कोर्स 05 : गतिविधि 2 : विचार करें
हमारी शिक्षा व्यवस्था में ऐसी क्या कमी है कि बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाई के संकट का सामना करना पड़ रहा है? इसमें सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? अपने विचारों को साझा करें।
हमारी शिक्षा व्यवस्था में ऐसी क्या कमी है कि बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाई के संकट का सामना करना पड़ रहा है? इसमें सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? अपने विचारों को साझा करें।
बच्चों को शिक्षा देने के पूर्व शिक्षक और पलकों को तैयार करने की आवश्यकता है
ReplyDeleteहमारी शिक्षा व्यवस्था में ऐसी क्या कमी है कि बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाई के संकट का सामना करना पड़ रहा है? इसमें सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? अपने विचारों को साझा करें।
Deleteप्रमुख कारण है अभिभावकों का जागरूक न होना, अध्यापक के साथ अपितु माता पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
Deleteबच्चों को शिक्षा देने के पूर्व शिक्षक और पालकों को तैयार करने की आवश्यकता है
Deleteविद्यार्थी,शिक्षक और पाठ्यक्रम ये तीन मुख्य धुरी।विद्यार्थी पाठ्यक्रम पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है शिक्षक पर अपेक्षाकृत कम।ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं की नितांत कमी है।जिससे शिक्षण प्रभावित हो रहा है।
Deleteवर्तमान में टीचर के पास टीचिंग के अतिरिक्त अनेक कार्य है। जिनमें से बहुत से कार्य उन्हें स्कूल समय में ही करने होते है।इससे अध्यापक का टाइम एवं ऊर्जा दोनो खराब होता है और बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है।
ReplyDeleteBhut se bache vidhyaly aate hi nhi h unki aniymitta bhi bhut bada karan h aur baki koi fail hoga ni is karan bache padhai pr km dhyan dene lage h k pass toh ho hi jayenge
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DeleteAdhayapak se shikshan ke alava dusare school ke kam school timing me na ho isase adhyapak baccho ke liye jyada samay
Deleteपाठशालामे अध्यापकों को शिक्षा के अलावा और बहुत सारे बाहरी कार्यों में जोड़ा जाता है,जिसका सीधा असर बच्चोकी पढ़ाई पर होता है।
DeletePlz don't give other duties like BLO & census etc to teachers for better results
Deletemore focuse on pedagogy of ECCE with teachers with practical examples .
ReplyDelete१)हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित का अभाव
ReplyDelete२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का अनुश्रवण न होना
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का अपनी दक्षता अनुरूप कार
तो नकरना
५) समाज में आंगनवाड़ी और प्राथमिक शिक्षक की योग
मत के अंतर में प्रचार प
रसदार न होना
प्रारंभिक स्तर की पढाई को सरल बना बच्चों को उनकी भाषा में सिखाते हुए उनके शारीरिक व् मानसिक पोषण का ध्यान रखना चाहिए तथा यथा संभव ध्यान रखना चाहिए।
ReplyDelete१)हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित का अभाव
२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का अनुश्रवण न होना
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का अपनी दक्षता अनुरूप कार
तो नकरना
५) समाज में आंगनवाड़ी और प्राथमिक शिक्षक की योग
मत के अंतर में प्रचार प
रसदार न होना
प्रारंभिक स्तर की पढाई को सरल बना बच्चों को उनकी भाषा में सिखाते हुए उनके शारीरिक व् मानसिक पोषण का ध्यान रखना चाहिए तथा यथा संभव ध्यान रखना चाहिए।
ReplyDelete१)हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित का अभाव
२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का अनुश्रवण न होना
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का अपनी दक्षता अनुरूप कार
तो नकरना
५) समाज में आंगनवाड़ी और प्राथमिक शिक्षक की योग
मत के अंतर में प्रचार प
रसदार न होना
शिक्षक को शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई कार्य न करवाएँ ।उसे विभिन्न प्रकार की गतिविधि करवाने के लिए पूर्ण रूप समय दिया जाए। दूरस्थ ढाणियां में कक्षा 1से 3 तक की शिक्षा की व्यवस्था उनकी ढाणियों के पास ही की जाए। 1 किलोमीटर से अधिक की दूरी होने पर 5 साल का बालक स्वप्रेरणा से विद्यालय नहीं आता है । ढाणियों में जहाँ पर कोई सुविधा उपलब्ध नहीं, वहां 20 बालकों पर एक अध्यापक लगाकर उनको कक्षा 1से 3 तक की शिक्षा वहीं दी जाए। ऐसे दूरस्थ ढाणियों में सेवा देने के इच्छुक शिक्षकों को अतिरिक्त भत्ता दिया जाए। 3साल के बाद बच्चा काफ़ी कुछ सीख चुका होगा ।समझ भी बढ जाती है । और पैदल विद्यालय आने में सक्षम भी हो जाता है ।
Right ji
DeleteTeachers are elngaged in
ReplyDeletenon teaching activities like blo,mdm,dbtetc.this is responsible for frustration in teachers and causes lots of time and energy. Teachers should be allowed to teach in their own way. More teachers should be appointed
Practical based education could help the children in learning more than just theoretical concepts .
