निजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
बच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है।
बच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं।
समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव के कारण आज भी तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं। जिसके कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं होगी
हमारे स्कूल मे पढने वाले बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा अर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है
निजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। बच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं। हमारे स्कूल मे पढने वाले बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा अर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव के कारण आज भी तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं। जिसके कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं होगी
समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव के कारण आज भी तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं। जिसके कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं होगी
निजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
हमारे स्कूल मे पढने वाले बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा अर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
यह बात सही है कि स्कूलो मे पढ़ने वाले कुछ बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा , आर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी आदि होती है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है
Parents migrate to earn livelihood and they also take their child with them for manpower.. sometimes they let them stay at home to care of their brother and sister. They let them work at fields and so on.
बच्चों ,अभिभावकों, को स्कूल के लिए तैयार करने में सबसे बड़ी कठिनाई है। माता पिता का पर्याप्त शिक्षित न होना और शिक्षा के महत्व और उपयोगिता को ठीक से नहीं समझ पाना। निर्धनता के कारण भी माता पिता को रोजगार हेतु बाहर जाना पड़ता है जिस कारण भी वे अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। और वे ठीक प्रकार से भी नहीं समझ पाते हैं कि वे अपने बच्चों में शैक्षिक, संवेदनात्मक, सामाजिक , रचनात्मक विकास किस प्रकार करें। हमें अभिभावकों को जागरूक करने की , अपने बच्चों को शिक्षित करने की उनकेे उचित पोषण और स्वास्थ्य की उनकेे सर्वांगीण विकास की ओर ध्यान देने की समझ विकसित करने का प्रयास करना होगा। राम गोपाल शर्मा प्राथमिक शिक्षक शासकीय प्राथमिक शाला बिलवानी टपरा जनशिक्षा केन्द्र रमपुरा कलां विकास खंड गैरतगंज जिला रायसेन मध्यप्रदेश।
शासकीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार हेतु एक अध्यापक की अपनी कार्य के प्रति ईमानदारी अभिभावकों का बच्चो के पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना शाला का क्रीड़ा युक्त माहोल आदि उल्लेखनीय कार्य किए जा सकते है
तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया ने शिक्षा को भी प्रभावित किया है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को नए तकनीकी और ऑनलाइन शिक्षा के साथ अद्यतित रहना हो रहा है। बच्चों के मातृभाषा और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता अब और भी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि वे नए संरचनात्मक और व्यावसायिक माहौल में प्रवेश कर रहे हैं।
Mata pita siksha ko leke jagruk nhi hai aur unhe sarkari schoolo ke padahi se santushti nhi hai isiliye woh baccho ko nhi bhjete... Dusara bacche kai baar school mei padhai gyi chiz nhi smj paate hai jisse unki ruchi khatm hone lagti hai isiliye woh school chod dete hai
सरकार की योजना के बारे में बताना चाहिए जिससे अभिभावक शिक्षा के महत्व के बारे मे बता सके।आथिर्क रूप से कमजोर अभिभावक को शिक्षा के प्रति जागरूक करना।चाहिए।
बच्चों ,अभिभावकों, को स्कूल के लिए तैयार करने में सबसे बड़ी कठिनाई है। माता पिता का पर्याप्त शिक्षित न होना और शिक्षा के महत्व और उपयोगिता को ठीक से नहीं समझ पाना। निर्धनता के कारण भी माता पिता को रोजगार हेतु बाहर जाना पड़ता है जिस कारण भी वे अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। और वे ठीक प्रकार से भी नहीं समझ पाते हैं कि वे अपने बच्चों में शैक्षिक, संवेदनात्मक, सामाजिक , रचनात्मक विकास किस प्रकार करें। हमें अभिभावकों को जागरूक करने की , अपने बच्चों को शिक्षित करने की उनकेे उचित पोषण और स्वास्थ्य की उनकेे सर्वांगीण विकास की ओर ध्यान देने की समझ विकसित करने का प्रयास करना होगा।
