कोर्स 4 : गतिविधि 4 : विचार करें

एक क्षण रुकें और आपके द्वारा भ्रमण किए गए प्री-स्‍कूलों/आंगनवाड़ियों में आमतौर से देखी गई कठिनाइयों के बारे में सोचें। यह जानने का प्रयास करें कि किन कठिनाइयों का हल अभिभावकों एवं समुदाय के सदस्‍यों की सहायता से निकाला जा सकता है। पुन: इस बात पर विचार करने का प्रयास करें कि इन व्‍यक्तियों तक कैसे पहुँचा जा सकता है और स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कहा जा सकता है। अपने विचार साझा करें।

Comments

  1. ईसीसीई स्कूल और जीवन में सीखने के लिए एक बुनियादी प्रदान करता है

    ReplyDelete
    Replies
    1. निःसंदेह।व्यवहारिक रूप में सभी प्रकार की योजनाओं और परियोजनाओं की सफलता कुशल कार्यकर्ताओं की निष्ठा ,ईमानदारी और उनको प्रदान की जाने वाली सुविधाओं पर निर्भर करता है।
      ecce बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। अच्छा भयमुक्त बचपन सर्वांगीण विकास की प्रथम सीढ़ी है।

      Delete
    2. आंगनवाड़ी केन्द्रों के द्वारा सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाया जाता है।

      Delete
  2. आगंनवाडी के माध्यम से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करे

    ReplyDelete
  3. Though there is some lack of interactive playful learning atmosphere in preschools but it can be overcomed by bringing awareness among parents and school staff about the importance of these early childhood years in the foundational literacy and numeracy of children and importance of play as learning tool

    ReplyDelete
  4. samman bahut se dwar kholta hai, yadi abhibhavak ko lagega ki uske paalya ke karan uska sir ooncha ho raha hai to vo jarur sahayata karnege

    ReplyDelete
  5. Aanganwadi karyakatri avam sikho ko bachcho k teekakaran wale din hi yojna badh tareeke se abhibhavako k saamne apni yojna aur sarkar ki soch aur yojna k baare me bta kr unki sahbhagita ki upyogita btani chahiye

    ReplyDelete
  6. गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करना आवश्यक है।

    ReplyDelete
  7. Aganbadi generally faces lack of space for outdoor games, improper light ,water facilities. This can be done with the help of community

    ReplyDelete
    Replies
    1. samman bahut se dwar kholta hai, yadi abhibhavak ko lagega ki uske paalya ke karan uska sir ooncha ho raha hai to vo jarur sahayata karnege

      Delete
  8. बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उनके अभिभावकों से वार्तालाप करने की आवश्यकता होती है क्योंकि ज्यादातर बच्चे स्वच्छ रूप से विद्यालय नहीं पहुंचते हैं जिससे उनमें बहुत सी बीमारियां होने का डर बना रहता है अगर बच्चे स्वस्थ नहीं रहेंगे तो उनका मन भी पढ़ने में या गतिविधि करने में नहीं लगेगा तो स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है

    ReplyDelete
  9. We gave respect nd love to parents, result is positive that now parents are curious nd conscious, they are communicating to class teacher......alll efforts are done with in five years, students be always attentive to clean their rooms, toilets, nd other places.after three years I got success, to cultivate the habit of cleanliness, rights nd their duties

    ReplyDelete
  10. We need to talk with each child and their parents. We also make educational relations with them. We should create a repo with all related persons.

    ReplyDelete
  11. અભિભાવક અને સમુદાયોની ભાગીદારી

    ReplyDelete
  12. गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर में उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करना आवश्यक है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर में उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करना आवश्यक है।

      Delete
    2. We need to talk with each child and their parents. We also make educational relations with them. We should create a repo with all related persons.