ReplyDeleteप्री प्राइमरी स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को शिक्षा का प्रावधान जो नई शिक्षा नीति के अंतर्गत किया गया है उसकी आवश्यकता वहुत साल पहले से ही थी जबसे प्राइवेट स्कूलो में किंडरगार्टन व्यवस्था शुरू की गई थी। पर अब इन कक्षाओं में बच्चों को पढ़ने के लिए उपयुक्त सामग्री की भी उतनी ही आवश्यकता है। बच्चों को लिखने के अभ्यास के लिए डॉटेड हिंदी व अंग्रेजी की वर्णमाला और गिनती की कार्यपुस्तिकाएँ भी निशुल्क दी जाए।
ReplyDeleteThere are lots of students in a class. The teacher can not pay attention to each child due to extra works and tasks. In short there is a little time to have with children.
ReplyDeleteશિક્ષકો ને શિક્ષણ સિવાય અન્ય કામગીરી ન સોંપવી. જેથી તે શૈક્ષણિક કાર્ય સારી રીતે કરી શકે અને શિક્ષણનું સ્તર ઉંચુ આવે.
ReplyDeleteवर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में अतिप्रयोगवादिता से बचने की ज़रूरत है
ReplyDeleteवर्तमान समय की शिक्षण व्यवस्था शिक्षकों पर थोपी जा रहीहैं शिक्षक एक कार्य करता पूरा है ।तो दूसरा आदेश।सरकार द्वारा भेज दिया जाता हैं ऐसा लगता हैं शिक्षक नहीं प्रयोग शाला बनकर रह गएहैं।
ReplyDeletetrue
Delete
Deleteअभिभावकों का अपेक्षित सहयोग न मिलना एक बहुत बड़ी समस्या है
शिक्षक शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य न करवाया।
Teachers are elngaged in
ReplyDeletenon teaching activities like blo,mdm,dbtetc.this is responsible for frustration in teachers and causes lots of time and energy. Teachers should be allowed to teach in their own way.
शिक्षक शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य न करवाया।
ReplyDeleteअभिभावकों का अपेक्षित सहयोग न मिलना एक बहुत बड़ी समस्या है
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ReplyDeleteParents low cooperation
ReplyDeleteTeachers are engaged in non teaching activities like blo, mdm, etc. This is responsible for frustration in teachers and causes lots of time and energy. Teachers should be allowed to teach in their own way and should not be burdened with work that have nothing to do with children education. This will allow teachers to use their all time and energy in teaching students.
ReplyDelete1:बालवाटिका को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बालवाटिका के बच्चों का भी रजिस्ट्रेशन डी बी टी पर करवाकर 1200 की धनराशि उपलब्ध करवायें ताकि अभिभावक बालवाटिका में रूचि ले
ReplyDelete2: कक्षा 1-5 की तरह ही प्री प्राइमरी-1,2,3 का संचालन स्कूल से संबद्ध करके आँगनवाड़ी कार्यकत्री का भी सहयोग लिया जायें क्योकि हर विद्यालय पर आँगनवाड़ी केन्द्र नहीं हैं
शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ी कमी है कि हमारे शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की बजाय अन्य कार्य में व्यस्त रहते हैं इसके अतिरिक्त कुछ शिक्षक शौंक के कारण स्कूल आते हैं उन्हें बच्चों की मूलभूत आवश्यकता से कोई लेना-देना नहीं। वे बच्चों को समझना ही नहीं चाहते ।
ReplyDeleteवर्तमान समय की शिक्षण व्यवस्था शिक्षकों पर थोपी जा रहीहैं शिक्षक एक कार्य करता पूरा है ।तो दूसरा आदेश।सरकार द्वारा भेज दिया जाता हैं ऐसा लगता हैं शिक्षक नहीं प्रयोग शाला बनकर रह गए हैं।
ReplyDeleteहमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित का अभाव
ReplyDelete२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का अनुश्रवण न होना
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का अपनी दक्षता अनुरूप कार
तो नकरना
५) समाज में आंगनवाड़ी और प्राथमिक शिक्षक की योग
मत के अंतर में प्रचार प
रसदार न होना
Practical based education could help the children in learning more than just theoretical concepts
ReplyDeleteशिक्षकों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपने की वजह सिर्फ बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास में ही लगाया जाए तो गुणवत्ता परिणाम स्वरूप प्राप्त होगी,,!
ReplyDeleteसमाज का जागरूक होना बहुत आवश्यक है जब तक समाज जागरूक नहीं होगा तब तक एक अच्छे समाज का सपना नहीं देखा जा सकता अभिभावक को भी अपने बच्चे का ध्यान देना चाहिए एक बच्चे को अच्छा नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षक के साथ-साथ उसके अभिभावक का भी होता है ।
ReplyDeleteExtra work other than teaching has to be done by teachers.