मुझे ऐसा लगता है कि अभिभावकों को तैयार करना ही सबसे बड़ी चुनौती है स्कूल की तैयारी हो जाती है बच्चों की भी तैयारी कम या अधिक हो जाती है अभिभावक अपनी मासी की स्थिति को बदलने के लिए तैयार नहीं होते हैं इसलिए तैयारी का जो आम पड़ाव है वह बाधित हो जाता है जिससे बच्चे की फ्री स्कूलिंग की शिक्षा उतनी बेहतर नहीं हो पाती है जितना होनी चाहिए अभिभावक रुचि नहीं लेता है
बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को स्कूल के लिए तैयार करने में आ रही चुनौतियां निम्न है:- 1 घर और विद्यालय में बच्चे की मातृभाषा में अंतर 2 पिछड़ी हुई पृष्ठभूमि का बालक 3 माता पिता की आर्थिक स्थिति 4 विद्यालय में शिक्षकों की कमी विशेष रूप सभाष के शिक्षकों की कमी।
1. अभिभावकों का शिक्षा को केवल पढ़-लिख लेना तक सिमट लेना। 2. शिक्षा के प्रति अभिभावक का अरुचिकर व्यवहार। 3. बच्चों की शिक्षा के प्रति समुदाय का जागृत न रहना। 4. निजी स्वार्थ हेतु बच्चों को काम पर लगाना। 5. शिक्षा नीति का गलत तरीके से व्याख्या करने के दुष्परिणाम स्वरुप।
एक बात तो यह की जब कभी भी PTM बैठक के लिए अभिभावकों को बुलाया जाता है तो बहुत ही कम संख्या में अभिभावक मीटिंग में आते है जिससे की अनुपस्थित रहे अभिभावकों को अपने बच्चे का स्तर , विद्यालय विकास आदि चीजों के बारे में जानकारी नही मिल पाती है। इसलिए विद्यालय,अभिभावक और बच्चे आपस में जुड़ नही पाते है।
निजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया ने शिक्षा को भी प्रभावित किया है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को नए तकनीकी और ऑनलाइन शिक्षा के साथ अद्यतित रहना हो रहा है। बच्चों के मातृभाषा और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता अब और भी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि वे नए संरचनात्मक और व्यावसायिक माहौल में प्रवेश कर रहे हैं।
बच्चों के लिए चुनौतियाँ:शैक्षणिक दबाव:चुनौती: उच्च शैक्षणिक मानदंडों और प्रतिस्पर्धा का दबाव।समाधान: बच्चों को व्यक्तिगत गति से सीखने का अवसर देना और उनकी रुचियों और क्षमताओं के अनुसार पाठ्यक्रम को अनुकूलित करना।मानसिक स्वास्थ्य:चुनौती: तनाव, चिंता, और डिप्रेशन।समाधान: मानसिक स्वास्थ्य के समर्थन के लिए स्कूल काउंसलिंग सेवाओं का विस्तार करना और बच्चों को योग, ध्यान, और खेल जैसी गतिविधियों में शामिल करना।सामाजिक समायोजन:चुनौती: साथियों के साथ मेलजोल और सामाजिक संबंध बनाना।समाधान: समूह गतिविधियों और टीमवर्क को प्रोत्साहित करना, और विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देना।अभिभावकों के लिए चुनौतियाँ:समय प्रबंधन:चुनौती: बच्चों की शिक्षा के साथ अपने काम और अन्य जिम्मेदारियों का समन्वय करना।समाधान: स्कूल और कार्यस्थल पर लचीले समय का प्रावधान, और परिवारों के लिए सहायक संसाधन और कार्यक्रमों की उपलब्धता।शैक्षणिक समर्थन:चुनौती: बच्चों को घर पर प्रभावी ढंग से सहायता प्रदान करना।समाधान: अभिभावकों के लिए कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना, जिससे वे अपने बच्चों की शैक्षणिक सहायता कर सकें।तकनीकी ज्ञान:चुनौती: डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन प्लेटफार्मों का उपयोग करना।समाधान: डिजिटल साक्षरता के लिए प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना।शिक्षकों के लिए चुनौतियाँ:व्यक्तिगत ध्यान:चुनौती: प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत ध्यान देना।समाधान: कक्षा में छात्रों की संख्या कम करना और सहायक शिक्षकों की नियुक्ति।अपडेटेड रहना:चुनौती: नवीनतम शैक्षणिक प्रथाओं और तकनीकों से अपडेटेड रहना।समाधान: नियमित प्रशिक्षण और पेशेवर विकास के अवसर प्रदान करना।मानसिक और भावनात्मक तनाव:चुनौती: कार्य का दबाव और व्यक्तिगत जीवन के साथ संतुलन।समाधान: मानसिक स्वास्थ्य के लिए समर्थन और परामर्श सेवाएँ प्रदान करना, और कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा देना।इन चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता होती है। स्कूल प्रशासन, सरकार, और समाज को मिलकर काम करना होगा ताकि शिक्षा का वातावरण सभी के लिए अनुकूल और समावेशी बन सके।
पलको का निम्न आय वाला होना जिससे वे बच्चों पर धयान नही दे पाते हैं।रोजगार हेतु पलायन करते रहना।।पलकों का निरक्षर होना।।शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण न मिलनादी।
Bachcho ki adhik sankhya....ashikshit abhibhavak.....Rozgar me vyast abhibavak...shikshak ka kagji karyo me vyast hona.... bahut saare Karan hai...kabhi medicine...kabhi mid day meal .... activities related ministries
Childrens are ready to learn . Guardians are too much busy in their business . And school classrooms are not in proper form to teach . Teachers are always ready to teach.
rozgaar ke drashtigat abhibhavako ka samuchit yogdan na kar paana evum ghar ka parivesh bacche ke anukool na Bana paane se shikshako ko bhi baccho ke samagra vikas hetu kaafi chunotiyon ka saamna karna padta hai.
भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को दूसरे ऑफिस में अन्य कार्यों में संलग्न/असंजित किया जाता है शैक्षिक कार्य से दूर कर दिया जाता है इसमें कोई समाधान अवश्य होना चाहिए
तैयार स्कूल की परिभाषा बच्चों अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के साथ होती है जब तीनों एक साथ मिलकर चलते हैं तभी एक अच्छे स्कूल की कल्पना की जा सकती है ग्रामीण परिवेश में कुछ अभिभावक बच्चों के प्रति उदासीन होते हैं और कुछ शिक्षक भी स्कूल के प्रति और बच्चों के प्रति उदासीन से दिखते हैं इसलिए आज हमारी शिक्षा व्यवस्था में बेपटरी पर है
बच्चों की तैयारी में आ रही सबसे बड़ी बाधा माता-पिता का अशिक्षित होना तथा रोजगार के लिए पलायन करना मजदूरी आदि कार्यों में अधिक से अधिक व्यस्त रहना इस वजह से बच्चों की वह तैयारी नहीं हो पाती जिससे वे एक सक्रिय रूप में प्रीस्कूल आंगनबाड़ी केदो में प्रतिभा कर सकें
Student comes to school for company, mid daymeal,study is there second priority. Parents are not into there child upbringing they just send there child to school..major problem is of understanding the role of guardian
अभिभावक का शिक्षित होना तथा शिक्षक का अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक एवं पूर्णतया तत्पर रहना बच्चों के अध्ययन में सकारात्मक परिवर्तन एवं प्रभाव पड़ता है।
बच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है।
Isme Mata pita ka shiksha ke prati km jagrukta mukhya Karan hai eske alawa sarkar dwara purw prathmikh shiksha ka ushit prabandan nahi karna bhi mukya Karan hai
1. तकनीकी जानकारी का भाव 2.संसाधनों का भाव 3.प्रशिक्षण की कमी 4.जागरूकता की कमी 5.मानक मूल्य की कमी 6.बुनियादी और गैर बुनियादी पाठ्यक्रम में असमानता 7.अध्यापक प्रशिक्षण का जीवन से सहसंबंध न होना
Think about sensory activities and experiences for each sensory organ. Share how these sensory activities are beneficial for the young children in the Anganwadi.
You must have seen children around you in your family or neighbourhood. Think about the developmental characteristics of children and share on how they play, learn and grow?
The three DG for early childhood education are incredible .They really provide child to grow n learn without any kind of pressure
ReplyDeleteAarthik stithi, shiksha ki upyogita ka na jaanna hi agyanta ka karan h
Deleteआर्थिक स्थिति..संवेदना ... भावात्मक कमी व अनुकूल माहौल की कमी शिक्षक ..बच्चे व अभिभावक को प्रभावित करते हैं
DeleteKary ki adhikta
Deleteअभिभावकों में शिक्षा के महत्व की जानकारी का अभाव,समय का अभाव शिक्षकों में शिक्षक होने के दायित्वबोध का अभाव, बच्चों में कुपोषण
Delete1) अभिभावको का सहयोग व समर्थन न मिलना।
Delete2) समुदाय/अभिभावक शिक्षा को गैरउत्पादक समझना।
3) स्कूलों की अभिभावकों से उचित बातचीत न रखना।
आर्थिक स्थिति..संवेदना ... भावात्मक कमी व अनुकूल माहौल की कमी शिक्षक ..बच्चे व अभिभावक को प्रभावित करते हैं।
ReplyDeleteनिजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
ReplyDeleteparivarik prishtbhumi, shiksha k labh k prati anbhigyta,
ReplyDeleteबच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है।
ReplyDeletePalak aur shikshak donon ko hi sanvedanshilta ke sath bacchon ki taiyari karvana chahie
ReplyDeleteबच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं।
ReplyDeleteShikshak Vidyarthi aur Mata pita ke bich abhi bahut adhik duriyan Bani Hui Hain inhen nikat laane ke prayas karna bahut jaruri hai।
ReplyDeleteसमुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव के कारण आज भी तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं। जिसके कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं होगी
ReplyDeleteहमारे स्कूल मे पढने वाले बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा अर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है
ReplyDeleteमाता- पिता का अशिक्षित होना , परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति मुख्य कारण है।
ReplyDeleteबच्चों का बाहरी वातावरण के प्रति भय ,माता पिता का शिक्षित ना होना एवं शिक्षकों में प्रत्येक बच्चे को लेकर आत्मीय संबंध का विकास ना होना
ReplyDeleteनिजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। बच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं।
ReplyDeleteहमारे स्कूल मे पढने वाले बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा अर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव के कारण आज भी तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं। जिसके कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं होगी
समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव के कारण आज भी तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं। जिसके कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं होगी
Deletegood for ECCE in NEP 2020
ReplyDeleteनिजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
DeleteFamily background, ignorance towards education, working parents, poverty, illiteracy are some of the factors that are responsible
ReplyDeleteમાતાપિતાનું શિક્ષણ પ્રત્યે ઓછું ધ્યાન હોવું. આર્થિક પરિસ્થિતિનબળી હોવી, બાળકોમાં બહારના વાતાવરણનો ભય અને વર્ગમાં બાળકોની સંખ્યા વધારે હોવી વગેરે કારણો હોઈ શકે.