      Delete
  13. अंगणवाडी के लिये स्वतंत्र bulding) की जरुरी हैं जहा यह सुविधा नही है वहा बहुत समस्या है बच्चो के स्वास्थ ठीक है तो उनकी पढाई मैं गत वीधिया करने मैं मन लगेगा अंगणवाडी सेविका सभी अंगणवाडीयोमै प्रशिक्षित होनी चाहिए खेल आधारित गत विधीया के लिये संसाधन की आवश्यकता हैं

    ReplyDelete
  14. प्रशिक्षित अंगणवाडी सेविका की आवश्यकता हैं अंगणवाडी कार्यकर्ता की समस्या देख कर अभिभावको ने मदत करनेवाले की संख्या देखिये आजादी के अमृत महोत्सवी वर्ष मैं भी अंगणवाडी की समस्या अधिक है अंगणववाडी के स्वतंत्र इमारत होना जरुरी है खेल संसाधन होना जरुरी है

    ReplyDelete
  15. आगंनवाडी कार्यकत्री के माध्यम से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करे

    ReplyDelete
  16. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे अभिभावकों को घर में पढ़े व्यर्थ सामान से विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री बनाने की प्रेरणा दें और बच्चों को छोटी-छोटी कहानियां सुनाएं जिससे बच्चे खेल खेल भी सीख सकें

    ReplyDelete
  17. छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उनके अभिभावकों से वार्तालाप करने की आवश्यकता होती है क्योंकि कुछ बच्चे स्वच्छ रूप से विद्यालय नहीं पहुंचते हैं जिससे उनमें बहुत सी बीमारियां होने का डर बना रहता है अगर बच्चे स्वस्थ नहीं रहेंगे तो उनका मन भी पढ़ने में या अन्य गतिविधियों में नहीं लगेगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे अभिभावकों को घर में पढ़े व्यर्थ सामान से विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री बनाने की प्रेरणा दें और बच्चों को छोटी-छोटी कहानियां सुनाएं जिससे बच्चे खेल खेल में सीख सकें

    ReplyDelete
  18. गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करना आवश्यक है।

    ReplyDelete
  19. Sala Mein hone wali gatividhiyon se abhibhavakon ko nirantar batana chahie jisse Ve Sahyog AVN sahayata prapt Karen

    ReplyDelete
  20. Telling story is a good and easy method

    ReplyDelete
  21. We should be in contact with Sarpanch,parents and other social networks.

    ReplyDelete
  22. We need to talk with each child and their parents. We also make educational relations with them. We should create a repo with all related persons.

    ReplyDelete
  23. बेहतर शिक्षण हेतु आंगनबाड़ी में खेल के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए माहोल स्वच्छ होना चाहिए साथ ही अभिभावकों को बच्चो के प्रति ध्यान देना चाहिए की वे स्वच्छ कपड़े एवम गणवेश पहना कर बच्चो को आंगनबाड़ी भेजे साथ ही खेल गतिविधि हेतु घर के वेस्ट मटेरियल का सही दिशा में उपयोग कर शिक्षण सामग्री बनाने में उपयोग करें

    ReplyDelete
  24. प्रशिक्षित अंगणवाडी सेविका की आवश्यकता हैं अंगणवाडी कार्यकर्ता की समस्या देख कर अभिभावको ने मदत करनेवाले की संख्या देखिये आजादी के अमृत महोत्सवी वर्ष मैं भी अंगणवाडी की समस्या अधिक है अंगणववाडी के स्वतंत्र इमारत होना जरुरी है खेल संसाधन होना जरुरी है

    ReplyDelete
  25. अभिभावकों को प्रिस्कूल की आवश्यकता के बारे बताना चाहिए। प्रिस्कूल मे बच्चे अनेक चीजे सीख पाते हे जो उनके आगामी स्कूल में उपयोगी सिद्ध होती हे

    ReplyDelete
  26. सरपंच तथा अभिभावकों से संपर्क कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है l