ReplyDeleteवर्तमान में टीचर के पास टीचिंग के अतिरिक्त अनेक कार्य है। जिनमें से बहुत से कार्य उन्हें स्कूल समय में ही करने होते है।इससे अध्यापक का टाइम एवं ऊर्जा दोनो खराब होता है और बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है।समाज का जागरूक होना बहुत आवश्यक है जब तक समाज जागरूक नहीं होगा तब तक एक अच्छे समाज का सपना नहीं देखा जा सकता अभिभावक को भी अपने बच्चे का ध्यान देना चाहिए एक बच्चे को अच्छा नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षक के साथ-साथ उसके अभिभावक का भी होता है ।
ReplyDeleteप्रारंभिक स्तर की पढाई को सरल बना बच्चों को उनकी भाषा में सिखाते हुए उनके शारीरिक व् मानसिक पोषण का ध्यान रखना चाहिए तथा यथा संभव ध्यान रखना चाहिए।
ReplyDelete१)हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित करना होगा
२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का प्रयोग न होना।
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का आपसी तालमेल का अभाव।
शिक्षक को शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई कार्य न करवाएँ ।
वैसे तो सभी विद्यालय और सीबीएसई मिलकर के कार्यरत हैं लेकिन फिर भी हमें बहुत से सुधार करने की आवश्यकता है जब तक हम अभिभावकों को साथ नहीं लेंगे ,हम पूर्ण रूप से अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। हमें अभिभावकों को भी साथ लेना चाहिए ।अभिभावकों को महीने में एक बार अथवा सप्ताह में एक बार आमंत्रित करके विद्यार्थियों के सामने उनके विचार और अनुभव प्रकट करने के लिए कहेंगे तो शायद जो हमारी परेशानियों है वह काफी हद तक दूर हो सकते हैं ।
ReplyDeleteAbhibhavk v shikshko ko milkar bachho k sarvangin vikas m bhagidar bnna hoga
ReplyDeleteTeachers and teachers need to be prepared before teaching children
ReplyDeleteThere is a wide gap in the present situation on learning outcomes and the desired learning outcomes.This can be leveled with the ECCE, sound foundational stage,better trained teachers and with better evaluation system.
ReplyDeleteवर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में अतिप्रयोगवादिता से बचने की ज़रूरत है
ReplyDeletePractical based education could help the children in learning more than just theoretical concepts
ReplyDeleteएक टीचर को टीचर ही बना रहने दे तो शिक्षा में काफी सुधार हो सकता है ।कई बार तो पूरा दिन में एक बार भी बच्चों को टीचर नहीं मिल पाता यह काम कर लू 2 मिनट रुको ।वह काम कर लो 2 मिनट रुको ।ऐसे ही पूरा दिन निकल जाता है।
ReplyDeleteएक शिक्षक के पास शिक्षण के अलावा और भी महत्वपूर्ण कार्य शासन के द्वारा समय समय पर करवाया जाता है जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है साथ ही अभिभावकों एवम शाला प्रबंधन समिति को शिक्षण कार्य की समय समय पर निगरानी ,नियमित रूप से मॉनिटरिंग करना आदि
ReplyDeleteParents ko involve Krna chahiye
ReplyDelete1 शिक्षक को गैर शैक्षणिक कार्यो में लगाने से शिक्षक की कार्य कुशलता में कमी आती है
ReplyDelete2 विद्यार्थी की अनियमितता उसके पिछड़ने का प्रमुख कारण है
3 सामजिक परिवेश का विद्यालय जुड़ाव न होने के कारण विद्यार्थी पिछड़ रहे है
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ReplyDeleteगैर शैक्षणिक कार्य की अधिकता व अभिभावकों का आर्थिक रूप से सक्षम न होने कारण वे अपने बच्चों की तरह ज्यादा ध्यान नहीं दें पाते है।
ReplyDeleteShikshakon se Gair shaikshnik karya nahin karvaya jaaye
ReplyDeleteप्रारंभिक स्तर की पढाई को सरल बना बच्चों को उनकी भाषा में सिखाते हुए उनके शारीरिक व् मानसिक पोषण का ध्यान रखना चाहिए तथा यथा संभव ध्यान रखना चाहिए।
Delete१)हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित का अभाव
२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का अनुश्रवण न होना
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का अपनी दक्षता अनुरूप कार
तो नकरना
५) समाज में आंगनवाड़ी और प्राथमिक शिक्षक की योग
मत के अंतर में प्रचार प
रसदार न होना