ReplyDeleteबच्चो की स्कूल तयारी करने मैं माता पिता महत्वपूर्ण भूमिका हैं आर्थिक सामाजिक स्थिती पर भी निर्भर करता है केवल
ReplyDelete1.माता पिता का शिकक्षित न होना2.रोजगार के लिए दूसरे जगह पलायन करना।3.सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना ।अपने ही समुदाय से उपेक्षित होना।
ReplyDeletetrue
Deletebacche ke school ke taiyari me ghar ke sadasyon ka mahatwapurn bhumika honi chahiye
Deletebacchonke school ke taiyari me mata pita ki mahtawapurn bhumika honi chahiye aur unka
DeleteDue to illiterate patents
ReplyDeleteमाता-पिता की कमजोर आर्थिक स्थिति, जागरूकता का अभाव, अशिक्षित होना तथा शिक्षा के प्रति उदासीनता आदि प्रमुख कारण हैं।
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
Deleteहमारे स्कूल मे पढने वाले बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा अर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
ReplyDeleteParents are not well educated, financial crises, their background
ReplyDeleteare the main problems
आर्थिक स्थिति..संवेदना ... भावात्मक कमी व अनुकूल माहौल की कमी शिक्षक ..बच्चे व अभिभावक को प्रभावित करते हैं।
ReplyDeleteमाता-पिता का शिक्षित होना और रोजगार के लिए परिवारों का पलायन करना बच्चों के स्कूल जाने में सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न करता है
ReplyDeleteयह बात सही है कि स्कूलो मे पढ़ने वाले कुछ बच्चों के अभिभावकों मे अशिक्षा , आर्थिक रूप से कमजोर एवं शिक्षा के महत्व के बारे ज्ञान की कमी आदि होती है जिसके कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता है
ReplyDeleteFamily background, ignorance towards education.
ReplyDeleteमाता- पिता का अशिक्षित होना , परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति मुख्य कारण है। सरकारी स्कूल के प्रति अरुचि।निजी क्षेत्र का घुस पैठ ।
ReplyDeleteFinancial problems ke karan parent apne work me lag jate h bacho ko unke school time me time ni de pate h
ReplyDeleteParents migrate to earn livelihood and they also take their child with them for manpower.. sometimes they let them stay at home to care of their brother and sister. They let them work at fields and so on.
ReplyDeleteपरिवार के सदस्यों का कम पढा लिखा होना व आथिर्क कमजोर होना
ReplyDeleteबच्चों ,अभिभावकों, को स्कूल के लिए तैयार करने में सबसे बड़ी कठिनाई है। माता पिता का पर्याप्त शिक्षित न होना और शिक्षा के महत्व और उपयोगिता को ठीक से नहीं समझ पाना। निर्धनता के कारण भी माता पिता को रोजगार हेतु बाहर जाना पड़ता है जिस कारण भी वे अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। और वे ठीक प्रकार से भी नहीं समझ पाते हैं कि वे अपने बच्चों में शैक्षिक, संवेदनात्मक, सामाजिक , रचनात्मक विकास किस प्रकार करें। हमें अभिभावकों को जागरूक करने की , अपने बच्चों को शिक्षित करने की उनकेे उचित पोषण और स्वास्थ्य की उनकेे सर्वांगीण विकास की ओर ध्यान देने की समझ विकसित करने का प्रयास करना होगा। राम गोपाल शर्मा प्राथमिक शिक्षक शासकीय प्राथमिक शाला बिलवानी टपरा जनशिक्षा केन्द्र रमपुरा कलां विकास खंड गैरतगंज जिला रायसेन मध्यप्रदेश।
ReplyDeleteArthik stithi v shiksha ki upyogita ka pta n hona hi anphdhta ka Karan h
ReplyDeleteFinancial problems, economic conditions, uneducated family
ReplyDeleteThe main reasons are illiteracy of parents and weak economic condition of the family.
ReplyDeleteThe interest and others factors including illiteracy,less sensitivity and responsibilities and fear.