    ReplyDelete
  27. अभिभावकों का सहयोग जरूरी हैं।

    ReplyDelete
  28. Programmo me bulakar apani baat kahana

    ReplyDelete
  29. विद्यालय के कार्यक्रम में अभिभावक को भी आमंत्रित किया जाए

    ReplyDelete
  30. छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उनके अभिभावकों से वार्तालाप करने की आवश्यकता होती है क्योंकि कुछ बच्चे स्वच्छ रूप से विद्यालय नहीं पहुंचते हैं जिससे उनमें बहुत सी बीमारियां होने का डर बना रहता है अगर बच्चे स्वस्थ नहीं रहेंगे तो उनका मन भी पढ़ने में या अन्य गतिविधियों में नहीं लगेगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे अभिभावकों को घर में पढ़े व्यर्थ सामान से विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री बनाने की प्रेरणा दें और बच्चों को छोटी-छोटी कहानियां सुनाएं जिससे बच्चे खेल खेल में सीख सकें।

    ReplyDelete
  31. पालकों व जनप्रतिनिधियों से सीधे मिल सकते हैं।या आंगनबाड़ी में आमंत्रित किया जा सकता है।

    ReplyDelete
  32. आंगनबाड़ी कार्यकत्री को नियमित प्रशिक्षित करना चाहिए और नियमित रूप से बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में भेजा जाना चाहिए। आंगनबाड़ी केंद्र के लिए अपनी अलग भवन होना चाहिए। खेल गतिविधियां करने के लिए आवश्यक सामग्री होनी चाहिए।

    ReplyDelete
  33. विद्यालयी जीवन बहुत ही रोचक और आनंददायी जीवन होता है जिसमे बच्चे अपने परिवार के बाद सबसे ज्यादा पसंद करते है। क्योंकि विद्यालय में बच्चो को बहुत कुछ सीखने को मिलता है साथ ही वे विद्यालय में दूसरे बच्चो को अपना दोस्त बनाते है और उनके साथ में खेल खेलना उनको बहुत ही अच्छा लगता है। इस प्रकार बच्चे विद्यालय जीवन में अपने आपको स्वछंद महुसस करते है।

    ReplyDelete
  34. आंगनबाडी में होनें वाली कठिनाई अंतर्गत बच्चों की अनियमित उपस्थिति, जिसे अभिभावकों की सक्रियता से दूर किया जा सकता है। बच्चों के सीखनें हेतु घर पर सहयोग एवं वातावरण निर्माण आवश्यक है।

    ReplyDelete
  35. ईसीसीई केंद्र पर महसूस की जाने वाली कठिनाईया:- 1. शौचालय की कमी
    2. बैठक रूम की कमी
    3. शिक्षण सामग्री की कमी
    उपाय:- जन सहयोग व सरकारी सहयोग
    अभिभावक सक्रिय भूमिका निभाई।

    ReplyDelete
  36. बच्चों को सिखाने का स्वतंत्र वातवरण दिया जाए और इसमे अभिभावको की सकारात्मक जिम्मेदारी सुनीश्चित की जायें |

    ReplyDelete
  37. अभिभावकों के माध्यम से आर्थिक सहयोग तथा अन्य कार्यों में सहयोग लिया जा सकता है।

    ReplyDelete
  38. अभिभावकों को प्रिस्कूल की आवश्यकता के बारे बताना चाहिए। प्रिस्कूल मे बच्चे अनेक चीजे सीख पाते हे जो उनके आगामी स्कूल में उपयोगी सिद्ध होती हे

    ReplyDelete
  39. Though there is some lack of interactive playful learning atmosphere in preschools but it can be overcomed by bringing awareness among parents and school staff about the importance of these early childhood years in the foundational literacy and numeracy of children and importance of play as learning tool

    ReplyDelete
  40. Attendance
    Cleanliness

    ReplyDelete
  41. मनोरंजन से अभिभावक को अवगत कराकर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चों के विकास हेतु प्रेरित करना आवश्यक है।

    ReplyDelete
  42. आंगनवाड़ी के लिये स्वतंत्र भवन आवश्यक है जहा यह सुविधा नही है वहां बहुत समस्या है बच्चो के स्वास्थ्य और उनकी पढाई में मन लगेगा आंगनवाड़ी सेविका प्रशिक्षित होनी चाहिए खेल आधारित गतिविधियो के लिये संसाधन की आवश्यकता हैं