शिक्षक को शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई कार्य न करवाएँ ।उसे विभिन्न प्रकार की गतिविधि करवाने के लिए पूर्ण रूप समय दिया जाए। दूरस्थ ढाणियां में कक्षा 1से 3 तक की शिक्षा की व्यवस्था उनकी ढाणियों के पास ही की जाए। 1 किलोमीटर से अधिक की दूरी होने पर 5 साल का बालक स्वप्रेरणा से विद्यालय नहीं आता है । ढाणियों में जहाँ पर कोई सुविधा उपलब्ध नहीं, वहां 20 बालकों पर एक अध्यापक लगाकर उनको कक्षा 1से 3 तक की शिक्षा वहीं दी जाए। ऐसे दूरस्थ ढाणियों में सेवा देने के इच्छुक शिक्षकों को अतिरिक्त भत्ता दिया जाए। 3साल के बाद बच्चा काफ़ी कुछ सीख चुका होगा ।समझ भी बढ जाती है । और पैदल विद्यालय आने में सक्षम भी हो जाता है ।
विधार्थियों की अनियमितता ही सबसे बड़ा कारण है.. इसके लिए विधार्थियों के अभिभावकों की जागरुकता आवश्यक है
ReplyDeleteविद्यार्थियों की अनियमितता ही सबसे बड़ा कारण है इसलिए अभिभावकों को जागरूक करना चाहिए ताकि वह अपने बच्चों पर ध्यान दे सके
ReplyDeleteसमाज और समुदाय को जागरूक करना तथा बच्चों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना l
ReplyDeleteप्रारंभिक स्तर की पढाई को सरल बना बच्चों को उनकी भाषा में सिखाते हुए उनके शारीरिक व् मानसिक पोषण का ध्यान रखना चाहिए तथा यथा संभव ध्यान रखना चाहिए।
ReplyDelete१)हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित करना होगा
२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का प्रयोग न होना।
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का आपसी तालमेल का अभाव।
शिक्षा के महत्व को वंचित समुदाय तक पहुंचाकर
ReplyDeleteसमुदाय को शिक्षा के प्रति जागरूक करना जरूरी हैं।
ReplyDeleteSuvidhaon ka abhav tatha anya work
ReplyDeleteकुछ क्षेत्रों में अभी भी समुदाय शिक्षा के प्रति कम जागरूक है जिससे वो बच्चो को नियमित स्कूल नही भेजते है।
ReplyDeleteशिक्षा व्यवस्था में कई स्थानों पर शिक्षकों की कमी, बजट सीमितता, और विभिन्न क्षेत्रों में तंत्रज्ञान की अद्यतितता की कमी हो सकती है। इसे सुधारने के लिए शिक्षा विभागों को अधिक बजट आवंटित करना, शिक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करना, और तंत्रज्ञान को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।
ReplyDelete" जहां चाह वहां राह "
ReplyDeleteशिक्षण कार्य या शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई भी कार्य हो वहां अपना 100% योगदान पूर्ण मनोयोग से देना चाहिए
हमारी शिक्षा व्यवस्था जीवन जीने की कला नही सिखाती बस किताबो के पढ़ने तक सीमित है।
ReplyDeleteGround level PR work ho na ki papers m or show off hi kre
ReplyDeleteTeacher ko teaching PR hi focus krne de na ki other work m like office and many school work
अभिभावको को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। शिक्षको़ को नियमित प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो में नहीं अथवा कम से कम लगाया जाना चाहिए।
ReplyDeleteशिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में कम लगाया जाना चाहिए, शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण किया जाना चाहिए।
ReplyDeleteShikshakon ke karyon Ka mulyankan Hona chahie number do shikshakon ko Shikshan ki atirikt dusra kam na liya Jaaye
ReplyDeleteWe need to prepare student for early learning.
ReplyDeleteNot getting expected support from parents is a big problem
ReplyDeleteSbse badi dikkat past mei ki gayi galtiya hai.. Phle teachers ne sarkari schoolo mei padhai pr dhyan nhi diya.. Jisse sarkari schoolo ka status gir gya.. Ab parents ko school pr bharosa nhi hai woh baccho ko ase school mei padhana chahte hai.. Dusara gav ke bacche ek. Aisi jagh se aate hai jaha woh kuch nhi jnte.. Unhe kuch naya sikhane mei. Aksar teachers asafal ho jaate hai.. Aur dheere dheere unki ruchi khatm ho jaati hai
ReplyDeleteशिक्षकों को पढ़ाने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं देना चाहिए ।
ReplyDeleteवर्तमान में टीचर के पास टीचिंग के अतिरिक्त अनेक कार्य है। जिनमें से बहुत से कार्य उन्हें स्कूल समय में ही करने होते है।इससे अध्यापक का टाइम एवं ऊर्जा दोनो खराब होता है और बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है।समाज का जागरूक होना बहुत आवश्यक है जब तक समाज जागरूक नहीं होगा तब तक एक अच्छे समाज का सपना नहीं देखा जा सकता अभिभावक को भी अपने बच्चे का ध्यान देना चाहिए एक बच्चे को अच्छा नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षक के साथ-साथ उसके अभिभावक का भी होता है ।
ReplyDeleteHame bachho ke prati hamesha jagruk honi chahiye...