ReplyDeleteमाता- पिता का अशिक्षित होना , परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति मुख्य कारण है।
ReplyDeleteTechnical way is best
ReplyDeleteग्रामीण क्षेत्रो में अभिभाव के पास समय अभाव के कारण वह बच्चे को समय नही दे पाते यह सबसे बड़ी चुनोती है
ReplyDeleteThere is a big problem to ready for school because parents are not think that education is as important as food for servival.
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
Deleteशासकीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार हेतु एक अध्यापक की अपनी कार्य के प्रति ईमानदारी अभिभावकों का बच्चो के पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना शाला का क्रीड़ा युक्त माहोल आदि उल्लेखनीय कार्य किए जा सकते है
ReplyDeleteआर्थिक स्थिति..संवेदना ... भावात्मक कमी व अनुकूल माहौल की कमी शिक्षक ..बच्चे व अभिभावक को प्रभावित करते हैं।
ReplyDeleteKamjor Arthik sthiti Parivar mein Shiksha ka abhav
ReplyDeleteबच्चों का नियमित रूप से विद्यालय न आना तथा मूलभूत सुविधाओं का अभाव होना l
ReplyDeleteआभिवाकों की कमजोर आर्थिक स्थिति ।
ReplyDeleteAbhibhavakon ki arthik samajik isthiti
ReplyDeleteमाता पिता का अशिक्षित होना, परिवार कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होना, रोजगार के लिए पलायन करना, जिससे बच्चे का समुचित विकास नहीं हो पाता है
ReplyDeleteतेजी से बदलती तकनीकी दुनिया ने शिक्षा को भी प्रभावित किया है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को नए तकनीकी और ऑनलाइन शिक्षा के साथ अद्यतित रहना हो रहा है। बच्चों के मातृभाषा और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता अब और भी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि वे नए संरचनात्मक और व्यावसायिक माहौल में प्रवेश कर रहे हैं।
ReplyDeleteग्रामीण क्षेत्रों में आज भी माता पिता का अधिक संख्या में अशिक्षित है जिससे उन्हें अपने बच्चे पर ध्यान नही दे पाते है।
ReplyDeleteअशिक्षा , व शिक्षा के प्रति जागरुकता में कमी व आर्थिक पिछडापन
ReplyDeletePariwar ka education ke prati unaware rahna hai
ReplyDeleteआथिर्क रूप से कमजोर अभिभावक को शिक्षा के प्रति जागरूक करना।चाहिए।सरकार की योजना के मे बताना चाहिए जिससे अभिभावक शिक्षा के महत्व के बारे मे बता सके।
ReplyDeleteMata pita siksha ko leke jagruk nhi hai aur unhe sarkari schoolo ke padahi se santushti nhi hai isiliye woh baccho ko nhi bhjete... Dusara bacche kai baar school mei padhai gyi chiz nhi smj paate hai jisse unki ruchi khatm hone lagti hai isiliye woh school chod dete hai
ReplyDeleteसरकार की योजना के बारे में बताना चाहिए जिससे अभिभावक शिक्षा के महत्व के बारे मे बता सके।आथिर्क रूप से कमजोर अभिभावक को शिक्षा के प्रति जागरूक करना।चाहिए।
ReplyDeleteAbhi bhi Gramin Kshetra Mein माता-पिता ke ashikshit hone ki sankhya Adhik hai ISI Karan bacche ka sankshipt Vishwas bhasha mein nahin Ho Paya
ReplyDeleteबच्चों ,अभिभावकों, को स्कूल के लिए तैयार करने में सबसे बड़ी कठिनाई है। माता पिता का पर्याप्त शिक्षित न होना और शिक्षा के महत्व और उपयोगिता को ठीक से नहीं समझ पाना। निर्धनता के कारण भी माता पिता को रोजगार हेतु बाहर जाना पड़ता है जिस कारण भी वे अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। और वे ठीक प्रकार से भी नहीं समझ पाते हैं कि वे अपने बच्चों में शैक्षिक, संवेदनात्मक, सामाजिक , रचनात्मक विकास किस प्रकार करें। हमें अभिभावकों को जागरूक करने की , अपने बच्चों को शिक्षित करने की उनकेे उचित पोषण और स्वास्थ्य की उनकेे सर्वांगीण विकास की ओर ध्यान देने की समझ विकसित करने का प्रयास करना होगा।
