतगंज जिला रायसेन मध्यप्रदेश।
ReplyDeleteAanganbadi teachers ko adhik active v samparpit bnaya jay
ReplyDeletehttps://nishtha-ecce.blogspot.com/2023/01/06-5.html#comments
ReplyDeleteAll children should be given equal opportunity to learn
ReplyDeleteइसके लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षक शिक्षिकाओं की आवश्यकता है। ऐसे केंद्रों पर सामान्य चिकित्सा सुविधाशिविर लगाते रहना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने पर ही माता-पिता के प्रति यह केंद्र विश्वास पैदा कर सकते हैं तब माता-पिता आसानी से अपने बच्चों को यहां लेकर आ सकते हैं।
ReplyDeleteWe require mostly the activities surrounded environment.For this we can seek help from the officials.
ReplyDeleteविद्यालय पर समय-समय पर विजिट होना आवश्यक है जिससे उनकी समस्या का निराकरण में विलंब ना हो
ReplyDeleteBachche ka dhyan bar bar idhar udhar bhatakte rahta hai
ReplyDeleteअधिक से अधिक अवलोकन करने पर जोर देते हुए बच्चो की विषय के साथ कनेक्ट करने पर जोर देना होगा।
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों और दिव्यांग बच्चो को समझने हेतु विशेषज्ञ से संवाद की आवश्यकता होती है
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जायेगी।
ReplyDeleteविशेष आवस्कता वाले बच्चों के अधिगम के लिए विशेषज्ञों के अनुभव का प्रयोग कर सकते हैं
ReplyDeleteविशेष आवश्कता वाले बच्चो को अधिगम हेतु अधिक सहायता के लिए स्पेशल एजुकेटर की व्यवस्था पूर्ण रूप से की जानी चाहिए ताकि समावेशी शिक्षण को प्रोत्साहन मिल सके
ReplyDeleteसुनने, बोलने और चलने में असमर्थ बच्चों के लिए l
ReplyDeleteकुछ बच्चों में अवस्था के अनुरूप गत्यात्मक परिवर्तन नहीं दिखाई देते हैं जिसके लिए स्पेशल एजुकेटर का विद्यालय पर समय-समय पर विजिट होना आवश्यक है जिससे उनकी समस्या का निराकरण में विलंब ना हो
ReplyDeleteKarykartio ko aur adhik prashikshan diya jaye
ReplyDeleteकुछ बच्चे समय के साथ गत्यात्मक कौशल करते है और कुछ समय के बाद में और इन बच्चो मे हीनता का भाव उमड़ता है इस लिए विशेष बच्चो पर विशेष ध्यान देना चाहिए
ReplyDeleteVishesh avashyakta vale bachhon ke liye vishesh training ki avashyakta mahsus hoti hai
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक व प्राथमिक विद्यालयों में विशेष प्रकार के बालकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए
ReplyDeleteबच्चों को खेल खेल मे सीखने के प्रति रुचि पैदा करनी चाहिए
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ReplyDeleteप्राथमिक शिक्षक को ध्यान देने वाली बात यह है कि हम बच्चों मे जितनी भी अदतों का विकास करेंगे वे बच्चों की जिंदगी में दीर्घकालिक रहने वाली है
ReplyDeleteशिक्षा के साथ-साथ, बालों के समृद्धि और मानव विकास को बढ़ावा देने के लिए विकलांगता और बाल मनोबल कार्यक्रमों का समर्थन करना महत्वपूर्ण है।
ReplyDeleteActivity base and joyful learning
ReplyDeleteप्राथमिक या पूर्व प्राथमिक विद्यालय में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए ब्लॉक स्तर पर तीन स्पेशल एजुकेटर नियुक्त होते हैं जिसमें VI, HI और MI होते हैं यह सप्ताह में दो बार प्रत्येक विद्यालय का जहां पर स्पेशल बच्चा नामांकित होता है विजिट करते रहते हैं तथा उन्हें आवश्यक सपोर्ट भी करते हैं इसके साथ-साथ सभी शिक्षकों को भी सामान्य दिव्यंग्ताओं का प्रशिक्षण दिया जाता है जिससे बच्चों को चिन्हांकन में सहायता हो सके इन बच्चों को स्पेशल एजुकेशन देकर शिक्षा की सामान्य धारा के साथ जोड़ा जाता है ।
Deleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जाये !!