ReplyDeleteहमारी शिक्षा व्यवस्था पाठ्यक्रम आधारित है जबकि इस बच्चों के कौशल ज्ञान और इंटरेस्ट से जोड़कर देखना चाहिए स्कूली शिक्षा शुरू करने से पहले की जो तैयारी होती है वही सबसे महत्वपूर्ण होती है जितनी अच्छी है तैयारी होगी बच्चों का जीवन में शिक्षा से लेकर के समग्र विकास तक उतनी ही आसानी और कौशल बढ़ेगा
ReplyDeleteभारत मे पूर्व विद्यालय शिक्षा जो कि आंगनबाड़ी में दी जाती है वह केवल नाममात्र की शिक्षा है उसमें केवल खानापूर्ति होती है बच्चो के सीखने के लिए उसमे कुछ भी नही है।
ReplyDeleteसुझाव:- पूर्व विद्यालय शिक्षा में योग्य व अनुभवी शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग के द्वारा की जानी चाहिए।
भारत में शिक्षा को सुगम एवं तुला बनाने के लिए बच्चों को शिक्षा के प्रति खेल के माध्यम से आकर्षक बनाना होगा तथा अभिभावकों को स्कूल के प्रति जागरूक होकर सहयोग की भावना से जुड़ना होगा तभी बच्चे नियमित विद्यालय तक पहुंच सकते हैं आज की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि बच्चे परीक्षा कब है ना होने के कारण अनियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं आता बच्चन की नियमित उपस्थिति उन्हें शिक्षा प्रदान करने में बहुत मदद करती है
ReplyDeleteबच्चों में यह बात घर कर गई है कि स्कूल नियमित जायें या ना जायें अगली वर्ष अगली कक्षा जरुर पहुंच जायेंगे। इस विचार को बदलना आवश्यक है, अन्यथा बच्चें स्कूल से दूर होते जा सकते हैं। पालकों को जिम्मेदारी देना आवश्यक है कि उनका बच्चा नियमित रुप से स्कूल आए एवं कुछ सीखकर जाएं।
ReplyDeleteLack of literary and money.
ReplyDeleteवर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में अतिप्रयोगवादिता से बचने की ज़रूरत है शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में कम लगाया जाना चाहिए, शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण किया जाना चाहिए।
ReplyDeleteहरे कृष्ण हरे मुरारी,
ReplyDeleteजय नाथ नारायण वासुदेवाय।
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शिक्षा के क्षेत्र में बच्चे कमजोर रह रहे है इसका एक कारण यह हो सकता है कि शिक्षको को गैर शैक्षणिक कार्यों me लगाया जाता हैं जिससे की वो समय बच्चो की शिक्षा में कम हो जाता है जिससे बच्चो की पढ़ाई का नुकसान होता है।
ReplyDeleteIn nep 2020 stress is given on activity based learning. Before that only rote learning is there
ReplyDelete1. शिक्षा के प्रति गरीब तबके के लोगों की निरसता।
ReplyDelete2. अत्यंत गरीबी की वजह से घर का खर्च चलाने हेतु काम करना
इसमें सुधार हेतु बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकोंको शिक्षण का महत्व समझाना चाहिए। तथा बच्चों को विद्यालय कीओर आकर्षित नकारने के लिए विसिद्ध क्रियाकलापों आहित खाने की चीजें भी मिलनी चाहिए ।
Vartman samay mein shikshan vyavastha shikshakon per thuki ja rahi hai shikshak ek karykarta hai to dusra aadesh Sarkar dwara bhej diya jata hai Aisa lagta hai shikshak nahin prayogshala ban Gaye Hain tatha abhibhavakon se apekshit Sahyog n Milana ek bahut badi samasya hai shikshak ko shikhan karya ke atirikt koi aur karya Na karvaya jaaye
ReplyDeleteशिक्षक को केवल शिक्षण कार्य ही करने दें तथा अभिभावकों का भी सहयोग हो तो शिक्षण व्यवस्था में काफी सुधार लाया जा सकता है.
ReplyDeleteJagrookta ki kami
ReplyDeleteशिक्षक कोई शिक्षण कार्य ही करने देना चाहिए. अन्य भार उन पर नहीं डालना चाहिए
ReplyDeleteप्रारंभिक स्तर की पढाई को सरल बना बच्चों को उनकी भाषा में सिखाते हुए उनके शारीरिक व् मानसिक पोषण का ध्यान रखना चाहिए तथा यथा संभव ध्यान रखना चाहिए।
ReplyDelete१)हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम में नियमित का अभाव
२) प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का स्वामूल्यांकन न होना
३) सीखें प्रशिक्षण का अनुश्रवण न होना
४) आंगनवाड़ी सहित अधिकांश शिक्षकों का अपनी दक्षता अनुरूप कार
तो नकरना
५) समाज में आंगनवाड़ी और प्राथमिक शिक्षक की योग
मत के अंतर में प्रचार प
रसदार न होना
शिक्षक की समस्या को उच्च स्तर पर अनदेखा किया जाना। स्टाप में कार्य करते समय टीम भावना की कमी।
ReplyDeleteअभिभावकों का अपेक्षित सहयोग न मिलना एक बहुत बड़ी समस्या है
ReplyDeletePoor background of child, uneducated parents,school are far from house, infrastructure of private school is better.