ReplyDeleteमुझे ऐसा लगता है कि अभिभावकों को तैयार करना ही सबसे बड़ी चुनौती है स्कूल की तैयारी हो जाती है बच्चों की भी तैयारी कम या अधिक हो जाती है अभिभावक अपनी मासी की स्थिति को बदलने के लिए तैयार नहीं होते हैं इसलिए तैयारी का जो आम पड़ाव है वह बाधित हो जाता है जिससे बच्चे की फ्री स्कूलिंग की शिक्षा उतनी बेहतर नहीं हो पाती है जितना होनी चाहिए अभिभावक रुचि नहीं लेता है
ReplyDeleteबच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को स्कूल के लिए तैयार करने में आ रही चुनौतियां निम्न है:-
ReplyDelete1 घर और विद्यालय में बच्चे की मातृभाषा में अंतर
2 पिछड़ी हुई पृष्ठभूमि का बालक
3 माता पिता की आर्थिक स्थिति
4 विद्यालय में शिक्षकों की कमी विशेष रूप सभाष के शिक्षकों की कमी।
1. अभिभावकों का शिक्षा को केवल पढ़-लिख
ReplyDeleteलेना तक सिमट लेना।
2. शिक्षा के प्रति अभिभावक का अरुचिकर
व्यवहार।
3. बच्चों की शिक्षा के प्रति समुदाय का जागृत
न रहना।
4. निजी स्वार्थ हेतु बच्चों को काम पर लगाना।
5. शिक्षा नीति का गलत तरीके से व्याख्या करने के दुष्परिणाम स्वरुप।
बच्चों की अनुपस्थिति और शिक्षक पर शिक्षा कार्य के अलावा अन्य कार्य का बोझ
ReplyDeleteएक बात तो यह की जब कभी भी PTM बैठक के लिए अभिभावकों को बुलाया जाता है तो बहुत ही कम संख्या में अभिभावक मीटिंग में आते है जिससे की अनुपस्थित रहे अभिभावकों को अपने बच्चे का स्तर , विद्यालय विकास आदि चीजों के बारे में जानकारी नही मिल पाती है। इसलिए विद्यालय,अभिभावक और बच्चे आपस में जुड़ नही पाते है।
ReplyDeleteनिजी क्षेत्र की शालाएं पूर्व प्राथमिक के कॉन्सेप्त पर ये सारे कार्य विगत 30 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। सरकार का इतनी देर बाद जागना आज 30 वर्षों बाद सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
ReplyDeleteआर्थिक स्थिति..संवेदना ... भावात्मक कमी व अनुकूल माहौल की कमी शिक्षक ..बच्चे व अभिभावक को प्रभावित करते हैं
ReplyDeleteLack of literacy, awareness, communication, workload etc.
ReplyDeleteमाता पिता कि कमजोर आर्थिक स्थिति, उनका अशिक्षित होना, जागरूकता का आभाव ही मुख्य कारण हैं
ReplyDeleteमाता- पिता का अशिक्षित होना , परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति मुख्य कारण है।
ReplyDeleteतेजी से बदलती तकनीकी दुनिया ने शिक्षा को भी प्रभावित किया है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को नए तकनीकी और ऑनलाइन शिक्षा के साथ अद्यतित रहना हो रहा है। बच्चों के मातृभाषा और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता अब और भी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि वे नए संरचनात्मक और व्यावसायिक माहौल में प्रवेश कर रहे हैं।
DeleteIlliteracy of parents,not gud atmosphere,bad infrastructure
ReplyDeleteमाता-पिता की कमजोर आर्थिक स्थिति, जागरूकता का अभाव, अशिक्षित होना तथा शिक्षा के प्रति उदासीनता आदि प्रमुख कारण हैं।
ReplyDeleteThe three DG for early childhood education are incredible .They really provide child to grow n learn without any kind of pressure
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Deleteઆર્થિક સ્થિતિ વાતાવરણ
ReplyDeleteશાળા તત્પરતા માટે વાલી ની ભાગીદારી ખૂબ જ મહત્વની સાબિત થાય છે. શાળા વાલી અને સમાજના સહિયારા પ્રયાસથી જ સફળ શાળા શિક્ષણની શરૂઆત થાય છે.