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक व प्राथमिक विद्यालयों में विशेष प्रकार के बालकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए
विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जाएगी
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता व सामान्य बच्चो की समावेशी शिक्षा में दिया जाए । हाँ सलाह व सहायता लेगे।
ReplyDeleteAaganbaadi mei aksar ham aise baccho se milte hai jinki sikhne ki gati dheere hoti hai aur unhe jada dhyan dene ki aur alag tarike se sikhane ki zarurat hoti hai . Hame us waqt kisi viseshagya ki zarurat hoti hai
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक विद्यालय में ऐसे बच्चे भी देखने को मिलते हैं जो बात करने में डरते हैं एवं अपना सर नीचे करके और आंख बंद कर लेते हैं ऐसे बच्चों को कैसे शिक्षित किया जाए इसके लिए विशेषज्ञ की राय लेना आवश्यक हो जाता है साथ ही ऐसे दिव्यांग बच्चों जो पराया समझ करके कमरे से बाहर निकलना और खेल तथा खेल गतिविधियों में भाग नहीं लेना चाह रहे हैं उनको कैसे खेल गतिविधियों में भाग कराया जाए इसके लिए विशेषज्ञ की राय आवश्यक होती है।
ReplyDeleteआंगनबाड़ी केंद्र में जितनी भागीदारी एक आंगनबाड़ी शिक्षक की होती है उतनी ही भागीदारी बच्चों के माता-पिता की भी होती है। अतः माता-पिता को समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण करते रहना चाहिए व कोई कमी महसूस हो तो मिलकर समाधान निकालना चाहिए
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह ली जाए और इसके लिए विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है जिससे बच्चों का समुचित रूप से विकास हो सके।
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों को विशेष अध्यापक की आवश्यकता होती है व अन्य अध्यापक सहायक कार्य कर सकते हैं
ReplyDeleteबच्चे के प्रारंभिक वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि यह वह समय है जब बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, इसलिए अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। अगर किसी बच्चे में शारीरिक और मानसिक रूप से विकास दिखाई नहीं देता तो स्पेशल Educator से संपर्क करना चाहिए या विशेषज्ञ से राय लेनी चाहिए।
ReplyDeleteअस्पष्ट उच्चारण करने वाले बच्चे के संबंध में विशेषज्ञों से सलाह ली जा सकती है।
ReplyDeleteअपने पूर्व प्राथमिक विद्यालय केदो और प्राथमिक विद्यालयों में शुरुआती दौर के बच्चों में कई असमानताएं देखने को मिलती हैं जैसे उसमें डेवलपमेंट में दिले होना कुछ बच्चों में सेरेब्रल पॉलिसी जैसे लक्षण दिखने उनके पेरेंट्स इतने जागरूक नहीं होते हैं कि उनका उनके बच्चे में यह और अनियमितता क्यों है वह समझ नहीं पाते हैं इसलिए जरूरी हो जाता है कि ऐसे बच्चों के लिए हमें विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए और पेरेंट्स को बुलाकर के उनके काउंसलिंग की जानी चाहिए
ReplyDeleteप्रीप्राइमरी/आंगनवाड़ी में आने वाले बच्चों को मोटर कौशल में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। बच्चों के लिए अपनी बातें साझा करने के कुछ अवसर हैं और उन्हें दूसरों के साथ साझा करने में सक्षम होना चाहिए।
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अधिगम के लिए विशेषज्ञों के अनुभव का प्रयोग कर सकते हैंअस्पष्ट उच्चारण करने वाले बच्चे के संबंध में विशेषज्ञों से सलाह ली जा सकती है।