    ReplyDelete
  43. Infrastructure problem, parents education, inappropriate atmosphere

    ReplyDelete
  44. A regular workshop for staff , teachers and other work force need to take place.
    Which will make them aware about what they are doing as foundations block

    ReplyDelete
  45. आम कठिनाइयाँ:संसाधनों की कमी:स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में पर्याप्त शैक्षिक सामग्री, खेल के उपकरण, और बुनियादी ढांचे की कमी।पोषण और स्वास्थ्य समस्याएँ:बच्चों को उचित पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं न मिलना।शिक्षकों की कमी और प्रशिक्षण की आवश्यकता:पर्याप्त शिक्षकों का अभाव और मौजूदा शिक्षकों का प्रशिक्षण स्तर निम्न होना।उपस्थिति और भागीदारी की कमी:बच्चों और माता-पिता की स्कूल की गतिविधियों में कम भागीदारी।सुरक्षा संबंधी समस्याएँ:स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में सुरक्षा का अभाव।समाधान में अभिभावक और समुदाय की भूमिका:संसाधनों की पूर्ति:समुदाय का योगदान: समुदाय के सदस्य, एनजीओ, और स्थानीय व्यापारिक संस्थाएं स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों को शैक्षिक सामग्री, खेल के उपकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए सहायता प्रदान कर सकते हैं।स्वयंसेवक कार्यक्रम: अभिभावक और समुदाय के सदस्य स्वयंसेवक के रूप में स्कूल में समय दे सकते हैं, जिससे संसाधनों की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है।पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ:स्थानीय स्वास्थ्य शिविर: समुदाय के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर सकते हैं, जिससे बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।पोषण संबंधी जागरूकता: अभिभावकों को पोषण और स्वस्थ खाने की आदतों के बारे में जागरूक किया जा सकता है।शिक्षकों का प्रशिक्षण:समुदाय आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम: स्थानीय शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के सहयोग से शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।माता-पिता का सहयोग: शिक्षित अभिभावक स्वयं भी कुछ विषयों में शिक्षण कार्य में सहयोग कर सकते हैं।उपस्थिति और भागीदारी को प्रोत्साहन:माता-पिता-शिक्षक संघ: नियमित माता-पिता-शिक्षक बैठकें आयोजित कर अभिभावकों को स्कूल की गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है।समुदाय की भागीदारी: स्थानीय उत्सव और कार्यक्रमों में स्कूल की गतिविधियों को शामिल कर समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।सुरक्षा उपाय:समुदाय की निगरानी: समुदाय के सदस्य स्कूल की सुरक्षा निगरानी में सहायता कर सकते हैं।सुरक्षा प्रशिक्षण: बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जा सकता है।इन व्यक्तियों तक पहुंचने के तरीके:समाज-आधारित बैठकों का आयोजन:नियमित रूप से सामुदायिक बैठकें आयोजित करना, जिसमें स्कूल की समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की जा सके।स्थानीय मीडिया का उपयोग:स्थानीय अखबार, रेडियो और सोशल मीडिया का उपयोग कर समुदाय को जागरूक करना और उनकी भागीदारी के लिए प्रेरित करना।स्वयंसेवक नेटवर्क का निर्माण:एक स्वयंसेवक नेटवर्क बनाना, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग शामिल हो सकें और अपने-अपने तरीकों से सहायता कर सकें।सामुदायिक कार्यक्रमों में भागीदारी:स्थानीय मेलों, उत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्कूल की गतिविधियों को प्रस्तुत करना और लोगों को भागीदारी के लिए प्रेरित करना।नियमित संचार:अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों के साथ नियमित संचार बनाए रखना, ताकि वे स्कूल की गतिविधियों और उनकी भूमिका के बारे में सूचित रह सकें।इन उपायों को अपनाकर स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों की कठिनाइयों को कम किया जा सकता है और अभिभावकों एवं समुदाय की भागीदारी से शैक्षिक वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है।