ReplyDeleteबच्चों के लिए चुनौतियाँ:शैक्षणिक दबाव:चुनौती: उच्च शैक्षणिक मानदंडों और प्रतिस्पर्धा का दबाव।समाधान: बच्चों को व्यक्तिगत गति से सीखने का अवसर देना और उनकी रुचियों और क्षमताओं के अनुसार पाठ्यक्रम को अनुकूलित करना।मानसिक स्वास्थ्य:चुनौती: तनाव, चिंता, और डिप्रेशन।समाधान: मानसिक स्वास्थ्य के समर्थन के लिए स्कूल काउंसलिंग सेवाओं का विस्तार करना और बच्चों को योग, ध्यान, और खेल जैसी गतिविधियों में शामिल करना।सामाजिक समायोजन:चुनौती: साथियों के साथ मेलजोल और सामाजिक संबंध बनाना।समाधान: समूह गतिविधियों और टीमवर्क को प्रोत्साहित करना, और विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देना।अभिभावकों के लिए चुनौतियाँ:समय प्रबंधन:चुनौती: बच्चों की शिक्षा के साथ अपने काम और अन्य जिम्मेदारियों का समन्वय करना।समाधान: स्कूल और कार्यस्थल पर लचीले समय का प्रावधान, और परिवारों के लिए सहायक संसाधन और कार्यक्रमों की उपलब्धता।शैक्षणिक समर्थन:चुनौती: बच्चों को घर पर प्रभावी ढंग से सहायता प्रदान करना।समाधान: अभिभावकों के लिए कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना, जिससे वे अपने बच्चों की शैक्षणिक सहायता कर सकें।तकनीकी ज्ञान:चुनौती: डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन प्लेटफार्मों का उपयोग करना।समाधान: डिजिटल साक्षरता के लिए प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना।शिक्षकों के लिए चुनौतियाँ:व्यक्तिगत ध्यान:चुनौती: प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत ध्यान देना।समाधान: कक्षा में छात्रों की संख्या कम करना और सहायक शिक्षकों की नियुक्ति।अपडेटेड रहना:चुनौती: नवीनतम शैक्षणिक प्रथाओं और तकनीकों से अपडेटेड रहना।समाधान: नियमित प्रशिक्षण और पेशेवर विकास के अवसर प्रदान करना।मानसिक और भावनात्मक तनाव:चुनौती: कार्य का दबाव और व्यक्तिगत जीवन के साथ संतुलन।समाधान: मानसिक स्वास्थ्य के लिए समर्थन और परामर्श सेवाएँ प्रदान करना, और कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा देना।इन चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता होती है। स्कूल प्रशासन, सरकार, और समाज को मिलकर काम करना होगा ताकि शिक्षा का वातावरण सभी के लिए अनुकूल और समावेशी बन सके।
ReplyDeleteआर्थिक स्थिति, जागरूकता का अभाव, अशिक्षित होना तथा शिक्षा के प्रति उदासीनता आदि प्रमुख कारण हैं।
ReplyDeleteTeacher , parents dono ko milker bachche ki tayyari karana chahiye par parents rojgar ke chalte bachchon par dhyan nahi dete
ReplyDeleteAshikshit tha arthik roop se kamjor avibhavak
ReplyDeleteपलको का निम्न आय वाला होना जिससे वे बच्चों पर धयान नही दे पाते हैं।रोजगार हेतु पलायन करते रहना।।पलकों का निरक्षर होना।।शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण न मिलनादी।
ReplyDeleteमाता-पिता की आर्थिक स्थिति
ReplyDeleteSchoolon mein माता-पिता ka shikshit hona AVN garibi ka mukhya Karan hai
ReplyDeleteBachcho ki adhik sankhya....ashikshit abhibhavak.....Rozgar me vyast abhibavak...shikshak ka kagji karyo me vyast hona.... bahut saare Karan hai...kabhi medicine...kabhi mid day meal .... activities related ministries
ReplyDeleteChildrens are ready to learn . Guardians are too much busy in their business . And school classrooms are not in proper form to teach . Teachers are always ready to teach.
ReplyDeleterozgaar ke drashtigat abhibhavako ka samuchit yogdan na kar paana evum ghar ka parivesh bacche ke anukool na Bana paane se shikshako ko bhi baccho ke samagra vikas hetu kaafi chunotiyon ka saamna karna padta hai.
ReplyDeleteभ्रष्ट अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को दूसरे ऑफिस में अन्य कार्यों में संलग्न/असंजित किया जाता है शैक्षिक कार्य से दूर कर दिया जाता है इसमें कोई समाधान अवश्य होना चाहिए
ReplyDeleteबच्चो की स्कूल के लिए तैयार करने में माता पिता महत्वपूर्ण भूमिका हैं आर्थिक सामाजिक स्थिती पर भी निर्भर करता है
ReplyDeleteAbhibhavakon Ka asicit Hona aur Arthik Roop se kamjor Hona Shiksha Ka mahatva Na samajhna
ReplyDeleteBacchon ko school ke liye taiyar karne ke liye man Baap Ki Sabse Badi chunauti Unka nishchit vyavsay na hona
ReplyDeleteआज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है। माता पिता बच्चों को घरेलू काम में लगा लेते हैं।
ReplyDeleteमाता-पिता का अशिक्षित होना और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होना मुख्य कारण है
ReplyDeleteAbhibhavakon ka jagruk na hona bacchon ki parivarik sthiti aur shikshakon se judaav na hona iska mukhya Karan hai