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक विद्यालय/या आंगनबाड़ी केंद्र में हम कुछ ऐसे बच्चों को भी अवलोकित करते हैं जिन्हें सामान्य बच्चों की अपेक्षा शैक्षिक एवं खेल ड्राइंग पेंटिंग, एवं अन्य शालेय गतिविधियां करने में सबसे अधिक मदद की आवश्यकता होती है घर में माता पिता और शाला में शिक्षक को इस बात पर सदैव बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है। पूर्व प्राथमिक शिक्षक व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बहुत ठीक प्रकार से प्रशिक्षित होना चाहिए। हमें बच्चों की सीखने व शारीरिक मानसिक सामाजिक रचनात्मक एवं भावात्मक, गत्यात्मक विकास का भी अवलोकन करने की आवश्यकता है। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ का परामर्श लेना चाहिए और माता पिता अभिभावक को भी बच्चों के प्रति सजग रहने हेतु प्रयास किए जाने के लिए प्रयास करने चाहिए। माता पिता को आशा और सकारात्मक सोच रखने हेतु बोलना चाहिए।जन्म के शुरुआती तीन वर्ष बच्चों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। अतः हमें बच्चों का ठीक प्रकार से अवलोकन करना चाहिए और आवश्यक होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर समाधान हेतु प्रयास किए जाने चाहिए।
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चो को लिए सामान्य बच्चो के साथ कनेक्ट करने का प्रयास करते हुए योजना बनाए जिससे वो ज्यादा रुचि लेंगे
ReplyDeleteआंगनवाड़ी कर्मियों और प्री प्राइमरी शिक्षकों को अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाए
ReplyDeleteआंगनबाड़ी स्तर पर बच्चों को खेल के माध्यम से सिखाना चाहिए
ReplyDeleteChildren coming in preprimary/anganvadi should be trained in motor skills
ReplyDeleteVishesh avashyakta wale bacchon aur divyang bacchon ko samajhne hetu visheshagya se samvad ki avashyakta hoti hai tatha purv prathmik v prathmik vidyalayon mein Vishesh balkon per Dhyan diye Jana chahie aur bacchon Ko khel khel mein sikhane ki prati Ruchi paida karna chahie
ReplyDeleteMotor skills
ReplyDeleteयदि शिक्षक को किसी छात्र में कोई समस्या मिले तो उसे विशेष शिक्षक को सूचित करना चाहिए
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों और दिव्यांग बच्चो को समझने हेतु विशेषज्ञ से संवाद की आवश्यकता होती है
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक विद्यालय/आंगनवाड़ी केन्द्र पर अस्थि विकलांग, मानसिक रूप से कमजोर और आयु वर्ग से कम बौद्धिक क्षमता वाले बच्चे देखने को मिलते हैं। एक बच्चा ऐसा है जो मानसिक रूप से कमजोर है वह किसी भी बात को नही मानता और न बैठता है। हमेशा डर रहता है कि वह कही दुर्घटना का शिकार न हो जाय, ऐसी स्थिति मे हम विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहेंगे।
ReplyDeleteपूर्व प्राथमिक विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न प्रकार की विशेष आवश्यकताएँ होती हैं जिनमें विशेषज्ञों की सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। यहाँ कुछ प्रमुख विशेष आवश्यकताओं और उनसे निपटने के लिए संभावित उपायों का विवरण दिया गया है:
ReplyDelete### 1. **विकासात्मक देरी और विकलांगता**
- **मूलभूत आवश्यकताएँ:** कुछ बच्चों को शारीरिक, मानसिक या सामाजिक विकास में देरी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे, बोलने में देरी, मोटर कौशल की कमी, या संज्ञानात्मक विकलांगता।
- **विशेषज्ञ की आवश्यकता:** विकासात्मक चिकित्सक, स्पीच थेरेपिस्ट, और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट।
- **उपाय:**
- नियमित विकासात्मक मूल्यांकन।
- व्यक्तिगत शिक्षण योजनाएँ (IEPs) बनाना।
- स्पीच और मोटर स्किल्स में सुधार के लिए थेरेपी सत्र।
### 2. **व्यवहार संबंधी समस्याएँ**
- **मूलभूत आवश्यकताएँ:** कुछ बच्चे आक्रामकता, अत्यधिक शर्म, ध्यान की कमी, या अनुशासनहीनता जैसी व्यवहारिक समस्याओं का प्रदर्शन कर सकते हैं।
- **विशेषज्ञ की आवश्यकता:** बाल मनोवैज्ञानिक और व्यवहार विश्लेषक।
- **उपाय:**
- सकारात्मक व्यवहार समर्थन (PBS) कार्यक्रम।
- बच्चों और उनके परिवारों के लिए काउंसलिंग सत्र।
- कक्षा प्रबंधन रणनीतियाँ।
### 3. **भाषा और संचार की कठिनाइयाँ**
- **मूलभूत आवश्यकताएँ:** भाषा और संचार में कठिनाइयाँ, जैसे शब्दों का सही उच्चारण न कर पाना, या भाषा समझने में कठिनाई।