ReplyDeleteLack of teachers in government school
शिक्षक को पढाने के अतिरिक्त प्रतिदिन सैकड़ो कार्य दिये जाते है। शिक्षक अपनी तरफ से कुछ शिखा नही सकता। छात्र शिक्षक अनुपात मे शिक्षको की नियुक्ति न होकर प्रत्येक कक्षा मे एक शिक्षक की नियुक्ति हो। शिक्षको की समस्याओ का निराकरण न होना। प्राइवेट स्कूलो जैसे सभी नियम लागू हो।
ReplyDeleteMay 22, 2024 at 7:56 AM
ReplyDeleteAdhayapak se shikshan ke alava dusare school ke kam school timing me na ho isase adhyapak baccho ke liye jyada samay
हमारी शिक्षा व्यवस्था में कई चुनौतियाँ और कमियाँ हैं जिनके कारण बच्चों को पढ़ाई के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इन कमियों को पहचानकर और उचित कदम उठाकर सुधार किया जा सकता है। यहां कुछ प्रमुख कमियाँ और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की जा रही है:
ReplyDelete### प्रमुख कमियाँ
1. **रटने पर अधिक जोर**:
- **विवरण**: हमारी शिक्षा प्रणाली में अक्सर विद्यार्थियों को तथ्यों को रटने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनकी समझ और आलोचनात्मक सोच कमजोर पड़ जाती है।
- **समाधान**: शिक्षण विधियों को अधिक इंटरैक्टिव और अनुभवात्मक बनाया जाए, ताकि बच्चे समझ कर सीख सकें और अपनी रचनात्मकता का विकास कर सकें।
2. **व्यक्तिगत ध्यान की कमी**:
- **विवरण**: कक्षाओं में छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण शिक्षकों के लिए प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान देना मुश्किल होता है।
- **समाधान**: छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित करने के लिए अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया जाए।
3. **पुरानी पाठ्यक्रम सामग्री**:
- **विवरण**: पाठ्यक्रम सामग्री अक्सर पुरानी और अप्रासंगिक होती है, जिससे बच्चों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा नहीं मिल पाती।
- **समाधान**: पाठ्यक्रम की नियमित समीक्षा और अद्यतन किया जाए ताकि यह वर्तमान उद्योग और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार हो।
4. **स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी**:
- **विवरण**: कई स्कूलों में उचित कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ और खेल के मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं होतीं।
- **समाधान**: स्कूलों में आवश्यक बुनियादी ढाँचे और सुविधाओं का विकास किया जाए।
5. **शिक्षा में असमानता**:
- **विवरण**: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में गुणवत्ता में बड़ा अंतर होता है।
- **समाधान**: ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के लिए विशेष योजनाएँ और संसाधन प्रदान किए जाएं ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
6. **मूल्यांकन प्रणाली की खामियाँ**:
- **विवरण**: परीक्षा प्रणाली में बच्चों की समझ और कौशल का सही आकलन नहीं हो पाता।
- **समाधान**: मूल्यांकन प्रणाली को सुधार कर इसे अधिक व्यापक और बहुमुखी बनाया जाए, जिसमें परियोजना आधारित और निरंतर आकलन शामिल हों।
### सुधार के लिए कदम
1. **शिक्षण पद्धति में सुधार**:
- सक्रिय और इंटरैक्टिव शिक्षण पद्धतियों को अपनाया जाए, जैसे कि परियोजना आधारित सीखना, खेल आधारित शिक्षा, और प्रायोगिक गतिविधियाँ।
- शिक्षकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि वे नवीनतम शिक्षण तकनीकों से अवगत रहें।
2. **तकनीक का उपयोग**:
- डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जाए, ताकि बच्चों को विविध और सुलभ शिक्षण सामग्री मिल सके।
- ई-लर्निंग प्लेटफार्म और स्मार्ट क्लासरूम्स को बढ़ावा दिया जाए।
3. **समानता और समावेशिता**:
- शिक्षा में समानता को सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को समान अवसर मिलें।
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा का प्रबंध किया जाए।
4. **समग्र विकास पर ध्यान**:
- शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए खेल, कला, और सांस्कृतिक गतिविधियों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
- बच्चों की भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएं।
5. **बुनियादी ढाँचे का विकास**:
- सभी स्कूलों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ जैसे स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, और खेल के मैदान उपलब्ध कराए जाएं।
- नियमित रूप से स्कूल भवनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाए।
6. **पाठ्यक्रम में सुधार**:
- पाठ्यक्रम को नियमित रूप से अद्यतन किया जाए ताकि यह समसामयिक और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
- बच्चों की आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान कौशल को बढ़ावा देने वाले पाठ्यक्रम शामिल किए जाएं।
इन उपायों को लागू करने से शिक्षा प्रणाली में सुधार हो सकता है और बच्चों को पढ़ाई के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे वे अधिक समृद्ध और समग्र विकास की दिशा में अग्रसर हो सकेंगे।
बहुत ही सराहनीय
Deleteशिक्षको से सिर्फ शिक्षण कार्य ही करवाया जाए जिससे वह अपना पूरा फोकस विद्यार्थी पर कर सकें।
ReplyDeleteMain reason hai ki Mata-pita dhyan nahi dete bachchon ko ghar ke kamon main lage rehte hain
ReplyDeleteSabase phile shikshak aur chhatra ka anupat sahi kiya jay tha anykaryo se mukt kiya jay
ReplyDeleteसरकरि स्कूलों में बच्चा बिना कोई पूर्व शिक्षा प्राप्त किये बिना ही कक्षा1 में दाखला प्राप्त कर लेते हैं।बच्चो के घर का वातावरण भी पढ़ने के अनूकूल नही होता है।
ReplyDeleteAnganbadi mein Priya nursery ke jivan ki jo vyavastha hai bahut badhiya hai isase bacche ka sarvagya Vikas shuru ho jata hai FIR aage chalkar unhen bahut Sahyog milta hai
ReplyDeleteFixed syllabus.... teachers engaged in paper work and extra responsibility... parents unawareness...lack of facilities
ReplyDeleteshikhsha vyawastha mein kami nhi hai apitu abhibhavako ka aarthik roop se sampann na hona aur isi karan shiksha ke prati jagruk na hona hai.