ReplyDeleteतैयार स्कूल की परिभाषा बच्चों अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के साथ होती है जब तीनों एक साथ मिलकर चलते हैं तभी एक अच्छे स्कूल की कल्पना की जा सकती है ग्रामीण परिवेश में कुछ अभिभावक बच्चों के प्रति उदासीन होते हैं और कुछ शिक्षक भी स्कूल के प्रति और बच्चों के प्रति उदासीन से दिखते हैं इसलिए आज हमारी शिक्षा व्यवस्था में बेपटरी पर है
ReplyDeleteWhere should be emotional born between the teacher and the student
ReplyDeleteबच्चे एवं अभिभावक जागरूकता की कमी, आर्थिक तंगी, संस्कारों की कमी,
ReplyDeleteबच्चों की तैयारी में आ रही सबसे बड़ी बाधा माता-पिता का अशिक्षित होना तथा रोजगार के लिए पलायन करना मजदूरी आदि कार्यों में अधिक से अधिक व्यस्त रहना इस वजह से बच्चों की वह तैयारी नहीं हो पाती जिससे वे एक सक्रिय रूप में प्रीस्कूल आंगनबाड़ी केदो में प्रतिभा कर सकें
ReplyDeleteअभिभावक का जागरूक न होना
ReplyDeleteखेल आधारित गतिविधियों का अभिभावकों द्वारा समावेश न किया जाना
बच्चों का बाहरी वातावरण के प्रति भय ,माता पिता का शिक्षित ना होना एवं शिक्षकों में प्रत्येक बच्चे को लेकर आत्मीय संबंध का विकास ना होना
ReplyDeleteStudent comes to school for company, mid daymeal,study is there second priority. Parents are not into there child upbringing they just send there child to school..major problem is of understanding the role of guardian
ReplyDeleteअभिभावक का शिक्षित होना तथा शिक्षक का अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक एवं पूर्णतया तत्पर रहना बच्चों के अध्ययन में सकारात्मक परिवर्तन एवं प्रभाव पड़ता है।
ReplyDeleteमाता- पिता का अशिक्षित होना , परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति मुख्य कारण है |
ReplyDeleteParents ki aarthik isthiti kharab hone ke karan
ReplyDeleteNegligence of parents towards education in rural area is a big issue
ReplyDeleteAbhibhavakon ko bachcho ko ghar par bhi gatividhi karani hogi.
ReplyDeleteParents financial condition is one of the major problem
ReplyDeleteमाता- पिता का अशिक्षित होना , परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति मुख्य कारण है।
ReplyDeleteमाता-पिता का अशिक्षित होना परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति मुख्य कारण
ReplyDeleteबच्चो को स्कूल के लिए तेय्यार करने मे सबसे बड़ी चुनोती,,,, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना है। तब बच्चो के शरीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान ही नही दिया जाता हे। समुदाय का उपेक्षा पूर्ण बर्ताव, तथा आज भी सरकारी योजनाओ का लाभ दुरस्थ स्थानो की पहुँच मे नही है।
ReplyDeleteIsme Mata pita ka shiksha ke prati km jagrukta mukhya Karan hai eske alawa sarkar dwara purw prathmikh shiksha ka ushit prabandan nahi karna bhi mukya Karan hai
ReplyDeleteअभिभावक द्वारा बच्चे को समय पर तैयार करना, नियमित भेजना और पढ़ाई के महत्त्व को समझना आदि कई चुनौतियां हैं.
ReplyDeleteFamily background, ignorance towards education, working parents, poverty, illiteracy , lack of knowledge are some of the factors that are responsible
ReplyDelete1. माता पिता का अशिक्षित होना।
ReplyDelete2 . भावनात्मक समर्थन की कमी।
3. लगातार विद्यालय से अनुपस्थिति
4. आंगनवाडी शिक्षा का खराब बुनियादी स्तर
1. तकनीकी जानकारी का भाव
ReplyDelete2.संसाधनों का भाव
3.प्रशिक्षण की कमी
4.जागरूकता की कमी
5.मानक मूल्य की कमी
6.बुनियादी और गैर बुनियादी पाठ्यक्रम में असमानता
7.अध्यापक प्रशिक्षण का जीवन से सहसंबंध न होना
1.अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद की कमी।
ReplyDelete2.बच्चों के सामाजिक व्यवहार में सुधार लाने में दिक्कत।
3. तकनीकी जानकारी का अभाव।
बच्चों, अभिभावकों, और शिक्षकों के लिए स्कूल की तैयारी में भावनात्मक, शैक्षिक, और सामाजिक समायोजन की चुनौतियाँ मुख्य होती हैं।
ReplyDeleteमाता पिता का अशिक्षित होना, परिवार की आर्थिक स्थिति, माता पिता का रोजगार के लिए पलायन करना।
ReplyDeleteमाता-पिता की कमजोर आर्थिक स्थिति, जागरूकता का अभाव, अशिक्षित होना तथा शिक्षा के प्रति उदासीनता आदि प्रमुख कारण हैं।
ReplyDeleteअभिभावकों में शिक्षा के प्रति उदासीनता व असहयोग
ReplyDeleteAarthik isthiti aur jagrukata ka abhaav
ReplyDeleteअभिभावक कि अशिक्षित होना, जागरूकता की कमी होना
ReplyDeleteआर्थिक स्थिति..संवेदना ... भावात्मक कमी व अनुकूल माहौल की कमी शिक्षक ..बच्चे व अभिभावक को प्रभावित करते हैं
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