- **विशेषज्ञ की आवश्यकता:** स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट।
- **उपाय:**
- भाषा विकास के लिए इंटरेक्टिव और खेल आधारित गतिविधियाँ।
- नियमित स्पीच थेरेपी सत्र।
- बहुभाषी शिक्षण संसाधन।
### 4. **भावनात्मक और सामाजिक विकास**
- **मूलभूत आवश्यकताएँ:** कुछ बच्चे भावनात्मक और सामाजिक विकास में चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, जैसे सामाजिक संपर्क में कठिनाई, या आत्म-नियंत्रण की कमी।
- **विशेषज्ञ की आवश्यकता:** बाल मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता।
- **उपाय:**
- सामाजिक कौशल विकास कार्यक्रम।
- नियमित भावनात्मक मूल्यांकन और काउंसलिंग।
- परिवार के साथ मिलकर काम करना।
### 5. **स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्याएँ**
- **मूलभूत आवश्यकताएँ:** पोषण की कमी, एनीमिया, मोटापा, या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ।
- **विशेषज्ञ की आवश्यकता:** पोषण विशेषज्ञ और बाल चिकित्सक।
- **उपाय:**
- पोषण युक्त आहार योजना।
- नियमित स्वास्थ्य जांच।
- पोषण शिक्षा कार्यक्रम।
### 6. **सीखने की कठिनाइयाँ**
- **मूलभूत आवश्यकताएँ:** कुछ बच्चे पढ़ने, लिखने, या गणित में कठिनाई का सामना कर सकते हैं।
- **विशेषज्ञ की आवश्यकता:** विशेष शिक्षा शिक्षक और शिक्षा मनोवैज्ञानिक।
- **उपाय:**
- बच्चों की व्यक्तिगत शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुसार विशेष शिक्षण तकनीक।
- नियमित प्रगति मूल्यांकन।
- बच्चों की सीखने की शैली के अनुसार शिक्षण सामग्री तैयार करना।
### 7. **परिवार और सामुदायिक समर्थन की कमी**
- **मूलभूत आवश्यकताएँ:** कुछ बच्चों को घर और समुदाय से पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता।
- **विशेषज्ञ की आवश्यकता:** सामुदायिक कार्यकर्ता और पारिवारिक काउंसलर।
- **उपाय:**
- परिवारों को शिक्षित करने और समर्थन देने के लिए सामुदायिक कार्यक्रम।
- परिवारों के साथ नियमित बैठकें और संवाद।
- अभिभावकों के लिए कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण सत्र।
इन सभी विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पूर्व प्राथमिक विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में समग्र विकास और शिक्षा के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिसमें विभिन्न विशेषज्ञों की सहायता शामिल हो। इससे बच्चों को उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त समर्थन और संसाधन मिल सकते हैं।
विशेष आवस्कता वाले बच्चों के अधिगम के लिए विशेषज्ञों के अनुभव का प्रयोग कर सकते हैं
ReplyDelete2023 at 8:58 AM
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह ली जायेगी।
Vishesh avasykata vale bachcho ko kaise padaya jaye jaise koi bachcha n dekh sakata hai na sun sakata hai
ReplyDeleteआगनवाड़ी या पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में कई ऐसे बच्चे होते हैं जो बोलने में संकोच करते हैं गतिविधि में भाग नही लेते है अकेले रहना ज्यादा पसंद करते है तो ऐसे छात्रों के लिए हमे विशेषज्ञ से सलाह लेने की आवश्यक्ता होती हैं।
ReplyDeleteकविता लय व इशारो के साथ और शारीरिक खेल खिलाकर बच्चो को सक्रिय रखेंगे
ReplyDeleteVishesh avashyakta Wale bacchon ki Khoj kar unko doctor ki Salah Leni Ho kahenge
ReplyDeleteअत्याधिक भयभीत रहने वाले, कम संवाद करने वाले, देर से सीखने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें सिखाने हेतु विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी
ReplyDeletebacche samaan prakriti ke nhi hote hain alag alag baccho ke seekhne samajhne aur sochne ka star alag alag hota hai , baccho ka vargikaran Karte huye visheshagya se Uchit paramarsh prapt kar kriyanvit karna chahiye.