ReplyDeleteआज कल टीचर को पढ़ाई के अतिरिक्त बहुत से विभागीय कार्य करने पड़ते हैं जिससे बच्चे भी पढ़ाई के प्रति सक्रिय नहीं होते। बच्चे भी डिस्टर्ब होते हैं
ReplyDeleteSikcha maie bachchon ki antarikaur bahay vikas bahut awshayak hai
ReplyDeleteMDM band kiya jaaye aur abhibhavakon ko Jagruk hone ki avashyakta hai
ReplyDeleteAbhibhavakon ko Jagruk hone ki avashyakta
ReplyDeleteParents did not support to teachers in rural area.they are busy in their lives. In the morning teachers go dore to dore and call students and than teaches
ReplyDeleteरेडिनेस के तहत विद्यालय, समुदाय व बच्चे तैयार होने चाहिए और कक्षा - कक्ष बाला के तहत परिपूर्ण होना चाहिए साथ ही साथ अध्यापक से शिक्षण कार्य के अलावा कोई अन्य शिक्षणेत्तर काम नहीं लिया जाना चाहिए ।
ReplyDeleteप्रमुख कारण है अभिभावकों का जागरूक ना होना शिक्षकों के साथ माता-पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है ।
ReplyDeleteसमाज का जागरूक होना बहुत आवश्यक है जब तक समाज जागरूक नहीं होगा तब तक एक अच्छे समाज का सपना नहीं देखा जा सकता अभिभावक को भी अपने बच्चे का ध्यान देना चाहिए एक बच्चे को अच्छा नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षक के साथ-साथ उसके अभिभावक का भी होता है ।
ReplyDeleteशिक्षा व्यवस्था में कमियां abhivavako शिक्षकों और बच्चों तीनों में एक समान रूप से होती है कभी बच्चे मुख्य धारा से छूट जाते हैं कभी अभिभावक बच्चों पर ध्यान नहीं देते हैं कभी शिक्षक उदासीन हो जाते हैं
ReplyDelete21 वी शदी की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा व्यवस्था NEP 2020 के तहत ये देखा गया है कि एक बहुत बड़ा वर्ग अशिक्षित वर्ग का है जो स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए इसीलिए NEP 2020 में यह व्यवस्था की गई है कि बच्चे स्कूली शिक्षा के माध्यम से बेहतर बन सके।
ReplyDeleteहमारी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सबसे पहले तो विद्यालय में सुधार की आवश्यकता है मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए साथ ही प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम 1 शिक्षक तो होना चाहिए । जब पूरे स्कूल को संभालने के लिए केवल 2 या 3 शिक्षक ही दिए जाएंगे तो फिर कितनी भी NEP ले आओं या कोई और स्कीम उनका संचालन पूर्ण रूप से कभी नहीं हो पाएगा ।
ReplyDeleteदूसरी बात शिक्षक को शिक्षक रहने दिया जाए लेकिन सरकारों ने शिक्षकों को बंधुआ मजदूर बना दिया है आज शिक्षक शिक्षण के अलावा सभी सरकारी कार्य और योजनाओं का डाटा तैयार करने मे एक क्लर्क की तरह 24 घंटे लगा रहता है ।
तीसरी बात अभिभावक पर अपने बच्चें को पढ़ाने के लिए कोई दबाव न होना । वह अपने बच्चे को स्कूल तब भेजता है जब बच्चा घर और खेत के कार्य से मुक्त हो अन्यथा वो परिवार के साथ खेत में मजदूरी ही करता रहता है और कभी कभी ही स्कूल आता है ।
और अन्त में सरकार कभी नही चाहती कि उनकी जनता शिक्षित हो जाए सरकारों का उद्देश्य केवल लोगों को साक्षर करने का है शिक्षित करने का नही । शिक्षित होगे तो तर्क करेंगें, रोजगार मांगेंगे, भड़काने में नही आएंगे फिर धर्म , मजहब, जाति, स्थान, भाषा, रंग रूप आदि मुद्दो पर लड़ेंगे कैसे और सरकारें बनेंगी कैसे।
वरना तो शिक्षा और शिक्षक के इतने बुरे हाल कभी न होते ।
Abhibhavakon Ka jagrook Na hona Pramukh Karan hai
ReplyDelete1)प्रशासनिक ढाचें का गुणवत्ता के प्रति उदासीन होना।
ReplyDelete2)सरकार द्वारा हर सत्र मे किताबों का बदलना
3)किसी भी शैक्षिक कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन हेतु पर्याप्त समय का ना दिया जाना।
4)एन.जी.ओ. द्वारा सुझाई गयीं अनावश्यक एवं जटिल गतिविधियों का कक्षा शिक्षण मे समावेश ः
5)सरकार द्वारा अभिभावकों के लिए कठोर नियम न लगाया जाना।
शिक्षक के नैतिकता मे कमी।
गुणवत्ता के आधार पर शिक्षण दण्ड अथवा पुरस्कार की उचित व
यवस्था न करना
Lack of transport facility in government school