    ReplyDelete
  46. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  47. अभिभावकों को प्रिस्कूल की आवश्यकता के बारे बताना चाहिए। प्रिस्कूल मे बच्चे अनेक चीजे सीख पाते हे जो उनके आगामी स्कूल में उपयोगी सिद्ध होती हे

    ReplyDelete
  48. Abhibhabhak aur samdayak ki bhagidari zaroori hai

    ReplyDelete
  49. बच्चों के विकास में समुदाय एवं अभिभावकों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है

    ReplyDelete
  50. Sthan ki kami jaise outdoor activities ke liye gram samaj ki meeting me uthana tha vikas yojana me samil karvana

    ReplyDelete
  51. Abhibhavak bacchon ko ghar mein Rakhi Hui samagri se gatividhi karaen

    ReplyDelete
  52. Bacchon ke vikas me family ka support bahut jaruri hai

    ReplyDelete
  53. मैंने देखा है कि प्राय आंगनवाडीयो में आउट डोर खेलने के लिए कोई जगह नहीं होती है अत: केंद्र की बिल्डिंग में ही खेल के लिए पर्याप्त जगह होना चाहिए |

    ReplyDelete
  54. बेहतर शिक्षण हेतु आंगनबाड़ी में खेल के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए माहोल स्वच्छ होना चाहिए साथ ही अभिभावकों को बच्चो के प्रति ध्यान देना चाहिए की वे स्वच्छ कपड़े एवम गणवेश पहना कर बच्चो को आंगनबाड़ी भेजे साथ ही खेल गतिविधि हेतु घर के वेस्ट मटेरियल का सही दिशा में उपयोग कर शिक्षण सामग्री बनाने में उपयोग करें

    ReplyDelete
  55. Anganbaadi maie bataye Gayee swasthya sambandhit ccheejo ko dhyaan Dekar jeevan maie Upyog kiyaa jataa hai takai swachtaa ke sawasthya ke arati stark rahanaa chaahiye

    ReplyDelete
  56. अभिभावकों को जागरूक करें

    ReplyDelete
  57. Bacchon ke mansik Vikas ke liye abhibhavakon ki sevakta bahut hi jaruri hai

    ReplyDelete
  58. भ्रमण, बाजार व मेले के आयोजन से एक तो अभिभावकों का जुड़ाव विद्यालय के प्रति होगा दूसरे बच्चे इस तरह के आयोजनों से खेल - खेल में खूब सीखते है।

    ReplyDelete
  59. आंगनबाड़ियों में भ्रमण के दौरान उनमें उत्पन्न हो रही कठिनाइयों का सामना उपस्थित बच्चे और शिक्षक करते हैं इसमें समुदाय का सहयोग लेकर के एक-एक बिंदुओं पर चर्चा करके अभिभावकों के साथ संपर्क बनाकर के स्थितियों को बेहतर किया जा सकता है

    ReplyDelete
  60. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे अभिभावकों को घर में पढ़े व्यर्थ सामान से विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री बनाने की प्रेरणा दें और बच्चों को छोटी-छोटी कहानियां सुनाएं जिससे बच्चे खेल खेल भी सीख सकें

    ReplyDelete
  61. We need to talk with parents to send their child in school regularly.

    ReplyDelete
  62. प्री प्राइमरी शिक्षा हेतु अभिभावकों को जागरूक करना और बच्चों को विद्यालय में उपस्थिति हेतु विभागों को भी समय-समय पर विद्यालय में बुलाना और विद्यालय कार्यक्रमों में उनका सहयोग लेना। समय-समय पर अभिभावकों को जागरूकता हेतु रैली का आयोजन करना और उसके क्या-क्या लाभ है उसको प्रदर्शित करना और उन्हें समझना और बताना। जब भी विद्यालय में एसएमसी बैठक आयोजित की जाए उसमें अधिक से अधिक अभिभावकों को बुलाया जाए।

    ReplyDelete
  63. Anganbadi Kendra aur Puri primary schoolon mein Sabse badi samasya bacchon ka niyamit school mein upsthit n hona hai. Iske liye hamen abhibhavakon aur samuday Ka Sahyog Lena chahie aur abhibhavakon Ko Shiksha ke prati jagruk aur prerit karne ki avashyakta hai