ReplyDeleteEvery children are important for teacher for growth of personal development
ReplyDeleteबहुत ही प्रभावी
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आंगनवाड़ी में अधिक प्रेम व स्नेह के साथ शिक्षण मिले
ReplyDeleteअपने पूर्व प्राथमिक विद्यालय/ आंगनवाड़ी केंद्र में आप अक्सर किस तरह की विशेष आवश्यकताओं का अवलोकन करते हैं? उस स्थिति का उल्लेख करें जिसमें आप विशेषज्ञ की सहायता लेना चाहेंगे
ReplyDeleteआंगनवाड़ी कार्यकर्ता उनकी साहिका को पूर्ण रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वह छोटे बच्चों को उन्हीं के मानसिक स्तर के अनुसार गतिविधियां करा सकें
ReplyDeleteBacchon ko Khel Khel Mein sikhane ki Ruchi Paida Karni chahie
ReplyDeleteबच्चे के प्रारंभिक वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि यह वह समय है जब बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, इसलिए अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए
ReplyDeleteबच्चों को ले प्राप्त करने के लिए उन्हें एकरूपता के साथ समावेशित करना होगा बच्चे कोमल हृदय और कोमल मस्तिष्क के साथ होते हैं उन्हें उनके साथ संभव रखते हुए समग्र विकास की गतिविधियों से परिचित कराना चाहिए
ReplyDeletePurv prathmik School AVN anganbadi Kendra mein pray bacchon ki niyamit upsthiti ek Pramukh samasya hai
ReplyDeleteRegarding special needs kids
ReplyDeleteविशेषज्ञ के होने से सीखने से खाने में अत्यधिक सुविधाजनक होता है
ReplyDeleteबच्चों की शारीरिक एवं मानसिक गतिविधियों का सूक्ष्म अवलोकन
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अधिगम में आने वाली समस्याओं के समाधान हेतु विशेषज्ञो से संवाद की आवश्यकता होती है
ReplyDeleteकविता लय व इशारो के साथ और शारीरिक खेल खिलाकर बच्चो को सक्रिय रखेंगे |
ReplyDeleteसुविधाशिविर लगाते रहना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने पर ही माता-पिता के प्रति यह केंद्र विश्वास पैदा कर सकते हैं तब माता-पिता आसानी से अपने बच्चों को यहां लेकर आ सकते हैं।
ReplyDeleteVishesh avashyakta Wale bacchon ko vishesh prashikshan ke thaat hi shikhana chaiye
ReplyDeleteCan take suggestions fm special educator. Should follow smaveshi shiksha any special child don't feel any type of discrimination in class.
ReplyDeleteआंगनबाड़ी केंद्र में मानसिक एवं शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चों और मंदबुद्धि बच्चों को विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
ReplyDeleteParivaar ki bhoomika mahatvapurn hai.
ReplyDeleteआंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि बालकों का चाहे वह दिव्यांग वालों को यह सामान्य वालों को भलीभांति पूर्वक विकास किया जा सके
ReplyDeleteअक्षर सुधारने के लिए विशेष खेल सामग्री का प्रयोग हो, विशेषज्ञों द्वारा मानसिक स्तर के अनुसार पढ़ाई की सामग्री का उपयोग होl
ReplyDeleteविशेष आवश्यकता वाले बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों की सहायता ली जाए ।
ReplyDeleteBacchon ki sharirik aur mansik gatividhiyon ka sukshm avlokan
ReplyDeleteबच्चे के प्रारंभिक वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि यह वह समय है जब बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, इसलिए अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए
ReplyDeleteBaccho ke anusar vishesgiyo ki salah li jaye
ReplyDeleteशौचालय की व्यवस्था में सुधार की व साफ सफाई की आवश्यकता है
ReplyDeleteआंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि बालकों का चाहे वह दिव्यांग वालों को यह सामान्य वालों को भलीभांति पूर्वक विकास किया जा सके
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