ReplyDeleteशिक्षा व्यवस्था में एकरूपता हो। गरीबी दूर करके अभिभावकोंको जागरूक किया जाए। शिक्षा से ही विकास किया जा सकता है अतः हमें शिक्षित होना जरूरी है
ReplyDeleteशिक्षक अपनी जिम्मेदारियां को पूर्ण रूप से निभाएं की कोई भी बालक या बालिका शिक्षा से वंचित न रहने पाए। सरकार का भी दायित्व है कि शिक्षकों से शिक्षण कार्य ही कराएं।
ReplyDeleteIn this technology oriented world the major problem is technology itself...the more it is important the more it divert the student..integrated study with early stages proper orientation is important
ReplyDeleteविद्यार्थी,शिक्षक और पाठ्यक्रम ये तीन मुख्य धुरी।विद्यार्थी पाठ्यक्रम पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है शिक्षक पर अपेक्षाकृत कम।ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं की नितांत कमी है।जिससे शिक्षण प्रभावित हो रहा है।
ReplyDeleteशिक्षक वर्ग को शिक्षण कार्य के अतिरिक्त अन्य कार्यों में संलग्न न किया जाए।
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ReplyDeleteप्रमुख कारण है अभिभावकों का जागरूक न होना, अध्यापक के साथ अपितु माता पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
शिक्षकों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपने की वजह सिर्फ बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास में ही लगाया जाए तो गुणवत्ता परिणाम स्वरूप प्राप्त होगी |
ReplyDeleteAnganwadi karyakatri or shikshkon se anya kary karwana,parents ka jakrook n hona
ReplyDeleteShiksha ke prati jagrook karna chahiye.
ReplyDeleteTeachers should be free from field work only teaching is his or hers motive.Parents contribution is must
ReplyDeleteअभिभावकों का अपेक्षित सहयोग न मिलना एक बहुत बड़ी समस्या है
ReplyDeleteशिक्षक शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य न करवाया।
प्रमुख कारण है अभिभावकों का जागरूक न होना, अध्यापकों के साथ माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
ReplyDeleteIska mukhy Karan Mata pita dwara bacho ko uchit margdarshan na dena
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ReplyDeleteअभिभावकों को शिक्षा का महत्व न समझना, शिक्षा प्राप्त करके भी रोजगार न मिलना, व्यावसायिक प्रशिक्षण का अभाव, पैसे की कमी, शिक्षा सामग्री समय पर न मिलना आदि
ReplyDeleteChild needs proper guidance from both teacher and parents.
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ReplyDeleteप्रमुख कारण है अभिभावकों का जागरूक न होना, अध्यापक के साथ अपितु माता पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा के महत्व को न समझना, जागरूकता की कमी, सरकार द्वारा अच्छे स्कूलों में कम निवेश करना l
ReplyDeleteगरीबी, अशिक्षा और शिक्षा के महत्व को न समझना आदि बहुत से ऐसे कारण हैं। प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों पर सरकार को नियंत्रण रखना चाहिए।
ReplyDeleteAbhibhavakon ka aapekshit Sahyog na Milana ek bahut badi samasya hai,, shikshak se shikshan karya ke atirikt koi Anya karya Na karvaya jaye
ReplyDeleteशिक्षक,अभिभावक व समुदाय सभी के समर्पण, सहयोग व जागरूकता से ही बच्चों की बुनियादी साक्षरता का मजबूत ढांचा तैयार किया जा सकता है
ReplyDeleteशिक्षक, अभिभावक व समुदाय सभी के सहयोग से ही बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत किया जा सकता है। साथ ही शिक्षा को एक मिशन का रूप दिया जाय।
ReplyDeleteप्री प्राइमरी स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को शिक्षा का प्रावधान जो नई शिक्षा नीति के अंतर्गत किया गया है उसकी आवश्यकता वहुत साल पहले से ही थी जबसे प्राइवेट स्कूलो में किंडरगार्टन व्यवस्था शुरू की गई थी। पर अब इन कक्षाओं में बच्चों को पढ़ने के लिए उपयुक्त सामग्री की भी उतनी ही आवश्यकता है। बच्चों को लिखने के अभ्यास के लिए डॉटेड हिंदी व अंग्रेजी की वर्णमाला और गिनती की कार्यपुस्तिकाएँ भी निशुल्क दी जाए।
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