    ReplyDelete
  64. बच्चों के साथ मिलकर रोचक गतिविधियां कराएं जिससे आनंददायक वातावरण का निर्माण किया जा सके तथा अभिभावक को समय समय पर मीटिंग कर उनको जागरूक करे।

    ReplyDelete
  65. अब तक देखे गए आंगनबाड़ी केदो से यह निष्कर्ष निकलता है कि अभिभावक में जागरूकता की कमी के साथ अशिक्षा गरीबी मजदूरी के कार्यों में लिप्त होना बच्चों की तरफ ध्यान ना देना इसका एक महत्वपूर्ण कारण के रूप में दिखता है इसके साथ ही बच्चों का स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक न होना मुझे ऐसा लगता है कि इनमें कुछ हद तक अपने स्तर से सुधार किया जा सकता है जैसे अभिभावकों से नित्य संपर्क कर उन्हें समग्र विकास के बारे में जागरूक करना बताना और बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रखना

    ReplyDelete
  66. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  67. बच्चों की स्वास्थ्य जानकारी हेतु अभिभावक से संपर्क करना है और अभिभावक को बताना है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन मस्तिष्क निवास करता है।

    ReplyDelete
  68. अलग-अलग परिवार के बच्चों का नियमित न आना आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा अपने काम के प्रति उत्साह ना दिखना
    कक्षा कक्ष का प्रिंट समृद्ध ना होना

    ReplyDelete
  69. अभिभावकों को जागरूक करें

    ReplyDelete
  70. Abhibhavakon ko jagrook karne ke liye meeting karein.

    ReplyDelete
  71. Regular meetings with parents is must

    ReplyDelete
  72. गतिविधियों से अभिभावकों को अवगत कराकर घर में उपलब्ध सामग्री से बच्चों के विकास हेतु प्रेरित करना आवश्यक

    ReplyDelete
  73. सरपंच तथा अभिभावकों से संपर्क कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है l

    ReplyDelete
  74. Gatividhiyon se bhi abhibhavakon avgat kara kar ghar mein uplabdh samagri se bacchon ka Vikas hetu prerit karvaya ja sakta hai.

    ReplyDelete
  75. आंगनवाड़ी में बच्चों के लिए उपलब्ध खिलौने होने चाहिए अभी भी कुछ गांव ऐसे हैं जहां आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए खिलौने नहीं है अगर समाज एक छूट होकर कुछ खिलौने और सरकार उनकी तरफ ध्यान दे तो बच्चों के विकास के लिए अग्रसर प्रयास किया जा सकते

    ReplyDelete
  76. अभिभावक एवं परिवार का सहयोग बच्चों के विकास मे अतिमहत्वपूर्ण है।

    ReplyDelete
  77. आगंनवाडी के माध्यम से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से अभिभावक को अवगत करा कर घर मै उपलब्ध सामग्री से बच्चो के विकास हेतु प्रेरित करे

    ReplyDelete
  78. आम कठिनाइयाँ:संसाधनों की कमी:स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में पर्याप्त शैक्षिक सामग्री, खेल के उपकरण, और बुनियादी ढांचे की कमी।पोषण और स्वास्थ्य समस्याएँ:बच्चों को उचित पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं न मिलना।शिक्षकों की कमी और प्रशिक्षण की आवश्यकता:पर्याप्त शिक्षकों का अभाव और मौजूदा शिक्षकों का प्रशिक्षण स्तर निम्न होना।उपस्थिति और भागीदारी की कमी:बच्चों और माता-पिता की स्कूल की गतिविधियों में कम भागीदारी।सुरक्षा संबंधी समस्याएँ:स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में सुरक्षा का अभाव।समाधान में अभिभावक और समुदाय की भूमिका:संसाधनों की पूर्ति:समुदाय का योगदान: समुदाय के सदस्य, एनजीओ, और स्थानीय व्यापारिक संस्थाएं स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों को शैक्षिक सामग्री, खेल के उपकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए सहायता प्रदान कर सकते हैं।स्वयंसेवक कार्यक्रम: अभिभावक और समुदाय के सदस्य स्वयंसेवक के रूप में स्कूल में समय दे सकते हैं, जिससे संसाधनों की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है।पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ:स्थानीय स्वास्थ्य शिविर: समुदाय के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर सकते हैं, जिससे बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।पोषण संबंधी जागरूकता: अभिभावकों को पोषण और स्वस्थ खाने की आदतों के बारे में जागरूक किया जा सकता है।शिक्षकों का प्रशिक्षण:समुदाय आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम: स्थानीय शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के सहयोग से शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।माता-पिता का सहयोग: शिक्षित अभिभावक स्वयं भी कुछ विषयों में शिक्षण कार्य में सहयोग कर सकते हैं।उपस्थिति और भागीदारी को प्रोत्साहन:माता-पिता-शिक्षक संघ: नियमित माता-पिता-शिक्षक बैठकें आयोजित कर अभिभावकों को स्कूल की गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है।समुदाय की भागीदारी: स्थानीय उत्सव और कार्यक्रमों में स्कूल की गतिविधियों को शामिल कर समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।सुरक्षा उपाय:समुदाय की निगरानी: समुदाय के सदस्य स्कूल की सुरक्षा निगरानी में सहायता कर सकते हैं।सुरक्षा प्रशिक्षण: बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जा सकता है।इन व्यक्तियों तक पहुंचने के तरीके:समाज-आधारित बैठकों का आयोजन:नियमित रूप से सामुदायिक बैठकें आयोजित करना, जिसमें स्कूल की समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की जा सके।स्थानीय मीडिया का उपयोग:स्थानीय अखबार, रेडियो और सोशल मीडिया का उपयोग कर समुदाय को जागरूक करना और उनकी भागीदारी के लिए प्रेरित करना।स्वयंसेवक नेटवर्क का निर्माण:एक स्वयंसेवक नेटवर्क बनाना, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग शामिल हो सकें और अपने-अपने तरीकों से सहायता कर सकें।सामुदायिक कार्यक्रमों में भागीदारी:स्थानीय मेलों, उत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्कूल की गतिविधियों को प्रस्तुत करना और लोगों को भागीदारी के लिए प्रेरित करना।नियमित संचार:अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों के साथ नियमित संचार बनाए रखना, ताकि वे स्कूल की गतिविधियों और उनकी भूमिका के बारे में सूचित रह सकें।इन उपायों को अपनाकर स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों की कठिनाइयों को कम किया जा सकता है और अभिभावकों एवं समुदाय की भागीदारी से शैक्षिक वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है।

    ReplyDelete
  79. अभिभावक की अशिक्षा एवं मजदूरी में संलग्न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को समय नहीं देते हैं इसके लिए शिक्षकगण को समय समय पर मीटिंग कर उनको ज़िम्मेदारी से अवगत कराते हुए उन्हें जागरूक करे।

    ReplyDelete
  80. बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु समुदाय का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों में समर्पण भावना की भी कमी पाई जाती है

    ReplyDelete
  81. प्री प्राइमरी में बच्चे आनंददायक वातावरण में सींखे इसके लिए आंगनबाड़ी की कार्यकर्त्री के समर्पण के साथ साथ जनसमुदाय का सहयोग भी अतिआवश्यक है

    ReplyDelete
  82. प्री प्राइमरी यदि सड़क के किनारे हो तो अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से केंद्र पर छोड़ने व ले जाने के लिए स्वयं आएं

    ReplyDelete
  83. बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उनके अभिभावकों से वार्तालाप करने की आवश्यकता होती है क्योंकि ज्यादातर बच्चे स्वच्छ रूप से विद्यालय नहीं पहुंचते हैं जिससे उनमें बहुत सी बीमारियां होने का डर बना रहता है अगर बच्चे स्वस्थ नहीं रहेंगे तो उनका मन भी पढ़ने में या गतिविधि करने में नहीं लगेगा तो स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog